Explainer: 126 पेशी, 22 गवाह और नीला ड्रम! ऐसे खुलीं सौरभ राजपूत हत्याकांड की वो कड़ियां, जिनसे मुस्कान-साहिल को मिली मौत की सजा

Published on 14 अक्टू॰ 2026

Saurabh Rajput Murder Case: मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया है. बुधवार को मेरठ की जिला अदालत ने पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है. दोनों को 30 सितंबर को ही दोषी ठहराया जा चुका था. अब सवाल यह है कि कभी सिर्फ 'नीले ड्रम' के नाम से चर्चित हुए इस केस में अदालत तक पहुंचते-पहुंचते अभियोजन पक्ष ने कौन-सी कड़ियां जोड़ीं. आइए आपको एक-एक कर ये डिटेल में बताते हैं.

इस केस में जांच से फैसले तक कौन-कौन से अहम पड़ाव आए?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वारदात 3 मार्च 2025 को हुई थी. पुलिस ने 17-18 मार्च के बीच मामले का खुलासा किया और दोनों को गिरफ्तार किया. इसके करीब दो महीने बाद, 12 मई 2025 को पुलिस ने लगभग 1000 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की. इसके बाद मुकदमा चला, जिसमें कुल 126 पेशियां हुईं. 17 सितंबर 2026 को अंतिम बहस पूरी हुई. 30 सितंबर को अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया और 14 अक्टूबर को सजा सुनाई गई.

— ANI Digital (@ani_digital) October 14, 2026

अभियोजन पक्ष की कहानी क्या थी?

अभियोजन का आरोप था कि मुस्कान ने सौरभ को नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया और साहिल के साथ मिलकर चाकू से उनकी हत्या कर दी थी. इसके बाद शव के टुकड़े किए गए उन्हें नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से सील कर दिया गया. अभियोजन पक्ष ने यह पूरी कहानी अदालत में गवाहों, दस्तावेजों और वैज्ञानिक रिपोर्टों के जरिए साबित की. 

केस में पेश किए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्य क्या होते हैं?

जानकारी के मुताबिक जब किसी अपराध को किसी ने सीधे अपनी आंखों से न देखा हो, तब अदालत उन हालात और तथ्यों पर भरोसा करती है जो एक-दूसरे से जुड़कर अपराध की तरफ इशारा करते हैं. इन्हीं को परिस्थितिजन्य साक्ष्य कहा जाता है. इस मामले में हत्या का कोई सीधा चश्मदीद नहीं बताया गया है इसलिए अभियोजन ने अपना पूरा केस ऐसी ही कड़ियों पर खड़ा किया.

#WATCH | Meerut, UP: Saurabh Rajput's mother, Renu Devi, says, "We feel very good; we are deeply satisfied that both of them have been sentenced to death. We received the justice we were seeking. We are extremely grateful to our lawyers, associates, and staff; we will always… https://t.co/Y1d4CFH06kpic.twitter.com/EbGubUPSOH

— ANI (@ANI) October 14, 2026

अदालतें परिस्थितिजन्य साक्ष्य को कैसे परखती हैं?

सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों के मुताबिक ऐसे मामलों में हर परिस्थिति पूरी तरह साबित होनी चाहिए और सभी परिस्थितियां मिलकर सिर्फ आरोपी के दोष की ओर ही इशारा करें. साथ ही कड़ी इतनी पूरी हो कि बेगुनाही की कोई गुंजाइश न बचे. यानी सिर्फ शक के आधार पर सजा नहीं हो सकती. हालांकि इस मामले के विस्तृत फैसले की प्रति अभी मेरे सामने नहीं है. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि अदालत ने अपने आदेश में ठीक किन शब्दों में यह कसौटी

अदालत में किन सबूतों की बात सबसे ज्यादा हुई?

अभियोजन ने बताया कि वारदात से पहले चाकू, उस्तरा, सीमेंट, बालू और एक बड़ा नीला ड्रम खरीदा गया था. रिपोर्टों के मुताबिक आरोपियों ने सौरभ के फोन से परिवार को संदेश भेजकर उन्हें गुमराह करने की भी कोशिश की थी. इसके अलावा आरोप है कि मुस्कान सौरभ का मोबाइल अपने साथ ले गई और साहिल के साथ कसौल घूमने गई ताकि सबको लगे कि सब सामान्य है. बता दें जांच में पुलिस ने सीलबंद ड्रम को काटकर सौरभ के शव के हिस्से बरामद किए थे.

मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट की क्या भूमिका रही?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में धारदार हथियार से किए गए हमले के निशान दर्ज किए गए और चाकू से हत्या की बात सामने आई थी. पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य अदालत में पेश किए. इसका मकसद यह साबित करना था कि मौत का तरीका वही था जो अभियोजन की कहानी में बताया गया है.

#WATCH | Meerut, Uttar Pradesh | Saurabh Rajput murder case | Jail Superintendent Viresh Raj Sharma says, "Following the court’s decision today, their status and conditions of confinement in jail will change. They will be allotted convict prisoner numbers, given prison uniforms,… pic.twitter.com/Gj0JkDvY9Z

— ANI (@ANI) October 14, 2026

डिजिटल सबूतों का क्या असर पड़ा?

रिलायंस जियो के नोडल अधिकारी ने अदालत में दोनों आरोपियों की कॉल डिटेल, चैट और मोबाइल लोकेशन की रिपोर्ट पेश की थी. इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि घटना के दिनों में आरोपी किस जगह और किस संपर्क में थे. ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड परिस्थितिजन्य मामलों में अक्सर कड़ियों को जोड़ने का काम करते हैं.

22 गवाहों के बयान क्यों अहम थे?

सौरभ के परिवार की ओर से कुल 22 गवाह पेश किए गए. इनमें सौरभ के भाई बबलू राजपूत ने अदालत में आठ बार बयान दर्ज कराए और उनकी मां ने भी गवाही दी थी. इसके साथ पुलिस, फॉरेंसिक टीम और जियो के नोडल अधिकारी जैसे तकनीकी गवाह भी पेश हुए. अदालत के निर्णय के मुताबिक परिजनों के बयान घटनाक्रम और रिश्तों की पृष्ठभूमि बताते हैं जबकि तकनीकी गवाह सबूतों की प्रामाणिकता साबित करते हैं. दोनों ने मिलकर ही इस हत्याकांड की पूरी कहानी को अदालत में साबित करने का काम किया. 

अदालत ने दोषसिद्धि तक पहुंचने के लिए क्या देखा?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने पाया कि अभियोजन गवाहों और साक्ष्यों की कड़ी जोड़ने में कामयाब रहा. जिसके आधार पर दोनों को हत्या, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराया गया. फैसले में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का भी हवाला देते हुए कहा गया कि ऐसे अपराध समाज और उसके ताने-बाने पर गहरा असर डालते हैं.

सजा पर अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने इस वारदात को बेहद क्रूर बताया है. कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोरपियों का गुनाह किसी भी हाल में माफी के लायक नहीं है. अभियोजन और सौरभ के परिवार, दोनों ने फांसी की मांग की थी. वहीं, बचाव पक्ष ने जेल में जन्मी बेटी और बुजुर्ग माता-पिता का हवाला देकर कम सजा की गुहार लगाई थी. लेकिन अदालत ने अपराध की क्रूरता को ध्यान में रखते हुए मृत्युदंड सुनाई है.

#WATCH | Varanasi | Bhojpuri actress Akanksha Dubey murder | Advocate for Akanksha Dubey's family, Allahabad High Court, Saurabh Tiwari says, "This verdict is not in line with our expectations, and we are completely dissatisfied with it. The legal points raised in our petitions… pic.twitter.com/EIrJVl1Dim

— ANI (@ANI) October 14, 2026

क्या यह सजा अब अंतिम है?

मौत की सजा के मामलों में कानूनन फैसले की पुष्टि हाईकोर्ट से कराना जरूरी होती है. इसके अलावा दोषी चाहें तो हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील भी कर सकते हैं. यानी कानूनी प्रक्रिया अभी आगे भी चलेगी.

नीले ड्रम केस में पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा, सौरभ राजपूत मर्डर केस में मेरठ कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

मेरठ कोर्ट में पहले भी सुनाई जा चुकी है फांसी की सजा? जानें कब-कब सुनाया गया मृत्युदंड का फरमान