मोदी सरकार के FCRA बिल पर भड़का ट्रंप का सांसद, बोला- यह ईसाइयों पर हमला

Published on 5 अग॰ 2026

FCRA Bill Controversy : मोदी सरकार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट, 2010 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। जिसमें ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ केंद्र सरकार को एक नामित प्राधिकरण बनाने की इजाज़त देता है। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में प्रस्ताव है कि अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, वह स्वयं रजिस्ट्रेशन छोड़ देती है या उसका रिन्यूवल नहीं होता, तो सरकार एक ‘नामित प्राधिकरण’ बना सकेगी। इसका विपक्षी दलों के साथ-साथ अमेरिकी सांसद ने भी विरोध किया है।

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भारत में फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) प्रस्तावित संशोधन का विरोध करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने इसकी आलोचना की है। मूर ने इस बिल को ईसाई समुदाय पर सीधा हमला बताया है। इसके साथ ही उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते खराब होने की चेतावनी भी दी है। अमेरिकी सांसद ने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘भारत में ईसाई समुदाय तब से रह रहा है, जब सेंट थॉमस द एपोस्टल यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों बाद मालाबार तट आए थे, लेकिन इस लंबे इतिहास के बावजूद भारत की संसद FCRA बिल के नियमों में ऐसे संशोधन करने पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटीज का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की छूट मिल सके।’ वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन मूर ने कहा, ‘यह ईसाइयों पर सीधा हमला है. अगर यह बिल पास हुआ तो भारत और अमेरिका के संबंध चिंता जनक स्थिति में पहुंच सकते हैं।’

विपक्षी पार्टियां और एनजीओ ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) प्रस्तावित संशोधन को लेकर चिंता जाहिर की है। उनका मानना है कि बिल में नए संशोधन के बाद विदेशी फंडिंग पर निर्भर संगठनों पर केंद्र सरकार का ज्यादा कंट्रोल होगा। चर्च और अन्य धार्मिक संगठन इस वजह से भी चिंतित हैं कि अगर उनका रजिस्ट्रेशन पांच साल बाद एक्सपायर होता है और किसी वजह से रीन्यू नहीं होता है तो उनके द्वारा बनाए गए स्कूल या हॉस्पिटल पर सीधा केंद्र सरकार का कंट्रोल हो सकता है। बता दें कि मौजूदा नियमों के मुताबिक  गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), धार्मिक संस्थान, शैक्षणिक संस्थान और चैरिटेबल ट्रस्ट विदेशी चंदा कैसे जुटाते हैं और इसका कैसे इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए उन्हें गृह मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है।