
FCRA संशोधन विधेयक पर JPC का गठनImage Credit source: PTI (फाइल फोटो)
सरकार द्वारा विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने के बाद गुरुवार को 31 सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया. लोकसभा से 21 सदस्य और राज्यसभा से 10 सदस्य समिति में हैं. बीजेपी के डॉ. संजय जायसवाल को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित इस समिति मेंबीजेपी के 14 और कांग्रेस के पांच सदस्य हैं. इसके अलावा इसमें जेडीयू, टीएमसी और डीएमके से दो-दो सदस्य और सपा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, शिवसेना, एनसीपी (एसपी), एनसीपी और टीडीपी से भी एक-एक सदस्य शामिल हैं.
समिति के लोकसभा सदस्यों में भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, निशिकांत दुबे, सुप्रिया सुले, ए. राजा, कल्याण बनर्जी समेत अन्य सदस्य शामिल हैं, जबकि राज्यसभा से सी. सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देव राव निकम, अलका गुर्जर, सत पाल शर्मा, प्रफुल पटेल, संजय कुमार झा, क्रिस्टोफर मणिकम, मेनका गुरुस्वामी और पी. विल्सन सदस्य हैं. इस समिति को संसद के शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते के अंतिम दिन तक लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है.
विपक्षी दलों ने लगाया था आरोप
पिछले महीने यानी 12 अगस्त को संसद के दोनों सदनों ने इस FCRA संशोधन विधेयक 2026 को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने के प्रस्ताव पारित किए थे, जबकि विपक्षी दलों का कहना था कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और गैर सरकारी संगठनों को निशाना बनाता है और उन्होंने इसे पूरी तरह वापस लेने की मांग की थी. हालांकि सरकार ने इस आरोप को खारिज करते हुए विपक्ष को चुनौती दी कि वह ऐसा कोई प्रावधान बताए जो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता हो.
FCRA संशोधन विधेयक में क्या प्रस्ताव है?
दरअसल, 25 मार्च को लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक में गैर सरकारी संगठनों और विदेशी चंदे पर कड़ी निगरानी का प्रस्ताव है. हालांकि शुरुआत में विभिन्न हितधारकों के कड़े विरोध के बाद सरकार ने इसे रोक दिया था. इस विधेयक के विरोध में पूर्वोत्तर के कई राज्यों में प्रदर्शन हुए थे. नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्र सरकार से इसे संसदीय समिति के पास भेजने का आग्रह किया था, जबकि मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इसके प्रावधानों पर चिंता जताई थी.
ये भी पढ़ें: CAPF में IPS डेपुटेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब; 22 सितंबर को अगली सुनवाई

आनंद प्रकाश पांडेय
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद 2005 में टीवी पत्रकारिता में कदम रखा. वो सफर अब टीवी9 भारतवर्ष तक पहुंच गया है. राजनीतिक लोगों और राजनीतिक खबरों में रूचि है. भले ही पद एडिटर, नेशनल अफेयर्स का है पर अभी भी खुद को नौसिखिया ही मानता हूं और इसलिए सीखने का क्रम अनवरत जारी है...
Read More