घर में रखा सोना आमतौर पर सिर्फ एक संपत्ति के रूप में रखा जाता है, लेकिन Gold Monetisation Scheme (GMS) के जरिए कुछ मामलों में इसे ब्याज कमाने वाले डिपॉजिट में बदला जा सकता है। हालांकि, मौजूदा नियमों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस योजना में 2025 के बाद बड़े बदलाव हुए हैं।
क्या है Gold Monetisation Scheme?
सरकार ने 2015 में Gold Monetisation Scheme शुरू की थी। इसका उद्देश्य लोगों और संस्थानों के पास पड़े निष्क्रिय सोने को वित्तीय व्यवस्था में लाना और देश की सोने के आयात पर निर्भरता कम करना था। योजना के तहत पात्र जमा केंद्रों पर सोने की शुद्धता की जांच की जाती है और जमा किए गए सोने के आधार पर गोल्ड डिपॉजिट बनाया जाता है।
अब कौन-सा गोल्ड डिपॉजिट उपलब्ध है?
यहां सबसे जरूरी अपडेट यह है कि 26 मार्च 2025 से Medium Term और Long Term Government Deposit बंद कर दिए गए हैं। यानी अब इन दोनों विकल्पों में नए जमा स्वीकार नहीं किए जाते। वहीं Short-Term Bank Deposit (STBD) बैंकों के विवेक पर जारी रह सकता है।
यानी सोशल मीडिया या पुराने लेखों में अगर 5-7 साल या 12-15 साल के सरकारी गोल्ड डिपॉजिट पर ब्याज मिलने की जानकारी दी जा रही है, तो वह मौजूदा नए निवेश के लिए सही नहीं हो सकती।
सोने पर ब्याज कैसे मिलता है?
Short-Term Bank Deposit में ब्याज दर बैंक खुद तय करता है। सरकारी आर्थिक मामलों के विभाग के अनुसार, यह दर बाजार परिस्थितियों और अन्य लागत जैसे कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाती है। इसलिए सभी बैंकों में एक जैसी ब्याज दर होना जरूरी नहीं है।
SBI भी वर्तमान में अपने Gold Deposit विकल्प के तहत केवल Short-Term Bank Deposit स्वीकार करने की जानकारी देता है।
घर में पड़े सोने को जमा करने का क्या फायदा?
इसका मुख्य फायदा यह है कि घर या लॉकर में पड़ा निष्क्रिय सोना ब्याज अर्जित करने वाली वित्तीय संपत्ति में बदल सकता है। योजना का उद्देश्य भी इसी तरह के निष्क्रिय सोने को उत्पादक उपयोग में लाना है।
हालांकि, सोना जमा करने से पहले यह समझना जरूरी है कि प्रक्रिया में सोने की शुद्धता की जांच और मूल्यांकन किया जाता है। इसलिए भावनात्मक महत्व वाली ज्वेलरी को जमा करने का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए।
कितना सोना जमा कर सकते हैं?
RBI की FAQ के अनुसार, GMS में न्यूनतम जमा 10 ग्राम कच्चा सोना है और अधिकतम जमा की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। इसमें बार, सिक्के और आभूषण शामिल हो सकते हैं, हालांकि आभूषणों में लगे पत्थर और अन्य धातुएं अलग की जाती हैं।
FD से बेहतर है या नहीं?
यह कहना सही नहीं होगा कि Gold Monetisation Scheme हर व्यक्ति के लिए FD से बेहतर है। दोनों की प्रकृति अलग है। FD में आप रुपये जमा करते हैं और उस पर निर्धारित ब्याज मिलता है, जबकि GMS में आपके भौतिक सोने को जमा करके उस पर लागू नियमों के अनुसार रिटर्न मिलता है।
इसलिए निवेश का फैसला करते समय ब्याज दर, अवधि, सोने की कीमत में संभावित बदलाव, टैक्स नियम और पैसे की जरूरत जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए।
सरकार योजना में बदलाव पर भी कर रही है विचार
2026 में सरकार द्वारा Gold Monetisation Scheme को नए तरीके से बढ़ावा देने और ज्वेलर्स को इसमें शामिल करने की संभावनाओं को लेकर रिपोर्ट्स सामने आई हैं। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य घरों में पड़े बड़े सोने के भंडार को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में लाना है। हालांकि, ऐसे प्रस्तावों को मौजूदा लागू नियमों से अलग समझना जरूरी है।
निष्कर्ष: घर में पड़ा सोना कमाई का जरिया बनाने का विकल्प मौजूद है, लेकिन वर्तमान में GMS के तहत पुराने 5-7 साल और 12-15 साल वाले सरकारी डिपॉजिट नए निवेश के लिए बंद हैं। इसलिए निवेश करने से पहले संबंधित बैंक की मौजूदा Gold Deposit सुविधा और ब्याज दर की पुष्टि करना जरूरी है।
