France Protest : फ्रांस के कई शहरों में महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इमिग्रेशन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘फ्रांस जल रहा है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे देशों से आए लोगों के कारण देश की स्थिति बिगड़ी है और फ्रांस को अपनी सीमाएं बंद कर नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहिए.

ट्रंप बोले- ‘देर होने से पहले बॉर्डर बंद करो’
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अलग दुनिया से आए और नफरत से भरे लोगों के इमिग्रेशन ने कभी महान रहे फ्रांस को तोड़ दिया है. उन्होंने फ्रांस को अपनी सीमाएं बंद करने और हालात पर नियंत्रण पाने की सलाह दी. इससे पहले भी ट्रंप फ्रांस में छात्रों के प्रदर्शनों को बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन से जोड़ चुके हैं. हालांकि, फ्रांस में मौजूदा विरोध-प्रदर्शन महंगाई, जीवन-यापन की लागत और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष के बीच हो रहे हैं.
पेरिस समेत कई शहरों में आगजनी और लूटपाट
प्रदर्शनों के दौरान पेरिस, नीस और मार्सेई समेत कई शहरों में हिंसा की खबरें सामने आईं. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, नकाबपोश समूहों ने दुकानों में लूटपाट की, सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया और आगजनी की. लिमोज शहर में 19वीं सदी की सिटी हॉल इमारत (143 साल पुरानी) आग की चपेट में आ गई. स्थानीय प्रशासन ने आग को जानबूझकर लगाए जाने की आशंका जताई.
अब तक 1800 से अधिक प्रदर्शनकारी गिरफ्तार
रिपोर्टों के अनुसार, हिंसक झड़पों के बाद फ्रांस में 1800 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के दौरान कई जगहों पर हालात तनावपूर्ण रहे.
मैक्रों ने कहा- हिंसा करने वालों पर होगी कार्रवाई
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आगजनी, लूटपाट और सरकारी इमारतों पर हमलों की निंदा की. उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों और कारोबार को निशाना बनाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों का समर्थन करते हुए हिंसा फैलाने वालों को अराजकता पैदा करने वाला बताया.
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने भी कहा कि प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन जानबूझकर हिंसा और अव्यवस्था फैलाने को स्वीकार नहीं किया जा सकता.
महंगाई और पब्लिक सेवाओं को लेकर बढ़ा असंतोष
फ्रांस में हालिया आंदोलन की शुरुआत स्कूलों में कर्मचारियों की कमी और खराब सुविधाओं को लेकर छात्रों की नाराजगी से हुई थी. बाद में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत से परेशान दूसरे समूह भी इसमें शामिल हो गए. छात्रों ने सितंबर के आखिर से कई स्कूलों के प्रवेश द्वार बाधित कर बेहतर सुविधाओं की मांग की थी.
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