ऑनलाइन ग्रॉसरी और 10 मिनट में सामान घर पहुंचाने वाले क्विक-कॉमर्स (Quick Commerce) ऐप्स के बढ़ते जाल के बीच उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा कदम उठाया है। अक्सर ग्राहकों की यह शिकायत रहती है कि जब वे ब्लिंकिट (Blinkit), जेप्टो (Zepto), स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) या बिगबास्केट (BigBasket) जैसे प्लेटफॉर्म्स से दूध, ब्रेड, आटा, तेल, स्नैक्स या डिब्बाबंद खाद्य उत्पाद मंगवाते हैं, तो उन्हें ऑर्डर करने से पहले यह पता नहीं चलता कि प्रोडक्ट की एक्सपायरी डेट क्या है। कई बार घर पर डिलीवरी होने के बाद पैकेट उलटने पर पता चलता है कि सामान की मियाद खत्म होने में महज दो या तीन दिन ही बाकी हैं।
उपभोक्ताओं की इसी बेबसी को खत्म करने और डिजिटल शॉपिंग को किसी किराना दुकान पर हाथ में सामान लेकर जांचने जैसा पारदर्शी बनाने के लिए एफएसएसएआई नए कड़े नियम लागू करने की तैयारी में है। प्राधिकरण के प्रस्तावित नियमों के तहत अब प्रत्येक ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को अपनी ऐप या वेबसाइट पर प्रोडक्ट लिस्टिंग के समय ही उसकी निर्माण तिथि (Manufacturing Date), एक्सपायरी या बेस्ट-बिफोर डेट (Expiry / Best Before Date), बैच नंबर और उसमें मिली सामग्रियों (Ingredients व Nutritional Value) की पूरी जानकारी बड़े और स्पष्ट अक्षरों में दिखानी होगी।
ग्राहकों को अब नहीं मिलेगा 'सरप्राइज': कार्ट में डालने से पहले दिखेगा पूरा ब्योरा
मौजूदा समय में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर केवल प्रोडक्ट की तस्वीर, वजन, ब्रांड का नाम और डिस्काउंटेड कीमत ही प्रमुखता से दिखाई देती है। पैकेट के पीछे छपी वैधानिक जानकारी—जैसे एलर्जेंस (Allergens), प्रिजर्वेटिव्स, अतिरिक्त चीनी (Added Sugar), सोडियम की मात्रा और सबसे अहम यानी एक्सपायरी की तारीख—ऑर्डर करते समय उपभोक्ता की नजरों से ओझल रहती है।
एफएसएसएआई के नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स को अपने डिजिटल कैटलॉग को पूरी तरह अपग्रेड करना होगा। अब किसी भी खाद्य उत्पाद के पेज पर मुख्य तस्वीर के साथ-साथ पैकेट के पीछे का पूरा लेबल (Back of Pack) स्पष्ट रूप से पठनीय फॉर्मेट में अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, ऐप पर रियल-टाइम में यह जानकारी प्रदर्शित होगी कि जिस डार्क स्टोर (Dark Store) से आपका सामान पैक हो रहा है, वहां मौजूद उस विशिष्ट बैच की निर्माण तिथि क्या है और वह कब एक्सपायर हो रहा है। यदि ग्राहक को लगता है कि ब्रेड या पनीर की बची हुई शेल्फ लाइफ उसकी जरूरत के हिसाब से कम है, तो वह ऑर्डर करने से पहले ही उसे खरीदने से मना कर सकेगा।
बैच नंबर और शेल्फ लाइफ का 30% या 45 दिन वाला अनिवार्य नियम
प्राधिकरण ने क्विक-कॉमर्स कंपनियों की उस पुरानी आदत पर भी कड़ा प्रहार किया है, जिसमें कंपनियां अपने अनबिके या जल्द खराब होने वाले स्टॉक (Near-Expiry Stock) को भारी छूट देकर ऑनलाइन ग्राहकों के मत्थे मढ़ देती थीं। एफएसएसएआई के शेल्फ-लाइफ नियमों के तहत ई-कॉमर्स फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि डिलीवरी के समय किसी भी पैकेज्ड उत्पाद की कुल शेल्फ लाइफ का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा या कम से कम 45 दिन की वैधता शेष रहनी चाहिए।
इसके साथ ही, डिजिटल लिस्टिंग पर 'बैच नंबर' (Batch Number) का प्रदर्शन भी अनिवार्य किया जा रहा है। बैच नंबर अनिवार्य होने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यदि किसी कारखाने या बैच में मिलावट, फंगस या रासायनिक खराबी की शिकायत आती है, तो खाद्य सुरक्षा अधिकारी पूरे देश में उस बैच के सभी पैकेट्स को एक क्लिक में ट्रैक करके तुरंत 'रिकॉल' (बाजार से वापस) करवा सकेंगे। इससे डार्क स्टोर्स में असुरक्षित खाद्य सामग्री को खपाने की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
भ्रामक दावों और डार्क स्टोर्स की हाइजीन पर भी कसेगा कानूनी शिकंजा
नए दिशा-निर्देशों में केवल एक्सपायरी डेट ही नहीं, बल्कि कंपनियों द्वारा किए जाने वाले भ्रामक दावों (Misleading Claims) को लेकर भी जवाबदेही तय की गई है। अक्सर पैकेट पर '100% नेचुरल', 'जीरो फैट', 'नो एडेड शुगर' या 'इम्यूनिटी बूस्टर' जैसे बड़े-बड़े दावे लिख दिए जाते हैं, जबकि बारीक अक्षरों में उसके अंदर कृत्रिम रसायन और स्वीटनर्स मिले होते हैं। एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई ब्रांड ऑनलाइन भ्रामक दावा करता है, तो उसके साथ-साथ उस उत्पाद को होस्ट करने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी सह-आरोपी माना जाएगा।
इसके अतिरिक्त, शहरों की घनी बस्तियों में तेजी से खुल रहे 'डार्क स्टोर्स' (वेयरहाउस जहां से 10 मिनट में डिलीवरी होती है) की साफ-सफाई और कोल्ड चेन व्यवस्था की सघन जांच के आदेश दिए गए हैं। फ्रोजन फूड्स, आइसक्रीम, मक्खन और पनीर को डीप फ्रीजर के बजाय सामान्य तापमान पर रखने, या चूहों व कीड़ों से असुरक्षित परिसरों में खाने का सामान डंप करने वाले डार्क स्टोर्स के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएंगे। प्रत्येक डार्क स्टोर के लिए मान्य एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और स्वच्छता रेटिंग (Hygiene Rating) को ऐप पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
नियम तोड़े तो क्या होगी कार्रवाई: 5 लाख का जुर्माना और जेल की सजा
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act) के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और विक्रेताओं के खिलाफ कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाएंगे। यदि कोई प्लेटफॉर्म एक्सपायरी की तारीख छुपाकर या गलत जानकारी देकर सामान बेचता पाया गया, तो इसे 'मिसब्रांडिंग' और 'असुरक्षित खाद्य वितरण' की श्रेणी में रखा जाएगा।
प्राधिकरण दोषी कंपनियों पर ₹5 लाख तक का आर्थिक जुर्माना ठोक सकता है। यदि एक्सपायर्ड या खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ के सेवन से किसी उपभोक्ता की तबीयत बिगड़ती है या फूड पॉइजनिंग होती है, तो कंपनी के अधिकारियों और विक्रेता के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यूनतम 6 महीने से लेकर 6 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने साफ कर दिया है कि डिजिटल दुनिया में व्यापार करने का मतलब नियमों से छूट पाना नहीं हो सकता।
जागरूक उपभोक्ता बनें: ऑनलाइन खाना और राशन मंगाते समय इन 4 बातों का रखें ध्यान
जब तक ये नए नियम आधिकारिक गजट में पूरी तरह अधिसूचित होकर लागू नहीं हो जाते, तब तक उपभोक्ताओं को खुद भी डिलीवरी लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है:
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डिलीवरी एजेंट के सामने जांचें तारीख: जैसे ही डिलीवरी बैग आपके हाथ में आए, पैकेट खोलते ही सबसे पहले दूध, दही, पनीर, ब्रेड और पैकेज्ड स्नैक्स की एक्सपायरी या 'Use By' डेट चेक करें। यदि सामान एक्सपायर हो चुका है या उसकी मियाद में 24-48 घंटे ही बचे हैं, तो उसे तुरंत डिलीवरी पार्टनर को वापस कर दें।
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पैकेट की सील और लीकेज देखें: टेट्रा पैक जूस, तेल या सॉस की बोतलें यदि फूली हुई (Puffed), चिपचिपी या लीक करती दिखें, तो उनका कतई इस्तेमाल न करें।
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फोटो खींचकर तुरंत ऐप पर शिकायत करें: यदि कोई एक्सपायर्ड सामान डिलीवर हो जाता है, तो उस पैकेट की तारीख और डिलीवरी इनवॉइस की स्पष्ट तस्वीर खींचें और ऐप के सपोर्ट सेक्शन में जाकर रिप्लेसमेंट या फुल रिफंड का दावा करें।
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राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1915 और FSSAI पर रिपोर्ट: यदि ई-कॉमर्स कंपनी आपकी शिकायत का संतोषजनक समाधान नहीं करती है, तो आप भारत सरकार के राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल कर सकते हैं। इसके साथ ही एफएसएसएआई के आधिकारिक पोर्टल या 'Food Safety Connect' ऐप के जरिए मिलावट और बासी उत्पाद की सीधी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। सजगता ही आपकी और आपके परिवार की सेहत का सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।