PM की विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड नहीं होगा पब्लिक... दिल्ली हाई कोर्ट ने CIC का आदेश किया रद्द

Published on 19 अक्टू॰ 2026

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के एक आदेश को रद्द कर दिया है. इस आदेश में भारतीय वायु सेना को निर्देश दिया गया था कि वह सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड का खुलासा करे.

जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि RTI एप्लीकेंट, रिटायर्ड कमोडोर लोकेश बत्रा ने स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स (SFR) पार्ट I और पार्ट II के बारे में डिटेल्स मांगी थीं. जिसमें एयरक्राफ्ट, एयरक्रू, पूरे एन्टोरेज की डिटेल्स, और PM के साथ ट्रैवल करने वाले सभी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के लोगों के नाम शामिल हैं. कोर्ट ने कहा कि यह जानकारी देने से नेशनल सिक्योरिटी खतरे में पड़ सकती है और PM की जान और फिजिकल सेफ्टी खतरे में पड़ सकती है.

खुलासे से नेशनल सिक्योरिटी को खतरा

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर के अपने ऑर्डर में कहा कि नेशनल सिक्योरिटी और प्रधानमंत्री के साथ मौजूद सिक्योरिटी सिस्टम पर इस तरह के खुलासे के संभावित असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. जस्टिस महाजन ने फैसला सुनाया कि हाई कोर्ट या CIC इस बारे में कि क्या किसी खास जानकारी के खुलासे से नेशनल सिक्योरिटी खतरे में पड़ सकती है या प्रधानमंत्री की जान और फिजिकल सेफ्टी को खतरा हो सकता है, काबिल सिक्योरिटी एजेंसियों की अपनी पसंद के बारे में अपील नहीं कर सकते.

पीएम की सिक्योरिटी पर क्या कहा?

कोर्ट ने कहा, ऐसा असेसमेंट मुख्य रूप से उन एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आता है जिन्हें प्रधानमंत्री की सिक्योरिटी पक्की करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है और यह कोर्ट काबिल सिक्योरिटी एजेंसियों के असेसमेंट की जगह अपना असेसमेंट नहीं कर सकता.

RTI एप्लीकेशन से खुलासा

आपको बता दें कि यह मामला जून 2018 में रिटायर्ड कमोडोर लोकेश के बत्रा की फाइल की गई एक RTI एप्लीकेशन से सामने आया. उन्होंने अप्रैल 2013 से जून 2018 के बीच इंडियन एयर फोर्स के एयरक्राफ्ट से भारतीय प्रधानमंत्रियों के विदेश दौरों की डिटेल्स मांगी थीं.

SFR-II रिकॉर्ड की सर्टिफाइड कॉपी देने का निर्देश

एयर फोर्स ने कुछ दौरों के बारे में जानकारी तो दी, लेकिन SFR पार्ट-I और पार्ट-II की डिटेल्स बताने से मना कर दिया. एयर फोर्स के सेंट्रल पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (CPIO) ने सिक्योरिटी की चिंताओं का हवाला दिया और फिड्यूशरी कैपेसिटी में रखी गई जानकारी के लिए छूट का भी हवाला दिया. हालांकि, CIC ने एयर फोर्स को सिक्योरिटी वालों के नाम हटाने के बाद मौजूद और जरूरी SFR-II रिकॉर्ड की सर्टिफाइड कॉपी देने का निर्देश दिया. इस वजह से CPIO को हाई कोर्ट जाना पड़ा.

बत्रा के वकील ने कोर्ट को बताया कि मांगी गई जानकारी PM के विदेश दौरों पर पब्लिक फंड के खर्च से जुड़ी थी और इसलिए, यह बड़े पब्लिक इंटरेस्ट में थी. उन्होंने साफ किया कि रिक्वेस्ट सिक्योरिटी वालों की पहचान के बजाय, सरकारी खर्च पर PM के साथ जाने वाले प्राइवेट लोगों से जुड़ी थी.

कोर्ट ने ऑर्डर किया रद्द

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि सिर्फ यह बात कि PM के विदेश दौरों पर सरकारी पैसे खर्च किए गए हैं, अपने आप में ऐसी जानकारी के खुलासे को सही नहीं ठहराती जिससे ऐसे दौरों के लिए किए गए सिक्योरिटी इंतजामों से समझौता हो सकता है. कोर्ट ने यह नतीजा निकाला कि CIC ने SFR-II के खुलासे का निर्देश देकर गलती की थी और इसलिए, ऑर्डर रद्द कर दिया.

जीतेन्द्र भाटी

जीतेन्द्र भाटी

करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉलिटिक्स, क्राइम, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग. BAG Films की नर्सरी से IBN7, आज़ाद न्यूज़, प्रज्ञा TV, 4 रियल न्यूज, Focus News और न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया होते हुए देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में खबरों के बीच सफर जारी.

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