Google Maps की Live Location कितनी सटीक होती है? परफेक्ट लोकेशन और कब भटकता है जीपीएस

Published on 19 अग॰ 2026

क्या आपने कभी किसी दोस्त की Google Maps पर लाइव लोकेशन देखी है और सोचा है कि आखिर यह लोकेशन कितनी सही होती है? कई बार मैप पर दिखने वाली लोकेशन बिल्कुल सटीक नजर आती है, तो कभी व्यक्ति की जगह कुछ मीटर दूर दिखाई देती है. इसकी वजह सिर्फ जीपीएस नहीं है, बल्कि फोन के जीपीएस, मोबाइल नेटवर्क, वाई-फाई और आसपास की परिस्थितियां भी लोकेशन की सटीकता को प्रभावित करती हैं. इसलिए लाइव लोकेशन को हर स्थिति में 100 फीसदी सटीक मानना सही नहीं है.

GPS से मिलती है लोकेशन की जानकारी

Google Maps में लाइव लोकेशन की सटीकता काफी हद तक फोन के जीपीएस पर निर्भर करती है. जीपीएस फोन की स्थिति का पता लगाने में मदद करता है, लेकिन इसकी सटीकता हर जगह एक जैसी नहीं रहती. खुले आसमान के नीचे फोन को जीपीएस सिग्नल आसानी से मिल सकता है, इसलिए ऐसी जगह पर मैप पर दिखाई जाने वाली लोकेशन ज्यादा सटीक हो सकती है. वहीं किसी व्यक्ति के आसपास ऊंची इमारतें या दूसरी रुकावटें हों तो लोकेशन में कुछ अंतर दिखाई दे सकता है.

कभी-कभी लोकेशन आगे-पीछे क्यों दिखती है?

अगर लाइव लोकेशन में व्यक्ति वास्तविक जगह से थोड़ा आगे या पीछे दिखाई दे रहा है, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि Google Maps गलत काम कर रहा है. फोन लोकेशन तय करने के लिए जीपीएस के साथ मोबाइल नेटवर्क और वाई-फाई जैसी जानकारी का भी इस्तेमाल कर सकता है. नेटवर्क या जीपीएस सिग्नल में बदलाव होने पर मैप पर दिखाई जाने वाली जगह में कुछ अंतर आ सकता है. खासकर घर के अंदर, बेसमेंट या ऐसी जगहों पर जहां सिग्नल कमजोर हो, लोकेशन उतनी सटीक नहीं दिख सकती.

लाइव लोकेशन को 100 फीसदी सटीक न मानें

लाइव लोकेशन किसी व्यक्ति की स्थिति का उपयोगी अंदाजा देने के लिए काफी मददगार है, लेकिन इसे हर समय बिल्कुल सटीक प्वाइंट नहीं माना जा सकता. खुले स्थान पर लोकेशन अपेक्षाकृत ज्यादा सटीक हो सकती है, जबकि इमारतों और कमजोर सिग्नल वाले इलाकों में अंतर बढ़ सकता है. इसलिए अगर मैप पर किसी व्यक्ति की लोकेशन कुछ मीटर इधर-उधर दिखाई दे रही है, तो यह सामान्य हो सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि लाइव लोकेशन की सटीकता फोन और उस समय उपलब्ध लोकेशन सिग्नल की स्थिति पर निर्भर करती है.

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विशाल मैथिल

विशाल मैथिल

भोपाल के रहने वाले हैं. कम्प्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन और मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद डिजिटल मीडिया में कदम रखा. दैनिक भास्कर से शुरुआत हुई. इसके बाद टाइम्स नाउ नवभारत और अमर उजाला जैसे संस्थान में टेक जर्नलिस्ट के दौर पर करने के बाद TV9 भारतवर्ष से जुड़े हैं. सोशल मीडिया कैंपेन को लीड करने और हिंदी मैग्जीन में भी काम करने का मौका मिला. फिलहाल टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और स्मार्टफोन की खबरें आप तक आसान भाषा में पहुंचाने का काम कर रहे हैं. गैजेट्स कंपेरिजन, गैजेट्स रिव्यूज और मोबाइल रिचार्ज जैसे टॉपिक्स पर भी अच्छी पकड़ रखते हैं. रिसर्च, एक्‍सप्‍लेनर, डाटा स्‍टोरी और इंफोग्राफिक्स के साथ जटिल खबरों को आसानी से कहने और टेक जगत की छोटी-बड़ी अपडेट आप तक पहुंचाने का हुनर रखते हैं. गैजेट्स के अलावा किताबों और म्यूजिक में भी खूब मन लगता है.

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