Green Energy Plan:भारत ने तैयार किया ₹1.86 लाख करोड़ का बड़ा प्लान, आम लोगों को क्या फायदा? जानें क्या बदलेगा

Published on 7 अक्टू॰ 2026

Green Energy Plan:केंद्र सरकार ने Renewable Energyको बढ़ावा देने के लिए Green Energy Corridor Phase-III को मंजूरी दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर ₹1,86,405 करोड़ खर्च होंगे। इसके तहत बिजली पहुंचाने का नेटवर्क मजबूत किया जाएगा और 50 GWh की बैटरी स्टोरेज क्षमता तैयार की जाएगी। 

Renewable Energy के लिए सरकार का बड़ा प्लान

भारत में सोलरऔर पवन ऊर्जा (Wind energy) से बिजली बनाने का काम तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन केवल बिजली बनाना ही काफी नहीं है। इस बिजली को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करने के लिए मजबूत बिजली नेटवर्क भी जरूरी है।इसी जरूरत को देखते हुए केंद्र सरकार ने Green Energy Corridor Phase-III (GEC-III) को मंजूरी दी है। इस योजना का काम वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य Renewable Energy को बिजली ग्रिड से जोड़ने की क्षमता बढ़ाना है।

₹1.86 लाख करोड़ का खर्च, पैसा कहां लगेगा?

सरकार के अनुसार GEC-III की कुल लागत ₹1,86,405 करोड़ है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा बिजली ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करने पर खर्च होगा।करीब ₹1,36,378 करोड़ राज्यों के अंदर बिजली पहुंचाने वाले ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा ₹50,000 करोड़ की लागत से 50 GWh Battery Energy Storage System तैयार करने की योजना है। केंद्र सरकार इस योजना के लिए ₹54,082 करोड़ की वित्तीय सहायता देगी।

135 GW तक Renewable Energy को जोड़ने की तैयारी

इस प्रोजेक्ट के जरिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसा बिजली नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे 135 GW तक Renewable Energy को ग्रिड से जोड़ने में मदद मिलेगी।सरल भाषा में समझें तो आने वाले समय में सोलर और पवन ऊर्जा से बनने वाली ज्यादा बिजली को बिजली के मुख्य नेटवर्क में शामिल किया जा सकेगा और उसे जरूरत वाली जगहों तक पहुंचाना आसान होगा।

Battery Storage क्यों जरूरी है?

सोलर बिजली की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सूरज की रोशनी दिन में ही मिलती है। वहीं हवा से बनने वाली बिजली भी हर समय एक जैसी नहीं रहती। ऐसे में जब Renewable Energy ज्यादा बनती है, तो उसकी कुछ बिजली को स्टोर करके बाद में इस्तेमाल करना जरूरी हो जाता है। इसी काम के लिए Battery Energy Storage System लगाया जाएगा। इसमें जरूरत के समय बिजली को स्टोर किया जा सकेगा और जब मांग बढ़ेगी, तब इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे बिजली की सप्लाई को संभालने और Renewable Energy का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।

आम लोगों को क्या फायदा होगा?

इस योजना का मतलब यह नहीं है कि सरकार ने बिजली का बिल सीधे कम करने की घोषणा कर दी है। बिजली की कीमत अलग-अलग राज्यों में संबंधित नियामक संस्थाएं तय करती हैं।लेकिन मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और बैटरी स्टोरेज से Renewable Energy का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे बिजली व्यवस्था को ज्यादा बेहतर तरीके से चलाने में मदद मिलेगी। सरकार के मुताबिक केंद्रीय वित्तीय सहायता से ट्रांसमिशन की लागत को कम रखने में भी मदद मिलेगी, जिसका फायदा आगे बिजली के उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।

रोजगार के मौके भी बढ़ सकते हैं

इतने बड़े प्रोजेक्ट में ट्रांसमिशन लाइन, बिजली उपकरण, बैटरी स्टोरेज, निर्माण और दूसरे जुड़े काम शामिल होंगे। इससे Renewable Energy और बिजली से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

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