Ground Report: सड़क पर गोवंश, खेतों में किसान, किसान और मवेशी दोनों संकट में

Published on 30 जुल॰ 2026

July 30, 2026 41 बार देखा गया

गांव के बाकी किसानों का कहना है कि इस समय तिल, अरहर और मूंग की फसल खेतों में खड़ी है। गोवंश एक खेत से भगाए जाते हैं तो दूसरे खेत में चले जाते हैं। ऐसे में किसान रात-दिन खेतों की रखवाली कर रहे हैं। कई किसानों की रातें खेतों में ही गुजर रही हैं।  

रिपोर्ट – शिवदेवी, लेखन – रचना 

फोटो साभार: शिवदेवी                                       

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के पलरा, अतरहट, पपरेंदा , दोहतरा, पदारथपुर समेत कई ग्राम पंचायतों में इन दिनों निराश्रित (अनाथ) गोवंश किसानों और राहगीरों दोनों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं। गांवों की सड़कों पर बड़ी संख्या में गोवंश (गाय) बैठे दिखाई देते हैं जिसके कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं और लोगों के आने-जाने में भी दिक्कत काफी होती है। दूसरी ओर यही गोवंश खेतों में घुसकर तिल, अरहर और मूंग जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर वे दिन-रात खेतों की रखवाली न करें तो उनकी पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। 

अगर देखा जाए तो इस समस्या की एक बड़ी वजह लगातार जंगलों और पेड़-पौधों का कटना भी है। पहले जानवरों के लिए चारागाह और जंगल थे जहां उन्हें भोजन मिल जाता था। अब खेती और आबादी बढ़ने के साथ उनके रहने और चरने की जगह कम होती गई और अब जानवर सड़कों और खेतों की ओर आने को मजबूर हैं। इसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। 

तिल का फसल बचना हुआ मुश्किल 

पलरा गांव के किसान राम सेवक बताते हैं उन्होंने 15 बीघा ज़मीन में तिल की फसल बोई है। वहीं जानवर खेत में घुस जाते हैं तो जहां उनके पैर पड़ते हैं वहां पूरी फसल खराब हो जाती है। उनका कहना है अगर गोवंश को समय रहते गौशालाओं में बंद कर दिया जाए तो किसानों की मेहनत बच सकती है। किसान फूलचंद के अनुसार इस समय सड़कों पर हर समय गोवंश बैठे रहते हैं। उन्हें हटाया भी जाए तो कुछ देर बाद फिर सड़क पर आ जाते हैं। इससे सड़क हादसों का खतरा बना रहता है और लोगों को आने-जाने में भी परेशानी होती है।  

फोटो साभार: शिवदेवी                                            

गांव के बाकी किसानों का कहना है कि इस समय तिल, अरहर और मूंग की फसल खेतों में खड़ी है। गोवंश एक खेत से भगाए जाते हैं तो दूसरे खेत में चले जाते हैं। ऐसे में किसान रात-दिन खेतों की रखवाली कर रहे हैं। कई किसानों की रातें खेतों में ही गुजर रही हैं। उनका कहना है कि अगर रखवाली न करें तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।

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फसल बचाने के तरीके से जानवर हो रहे घायल 

वहीं अपने खेतों के फसल बचाने के लिए किसान अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। कोई खेत के चारों ओर तारबंदी कर रहा है कोई झटका वाले तार लगा रहा है और कुछ जगहों पर बिजली का करंट भी लगाया जा रहा है। ऐसे में खेतों में घुसने वाले गोवंश घायल हो जाते हैं और कई बार उनकी मौत भी हो जाती है।

ग्रामीण राधा कहती हैं कि सरकार गोवंश के लिए हर साल बजट भेजने की बात करती है लेकिन जमीन पर हालात अलग दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि किसान भी अपनी मजबूरी में ऐसा करते हैं क्योंकि पूरे साल का गुजारा उनकी फसल पर निर्भर करता है। जब जानवर खेतों में घुसते हैं और लाठी-डंडे से भी नहीं भागते तो कई बार किसान उन्हें नुकीले हथियारों से मार देते हैं। इससे गोवंश गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। कई जानवर इलाज के अभाव में सड़क किनारे या खेतों में पड़े रहते हैं। उनका सवाल है कि अगर सरकार पूरे साल गोवंश के लिए पैसा भेजती है तो गौशालाओं में उनके रहने, खाने और इलाज की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं हो पाती?

फोटो साभार: शिवदेवी                                              

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने हर ग्राम पंचायत में गौशालाएं बनवाई हैं लेकिन कई जगह आज भी गोवंश खुले घूम रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर इन्हें गौशालाओं में रखा जाए तो किसानों की फसल भी बचेगी, सड़क दुर्घटनाएं भी कम होंगी और गोवंश भी घायल होने से बचेंगे।

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“नाग पंचमी के बाद बंद होंगे गोवंश” प्रधान 

इस मामले में अतरहाट ग्राम के प्रधान सुरेश सिंह से बात की गई। उन्होंने बताया कि अभी किसी भी ग्राम पंचायत में सभी निराश्रित गोवंश को गौशालाओं में नहीं रखा गया है। उनके अनुसार हर साल की तरह इस बार भी नाग पंचमी के बाद गोवंश को गौशालाओं में रखा जाएगा। 

फोटो साभार: शिवदेवी                                             

सचिव बोले, बजट नहीं आया, इसलिए हो रही देरी

ग्राम दोहतरा, पदारथपुर के सचिव अभिषेक राठौर के अनुसार फिलहाल सभी गोवंश गौशालाओं में नहीं रखे गए हैं। उनका कहना है कि अभी किसानों की तिल की फसल है और वे खुद उसकी रखवाली कर रहे हैं। लगभग 20 दिन बाद सभी गोवंश को गौशालाओं में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि गौशालाओं के संचालन के लिए मिलने वाला बजट समय पर नहीं आया है। पिछले छह महीने का भुगतान भी लंबित है। कई बार प्रधान और सचिव को अपने स्तर से व्यवस्था करनी पड़ती है।

पलरा के पशु चिकित्सा ने क्या कहा 

पलरा के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए.के. गुप्ता का कहना है कि लगातार बारिश के कारण गौशालाओं में काफी कीचड़ और दलदल हो गया है। ऐसे में सभी गोवंश को एक साथ वहां रखना उचित नहीं होगा क्योंकि इससे उनके बीमार होने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि ऊपर से निर्देश मिल चुके हैं और जैसे ही गौशालाओं की स्थिति सामान्य होगी नाग पंचमी तक चरणबद्ध तरीके से गोवंश को वहां रखा जाएगा।

फोटो साभार: शिवदेवी                                              

शासन के निर्देश पर होगी कार्रवाई – एडीओ पंचायत

इस पर तिंदवारी के एडीओ पंचायत दिनेश कुमार द्वारा बताया गया कि इस संबंध में अधिकारियों की बैठक हो चुकी है और शासन का आदेश भी प्राप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 47 स्थायी और दो अस्थायी गौशालाएं हैं। सभी ग्राम पंचायतों के निराश्रित गोवंश को चरणबद्ध तरीके से गौशालाओं में रखा जाएगा। सरकार प्रत्येक गोवंश के रखरखाव के लिए 50 रुपये प्रतिदिन देती है। उनका कहना है कि यदि इसके बाद भी किसी ग्राम पंचायत में गोवंश सड़क पर घूमते हुए मिले तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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देखा जाए तो अब ये समस्या सिर्फ किसानों की फसल का नुकसान नहीं है। यह सड़क सुरक्षा, पशु कल्याण और ग्रामीण व्यवस्था इन तीनों से जुड़ा मुद्दा है। एक ओर किसान अपनी साल भर की मेहनत बचाने के लिए रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं तो दूसरी ओर गोवंश भी भोजन और सुरक्षित ठिकाने के अभाव में सड़कों और खेतों में भटक रहे हैं। सरकार, पंचायत और प्रशासन सभी का कहना है कि जल्द ही गोवंश को गौशालाओं में रखा जाएगा। अब देखना यह है कि ये दावे जमीन पर कब तक उतरते हैं और किसानों व गोवंश दोनों को इस समस्या से राहत कब मिलती है।

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