Gupt Navratari 2026 3rd Day: आज तीसरे गुप्त नवरात्रि पर रखे मां त्रिपुर सुंदरी का व्रत, जानें पूजा विधि,शक्तिशाली मंत्र और आरती

Published on 17 जुल॰ 2026

Gupt Navratari 2026 3rd Day: आज यानी 17 जुलाई को गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन है. 10 महाविद्याओं में से आज तीसरी शक्ति स्वरूपिणी मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा-अर्चना की जाती है. यह दिन उनकी पूजा के लिए समर्पित है. त्रिपुर सुंदरी माता को सौंदर्य और आकर्षण की देवी भी कहते हैं. धार्मिक मान्यता है कि देवी त्रिपुर सुंदरी का आशीर्वाद प्राप्त करने से दापंत्य जीवन में सुख-शांति और पारिवारिक सुख प्राप्त होता है. गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन माता त्रिपुर सुंदरी की पूजा करने की सही विधि, मंत्र और मुहूर्त जान लें. इसके अलावा, आज ही चतुर्थी तिथि भी शुरू हो जाएगी तो माता भुवनेश्वरी की पूजा भी की जा सकती हैं.

मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा का शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:00 बजे से 04:42 तक
  • प्रातः सन्ध्या: सुबह 04:21 बजे से 05:23 तक
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:40 तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:00 बजे से 07:21 तक
  • सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:02 बजे से रात  08:04 तक
  • निशिता मुहूर्त: रात 11:52 बजे से रात के 12:33 तक, 18 जुलाई को 

मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा विधि क्या है?

गुप्त नवरात्रि में सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करना है. इसके बाद पूजा स्थान पर साफ-सफाई करने के बाद मंदिर में एक चौकी स्थापित करें. इसके बाद लाल वस्त्र बिछाकर मां त्रिपुर सुंदरी की प्रतिमा रखें. त्रिपुर सुंदरी माता के सामने धूप, दीया, तिलक लगाएं और उन्हें फूल माला अर्पित करें. आज माता त्रिपुर सुंदरी को फलों-मिठाइयों का भोग लगाएं. शांत मन से मां का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जाप करें. अंत में आरती करके पूजा का समापन करें.

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माता त्रिपुर सुंदरी के शक्तिशाली मंत्र

1.मूल बीज मंत्र- ऊं  ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरायै नमः

2.सौंदर्य और समृद्धि के लिए- ऊं श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौः ललिताम्बिकायै नमः॥

3.मनोकामना पूर्ति का मंत्र- ऊं ह्रीं श्रीं क्लीं परापरे त्रिपुरे सर्वमीप्सितं साधय स्वाहा॥

4.बुद्धि और ज्ञान के लिए मंत्र- ऊं ऐं क्लीं सौः

कैसे करें मंत्रों का जाप?

माता त्रिपुर सुंदरी के मंत्रों का जाप करने के लिए आप स्फटिक या रुद्राक्ष की माला ले सकते हैं. यह माला इनके मंत्र जाप के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है. आप मंत्रों का जाप करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल का समय चुन सकते हैं. मंत्रों का जाप करने से पहले अपनी मनोकामना को स्पष्ट रूप से मन में बोलें.

देवी त्रिपुरसुंदरी कौन हैं?

देवी पुराणों के अनुसार, माता त्रिपुरसुंदरी भोग और मोक्ष की अधिष्ठात्री देवी कही जाती है. उनके बारे में ऐसा वर्णन मिलता है कि मां भगवती का यह स्वरुप सौम्य और कोमल होता है. इनकी पूजा करने से सांसारिक और आध्यात्मिक रूप से शक्ति प्राप्त होती है. त्रिपुरसुंदरी माता को महात्रिपुरसुन्दरी, षोडशी, ललिता, लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लीलेशी, लीलेश्वरी, तथा राजराजेश्वरी के नामों से भी पुकारा जाता है. त्रिपुरसुंदरी नाम का अर्थ होता है जागृत होना.

माता त्रिपुर सुंदरी की आरती (Aarti Lyrics of Mata Tripur Sundari)

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।
राजेश्वरी जय नमो नमः॥

करुणामयी सकल अघ हारिणी।
अमृत वर्षिणी नमो नमः॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥

अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी।
खल-दल नाशिनी नमो नमः॥

भण्डासुर वधकारिणी जय माँ।
करुणा कलिते नमो नमः॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥

भव भय हारिणी, कष्ट निवारिणी।
शरण गति दो नमो नमः॥

शिव भामिनी साधक मन हारिणी।
आदि शक्ति जय नमो नमः॥

जय शरणं वरणं नमो नमः।
जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः॥

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।
राजेश्वरी जय नमो नमः॥

माता त्रिपुर सुंदरी की चालीसा (Tripur Sundari Mata Chalisa in Hindi)

जयति जयति जय ललिते माता।तव गुण महिमा है विख्याता॥
तू सुन्दरी, त्रिपुरेश्वरी देवी।सुर नर मुनि तेरे पद सेवी॥

तू कल्याणी कष्ट निवारिणी।तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी॥
मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी।भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी॥

आदि शक्ति श्री विद्या रूपा।चक्र स्वामिनी देह अनूपा॥
हृदय निवासिनी-भक्त तारिणी।नाना कष्ट विपति दल हारिणी॥

दश विद्या है रुप तुम्हारा।श्री चन्द्रेश्वरी नैमिष प्यारा॥
धूमा, बगला, भैरवी, तारा।भुवनेश्वरी, कमला, विस्तारा॥

षोडशी, छिन्न्मस्ता, मातंगी।ललितेशक्ति तुम्हारी संगी॥
ललिते तुम हो ज्योतित भाला।भक्त जनों का काम संभाला॥

भारी संकट जब-जब आये।उनसे तुमने भक्त बचाए॥
जिसने कृपा तुम्हारी पायी।उसकी सब विधि से बन आयी॥

संकट दूर करो माँ भारी।भक्त जनों को आस तुम्हारी॥
त्रिपुरेश्वरी, शैलजा, भवानी।जय जय जय शिव की महारानी॥

योग सिद्दि पावें सब योगी।भोगें भोग महा सुख भोगी॥
कृपा तुम्हारी पाके माता।जीवन सुखमय है बन जाता॥

दुखियों को तुमने अपनाया।महा मूढ़ जो शरण न आया॥
तुमने जिसकी ओर निहारा।मिली उसे सम्पत्ति, सुख सारा॥

आदि शक्ति जय त्रिपुर प्यारी।महाशक्ति जय जय, भय हारी॥
कुल योगिनी, कुण्डलिनी रूपा।लीला ललिते करें अनूपा॥

महा-महेश्वरी, महा शक्ति दे।त्रिपुर-सुन्दरी सदा भक्ति दे॥
महा महा-नन्दे कल्याणी।मूकों को देती हो वाणी॥

इच्छा-ज्ञान-क्रिया का भागी।होता तब सेवा अनुरागी॥
जो ललिते तेरा गुण गावे।उसे न कोई कष्ट सतावे॥

सर्व मंगले ज्वाला-मालिनी।तुम हो सर्व शक्ति संचालिनी॥
आया मां जो शरण तुम्हारी।विपदा हरी उसी की सारी॥

नामा कर्षिणी, चिन्ता कर्षिणी।सर्व मोहिनी सब सुख-वर्षिणी॥
महिमा तव सब जग विख्याता।तुम हो दयामयी जग माता॥

सब सौभाग्य दायिनी ललिता।तुम हो सुखदा करुणा कलिता॥
आनन्द, सुख, सम्पत्ति देती हो।कष्ट भयानक हर लेती हो॥

मन से जो जन तुमको ध्यावे।वह तुरन्त मन वांछित पावे॥
लक्ष्मी, दुर्गा तुम हो काली।तुम्हीं शारदा चक्र-कपाली॥

मूलाधार, निवासिनी जय जय।सहस्रार गामिनी माँ जय जय॥
छः चक्रों को भेदने वाली।करती हो सबकी रखवाली॥

योगी, भोगी, क्रोधी, कामी।सब हैं सेवक सब अनुगामी॥
सबको पार लगाती हो माँ।सब पर दया दिखाती हो माँ॥

हेमावती, उमा, ब्रह्माणी।भण्डासुर कि हृदय विदारिणी॥
सर्व विपति हर, सर्वाधारे।तुमने कुटिल कुपंथी तारे॥

चन्द्र- धारिणी, नैमिश्वासिनी।कृपा करो ललिते अधनाशिनी॥
भक्त जनों को दरस दिखाओ।संशय भय सब शीघ्र मिटाओ॥

जो कोई पढ़े ललिता चालीसा।होवे सुख आनन्द अधीसा॥
जिस पर कोई संकट आवे।पाठ करे संकट मिट जावे॥

ध्यान लगा पढ़े इक्कीस बारा।पूर्ण मनोरथ होवे सारा॥
पुत्र-हीन संतति सुख पावे।निर्धन धनी बने गुण गावे॥

इस विधि पाठ करे जो कोई।दुःख बन्धन छूटे सुख होई॥
जितेन्द्र चन्द्र भारतीय बतावें।पढ़ें चालीसा तो सुख पावें॥

सबसे लघु उपाय यह जानो।सिद्ध होय मन में जो ठानो॥
ललिता करे हृदय में बासा।सिद्दि देत ललिता चालीसा॥

दोहा

ललिते मां अब कृपा करो,सिद्ध करो सब काम।
श्रद्धा से सिर नाय करे,करते तुम्हें प्रणाम॥

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)