Aug 04, 2026 09:42 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2012 में ट्रेन में गैगरेप की पीड़िता को 3 लाख का मुआवजा देने के एनएचआरसी के निर्देश को सही ठहराया है। अदालत ने रेलवे की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यात्रियों को सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2012 में ट्रेन में सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में अपना फैसला दिया है।
हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के उस निर्देश को सही ठहराया है जिसमें रेलवे को 2012 में ट्रेन के अंदर सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई एक यात्री को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। अदातल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के फैसले के खिलाफ रेल मंत्रालय की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि रेलवे पीड़िता को सुरक्षित माहौल देने के लिए जिम्मेदार है।
पीड़िता मुआवजा पाने की हकदार
जस्टिस अमित बंसल की पीठ ने NHRC के फैसले के खिलाफ रेल मंत्रालय की याचिका खारिज कर दी और कहा कि रेलवे पीड़िता को सुरक्षित माहौल देने के लिए जिम्मेदार है। यह एक हिंसक वारदात की तरह है। इसमें पीड़िता मुआवजा पाने की हकदार है। रेलवे मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार है।
एनएचआरसी का निर्देश गलत नहीं
अदालत ने यह मानते हुए कि मुआवजा देने का एनएचआरसी का निर्देश गलत या साफतौर पर गैर-कानूनी नहीं था। पीठ ने कहा कि आयोग ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के शिकार को तुरंत पैसे की राहत देने की सिफारिश करके अपने अधिकार क्षेत्र का सही इस्तेमाल किया था। पीड़िता रेलवे की एक असल पीड़िता थी जिसने यात्रा के लिए टिकट खरीदा था। वह ट्रेन में सफर कर रही थी। इसी दौरान उसके साथ वारदात हुई।
रेलवे मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार
अदालत ने 29 जुलाई को जारी आदेश में कहा कि चूंकि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना ट्रेन के डिब्बे के अंदर हुई थी, इसलिए इसे रेलवे एक्ट की धारा 123 (c) के तहत अनचाही घटना माना जाएगा। रेलवे एक्ट की धारा 124A के तहत रेलवे मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार है। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि केस चलने के दौरान रेलवे की ओर से जमा की गई मुआवजे की रकम ब्याज के साथ पीड़ित को जारी की जाए।
लखीसराय में हुई थी वारदात
बता दें कि यह घटना पीड़िता के साथ अगस्त 2012 में बिहार के लखीसराय में हुई थी। पीड़िता के साथ प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर एक यात्री ट्रेन की बोगी में सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। पीड़िता के पिता ने वारदात को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद, NHRC ने अप्रैल 2014 में कहा था कि रेलवे बोर्ड के चेयरमैन पीड़िता को 3 लाख रुपये देने के लिए जिम्मेदार हैं।
NHRC ने खारिज कर दी थी रेलवे की दलील
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने रेलवे की उस दलील को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि मुआवजा देने के बारे में फैसला तो केवल रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल ही कर सकता है। बाद में मामला हाई कोर्ट पहुंचा। अदालत ने आदेश में कहा कि भले ही घटना रेलवे की किसी चूक की वजह से ना हुई हो फिर भी रेलवे एक्ट की धारा 124A के तहत किसी अनहोनी घटना के लिए मुआवजा देने की जिम्मेदारी रेलवे की है।
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Krishna Bihari Singh
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