HEC के सेवानिवृत्त कर्मियों को वेतन पुनरीक्षण का एरियर देने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

Published on 17 अक्टू॰ 2026

Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वर्ष 1997 से वेतन पुनरीक्षण का बकाया भुगतान करने के एकल पीठ के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है. एचईसी की अपील पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश दिया. 

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अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राहत है और दोनों पक्षों की दलीलें तथा जवाब दाखिल होने के बाद अंतरिम राहत के मुद्दे पर विस्तार से विचार किया जाएगा. मामले में एचईसी की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता श्रेय मिश्रा ने पक्ष रखा.

मामला एचईसी और उसके निदेशक (कार्मिक) की ओर से दायर अपील (एलपीए) दाखिल की गई है. अपील में एकल पीठ के 18 दिसंबर 2024 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें डब्ल्यूपी (एस) संख्या 5418/2012 में कर्मचारियों को वेतन पुनरीक्षण के बकाया का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था. इस अपील को हाईकोर्ट ने 12 अगस्त 2026 को सुनवाई के लिए स्वीकार किया था.

2008 के सर्कुलर के आधार पर दिया गया था बकाया भुगतान का आदेश

खंडपीठ ने अपने प्रारंभिक अवलोकन में कहा कि एकल पीठ के आदेश में 14 अक्टूबर 2008 के सर्कुलर संख्या 2/2008 पर भरोसा किया गया है. इस सर्कुलर के अनुसार वेतनमान का पुनरीक्षण एक जनवरी 1997 से किया गया था, लेकिन संशोधित वेतनमान में वास्तविक भुगतान 18 सितंबर 2008 से शुरू होना था.

अदालत ने कहा कि संबंधित कर्मचारी वर्ष 2002 के आसपास ही सेवानिवृत्त हो गए थे. ऐसे में उनके मामले में सर्कुलर के आधार पर बकाया भुगतान का निर्देश दिए जाने के मुद्दे पर विचार करना आवश्यक है.

समान पद पर रहे कर्मचारियों को लाभ देने की दलील

कर्मचारियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास ने दलील दी कि समान स्थिति वाले कम-से-कम तीन अन्य कर्मचारियों को एचईसी प्रबंधन ने वेतन पुनरीक्षण का लाभ दिया था. ऐसे में वर्तमान कर्मचारियों को इस लाभ से वंचित करना उनके साथ भेदभाव होगा. उन्होंने एकल पीठ के फैसले के पैरा 35 में दर्ज निष्कर्षों का भी हवाला दिया.

हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि फिलहाल भेदभाव से संबंधित स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. साथ ही, एकल पीठ ने अपने फैसले के पैरा 45 में 14 अक्टूबर 2008 के सर्कुलर के आधार पर बकाया भुगतान का निर्देश दिया था. अदालत ने इस मामले में प्रतिवादियों को अंतरिम राहत संबंधी याचिका पर जवाब दाखिल करने की अनुमति दी.

30 अक्टूबर तक जवाब, 6 नवंबर तक प्रत्युत्तर

खंडपीठ ने कर्मचारियों को 30 अक्टूबर 2026 तक जवाब दाखिल करने और उसकी अग्रिम प्रति एचईसी के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. इसके बाद एचईसी चाहे तो 6 नवंबर 2026 तक प्रत्युत्तर दाखिल कर सकता है. तब तक एकल पीठ के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी.

सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के वकील ने अदालत को बताया कि पहले प्रतिवादी लालजी प्रसाद सिन्हा का निधन हो चुका है. उनके कानूनी उत्तराधिकारियों का विवरण प्राप्त कर एचईसी के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने की बात कही गई. खंडपीठ ने एचईसी को भी दिवंगत कर्मचारी के कानूनी उत्तराधिकारियों को मामले में पक्षकार बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया. मामले में अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है.

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