रायपुर में जुटेंगे देशभर से HIV संक्रमित : गोपनीय बैठक में दवा छोड़ने जैसा कड़ा फैसला संभव - Haribhoomi

Published on 3 अग॰ 2026

एचआईवी और एड्स ग्रसित पीड़ित प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के लिए रायपुर में जुटेंगे।

HIV-infected individuals

देशभर से रायपुर में जुटेंगे सैकड़ों एचआईवी संक्रमित

  • Published: 03 Aug 2026, 09:18 AM IST
  • Last Updated: 03 Aug 2026, 09:18 AM IST

वरुण झा- रायपुर। एचआईवी और एड्स ग्रसित पीड़ित प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के लिए रायपुर में जुटेंगे। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सोमवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक गोपनीय बैठक होगी। इसमें सैकड़ों संक्रमित जीवन-रक्षक एआरटी की दवा छोड़ने का फैसला कर सकते हैं। इस बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओडिशा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और झारखंड से बड़ी संख्या में एचआईवी संक्रमित शामिल होंगे। 

एचआईवी से प्रभावित व्यक्ति का समूह सीजीएनपी प्लस ने छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर उनके समुदाय के अधिकतर लोगों के इतना परेशान किया जा रहा है कि अब वे एआरटी की दवा भी पूर्ण रूप से त्यागने का निर्णय ले सकते हैं। दवा बंद करने के बाद उनको को होने वाली स्वास्थ्य से संबंधित परेशानी और मौत के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा।

गोपनीयता भंग करने का आरोप 
संस्था ने आरोप लगाया कि,  रोकथाम में कार्य कर रही एनजीओ बिना किसी सरकारी आदेश के एचआईवी व्यक्तियों के घर जा जाकर उनकी गोपनीयता भंग कर रही है। उनके समुदाय को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। को वहीं, एचआईवी समुदाय उच्चाधिककारियों से 4 से 5 घंटे इंतजार कराने के बाद भी मिलने नहीं दिया जा रहा है। संस्था का कहना है कि छत्तीसगढ़ का जो एचआईवी नेटवर्क है, 2017 से एचआईवी पॉजिटिव बच्चों को आम लोगों की मदद से लगातार पोषक आहार प्रति माह दिया जा रहा है। लगातार प्रयास किया गया कि सरकार के द्वारा इन बच्चों को पोषक आहार दिया जाए, लेकिन इसमें भी सहायता नहीं की गई।

संक्रमितों के लिए परियोजना बंद
संस्था के पदाधिकारियों का आरोप है कि विहान सीएससी परियोजना, जो कि 2013 से प्रदेश में कार्ररत थी। यह तीन संस्था अलग-अलग बिलासपुर, रायपुर और जगदलपुर में काम कर रही थी। रायपुर और जगदलपुर की परियोजना स्वयं के समुदाय के द्वारा चलाई जा रही थी। वहीं, बिलासपुर की परियोजना एनजीओ के द्वारा संचालित किया जा रहा था। इस परियोजना में काम करने वाले कर्मचारी भी उनके समुदाय के थे। वे समुदाय की समस्याओं से परिचित थे और इसी के आधार पर सेवाएं दे रहे थे, लेकिन फरवरी 2026 में सीजीसैक/नाको के द्वारा मूल्यांकन कराया गया। मूल्यांकन के बाद 1 अप्रैल को कार्यालय को बंद कर दिया गया। यही नहीं, उनका पिछला बकाया भुगतान भी नहीं किया गया। परियोजना बंद होने के कारण एचआईवी समुदाय को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

एआरटी दवा छोड़ने पर हो सकती है मौत
एआरटी की दवा एचआईवी के प्रभाव को कम करने वाली मुख्य चिकित्सीय पद्धति (थेरेपी) है। दवा शरीर के भीरत वायरस की संख्या को नियंत्रित या कम करती है, जिसके कारण एच आईवी का वायरस शरीर में नगण्य हो जाता है। इतना कम कि कई बार वह जांच में भी नहीं दिखता। यदि कोई एचआईवी संक्रमित व्यक्ति इस दवा का सेवन रोकता या बंद करता है तो संक्रमण तेजी से बढ़ता है। कई गंभीर रोग होने का खतरा बढ़ने लगता है। संक्रमित की मौत तक हो सकती है।

जानकारी नहीं
सीएसटी के संयुक्त संचालक हरीश दवे ने बताया कि, मैं अभी नया आया हूं। इस विवाद को लेकर मुझे फिलहाल जानकारी नहीं है।

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