Published: Monday, August 24, 2026, 16:34 [IST]
Hotel Check-ins New Rule: होटल में कमरा बुक करते समय पहचान के लिए आधार कार्ड की कॉपी मांगना आम बात है। घूमने या किसी काम से दूसरे शहर जाने वाले लोगों को अक्सर रिसेप्शन पर अपना आधार दिखाने के साथ उसकी फोटोकॉपी भी जमा करनी पड़ती है। अब पहचान जांचने की प्रक्रिया में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
नई डिजिटल व्यवस्था के तहत होटल में ठहरने वाले लोगों की पहचान के लिए हर बार आधार कार्ड की फोटोकॉपी देने की जरूरत कम हो सकती है। इसके बदले QR कोड, OTP और ऐप के जरिए पहचान की जांच की जा सकती है। इसका मकसद पहचान की प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ लोगों की निजी जानकारी को ज्यादा सुरक्षित रखना है। हालांकि, अलग-अलग होटल में वेरिफिकेशन का तरीका अलग हो सकता है।
कैसे होगा पहचान का वेरिफिकेशन?
नई व्यवस्था में होटल में ठहरने वाले व्यक्ति की पहचान जांचने के लिए डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए QR कोड, OTP या ऐप आधारित वेरिफिकेशन का विकल्प अपनाया जा सकता है। यानी होटल के रिसेप्शन पर पहचान के लिए जरूरी जानकारी डिजिटल तरीके से सत्यापित की जा सकेगी। इससे कागज पर दस्तावेज की कॉपी रखने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है।
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क्या आधार की कॉपी देना पूरी तरह बंद होगा?
नई व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि हर होटल में हर स्थिति में आधार कार्ड की कॉपी देना तुरंत पूरी तरह बंद हो जाएगा। होटल और वेरिफिकेशन सिस्टम के हिसाब से प्रक्रिया अलग हो सकती है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को आसान बनाने और डिजिटल तरीकों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। इसी वजह से होटल जैसी जगहों पर भी डिजिटल पहचान जांच को बढ़ावा दिया जा रहा है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
डिजिटल वेरिफिकेशन की व्यवस्था लागू होने से यात्रियों को कई तरह की सुविधा मिल सकती है। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोगों को बार-बार आधार कार्ड की फोटोकॉपी करवाकर जमा करने की जरूरत कम होगी। इसके अलावा पहचान से जुड़ी जानकारी को डिजिटल तरीके से संभालने पर डेटा की सुरक्षा बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। होटल में चेक-इन की प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले आसान और तेज हो सकती है।
प्राइवेसी का भी रखा जाएगा ध्यान
होटल में ठहरने के दौरान पहचान से जुड़ी निजी जानकारी शेयर करनी पड़ती है। डिजिटल व्यवस्था का एक मकसद यह भी है कि जरूरी पहचान की जांच हो, लेकिन लोगों की निजी जानकारी को अनावश्यक रूप से कागज पर इकट्ठा न करना पड़े।
QR कोड, OTP और ऐप आधारित सिस्टम के जरिए वेरिफिकेशन होने से पहचान जांच की प्रक्रिया डिजिटल हो सकती है और प्राइवेसी को भी बेहतर तरीके से बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
होटलों और रेस्तरां में बढ़ेगा डिजिटल वेरिफिकेशन
इस दिशा में कई होटल पहले से डिजिटल पहचान जांच की व्यवस्था शुरू कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि दिसंबर तक देश के 50 प्रतिशत से ज्यादा होटल और रेस्तरां में पहचान के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की जा सकती है। इस बदलाव के बाद होटल में कमरा लेने के दौरान पहचान जांच की प्रक्रिया धीरे-धीरे कागजी दस्तावेजों से डिजिटल सिस्टम की ओर बढ़ सकती है।
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