NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) और NEET पेपर लीक विवाद के कारण उपजे भारी असंतोष और देश भर के छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने प्रशासनिक गलियारों में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है. सीनियर ब्यूरोक्रेट दीप्ति गौड़ मुखर्जी को देश का नया उच्च शिक्षा सचिव (Higher Education Secretary) नियुक्त किया गया है.
शिक्षा मंत्रालय के इस सबसे संवेदनशील पद पर बदलाव को केवल एक सामान्य तबादला नहीं, बल्कि पेपर लीक विवाद के बाद बिगड़ी साख को सुधारने और परीक्षा तंत्र में पारदर्शिता वापस लाने की एक बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' के तौर पर देखा जा रहा है.
20 दिनों में दो बदलाव: आखिर क्यों हटाये गए अधिकारी?
मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, सरकार ने अपने ही 23 जुलाई के पुराने आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए यह फैसला लिया है:
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विनीत जोशी का तबादला: NEET विवाद गहराने के बाद उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी को हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में भेजा गया था.
नरेश पाल गंगवार की जगह दीप्ति: विनीत जोशी की जगह पहले 1994 बैच के आईएएस नरेश पाल गंगवार को ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी. लेकिन महज़ कुछ ही दिनों के भीतर इस फैसले को संशोधित करते हुए अब दीप्ति गौड़ मुखर्जी को स्थायी रूप से नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है.
कौन हैं दीप्ति गौड़ मुखर्जी?
1993 बैच की MP कैडर IAS: दीप्ति गौड़ मुखर्जी मध्य प्रदेश कैडर की 1993 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं. कॉर्पोरेट मामलों की सचिव से शिक्षा मंत्रालय तक: इस नई नियुक्ति से पहले वे कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव के पद पर तैनात थीं.
सख्त प्रशासक की छवि: मध्य प्रदेश सरकार में वे स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और राजस्व जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों में प्रमुख सचिव (Principal Secretary) के रूप में कार्य कर चुकी हैं. प्रशासनिक मामलों और जटिल व्यवस्थाओं को ट्रैक पर लाने के लिए उन्हें एक बेहद सख्त और नियम-कायदों का पालन कराने वाली अफसर के रूप में जाना जाता है.
दीप्ति के सामने हैं 3 सबसे बड़ी चुनौतियां?
NEET और UGC-NET जैसी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में धांधली के बाद दीप्ति गौड़ मुखर्जी के लिए यह पद कांटों भरा ताज साबित होने वाला है:
NTA के ढांचे में बड़ा सुधार: पूर्व ISRO चीफ डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में बनी हाई-लेवल कमेटी की सिफारिशों को लागू करना और NTA की साख को दोबारा बहाल करना.
आगामी प्रवेश परीक्षाओं का पारदर्शी संचालन: देश के लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा डिगा हुआ है. ऐसे में आगामी सत्र की परीक्षाओं को पूरी तरह से 'लीक-प्रूफ' बनाना सबसे बड़ी परीक्षा होगी.
संसद और विपक्ष के तीखे सवालों का सामना: पेपर लीक का मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गरमाया हुआ है, ऐसे में नीतिगत फैसलों में पारदर्शिता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता होगी.
प्रशासनिक फेरबदल में इन अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मेदारी
केंद्र सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल में कई अन्य वरिष्ठ अफसरों के प्रभार भी बदले गए हैं. इसमें पल्लवी जैन गोविल को युवा मामलों की अब कॉर्पोरेट मामलों की नई सचिव नियुक्त किया गया है. वहींमंत्रिमंडल सचिवालय में OSD रहे सुशील कुमार लोहानी को भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) का नया अध्यक्ष बनाया गया है. साथ ही जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की कमान वरिष्ठ अधिकारी अर्चना वर्मा को सौंपी गई है जो अब वी.एल. कांता राव का स्थान लेंगी.
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