तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं, जिन्हें सख्त प्रशासन, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ तख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है.
तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं, जिन्हें सख्त प्रशासन, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ तख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है.
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तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं, जिन्हें सख्त प्रशासन, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ तख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है. फिलहाल वे महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) Commissioner हैं. जुलाई 2026 में इस पद पर उनकी नियुक्ति को उनके करियर का 25वां तबादला/पोस्टिंग बताया गया.
किसान परिवार से IAS तक का सफर
मुंढे का जन्म बीड जिले के ताडसोन्ना गांव में किसान परिवार में हुआ. पढ़ाई के साथ उन्होंने खेत और साप्ताहिक बाजार में परिवार का हाथ बंटाया. 2004 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया 20वीं रैंक हासिल की और 2005 में IAS बने.
21 साल में 25 तबादले चर्चा में है
उनका प्रशासनिक करियर बार-बार होने वाले तबादलों के लिए खासा चर्चा रहा है. उन्होंने सोलापुर, नवी मुंबई, नासिक, नागपुर, पुणे समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में काम किया. FDA में उनकी नियुक्ति को 21 साल के करियर में 25वीं ट्रांसफर/पोस्टिंग बताया गया है.
उनके समर्थक इन तबादलों को नियमों से समझौता न करने की कीमत मानते हें. आलोचकों का कहना है कि उनका काम करने का तरीका बेहद सख्त और टकराव वाला है. इसलिए 25 तबादलों की वजह को सिर्फ "भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई" बताना पूरी तरह स्थापित तथ्य नहीं है. यह उनके करियर की लोकप्रिय व्याख्या है.
सोलापुर में मिली बड़ी पहचान
सोलापुर के कलेक्टर रहते हुए उन्होंने पानी की समस्या पर काफी जोर दिया. इस दौर में उन्हें महाराष्ट्र में "Waterman" के तौर पर अपनी पहचान मिली. 2015 में वह तब भी सुर्खियों में आए जब उन्होंने तत्कालीन मंत्री एकनाथ खडसे के काफिले को रोक दिया था. इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ.
अब FDA में क्या कर रहे हैं?
FDA Commissioner के रूप में उन्होंने खाद्य मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है. रिपोर्ट के मुताबिक, उनके नेतृत्व में रेस्टोरेंट, होटल और खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच की जा रही है. अभी उनकी कार्रवाई सिर्फ छोटे कारोबारों तक सीमित नहीं दिख रही—हाल में बड़े ब्रांडों के आउटलेट्स पर भी कार्रवाई हुई.
अब भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा?
मुंढे की पहचान लंबे समय से भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त अधिकारी की रही है. FDA में आने के बाद उनका फोकस खाद्य मिलावट, लाइसेंसिंग और नियमों के पालन पर है. हालिया खबरों में महाराष्ट्र सरकार की ओर से उनके अभियान को और मजबूत करने तथा कानूनी सहायता देने की बात भी सामने आई है.
यानी तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ "25 तबादलों वाले IAS" की नहीं है. यह ऐसे अधिकारी की कहानी है जिसकी सख्त कार्यशैली ने उसे जनता में लोकप्रिय बनाया, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवादों में भी रखा. और 2026 में FDA की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका सबसे बड़ा टेस्ट यही है कि यह सख्ती कितनी प्रभावी और टिकाऊ साबित होती है.