पटना8 घंटे पहले
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बेगूसराय की एक 16 साल की लड़की को नई जिंदगी मिली है। पटना के आईजीआईएमएस में डॉक्टरों ने उसके जकड़े हुए जबड़े का 3-डी इम्प्लांट से पुनर्निर्माण किया है। संस्थान का दावा है कि बिहार में इस तरह का यह पहला मामला है।
आठ साल से जबड़ा जकड़े होने के कारण बच्ची की जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई थी। उसका मुंह इतना कम खुलता था कि आधी उंगुली भी अंदर नहीं जा पाती थी। उसे खाना खाने, ठीक से बोलने और मुंह की सफाई करने में भी काफी परेशानी होती थी।
आईजीआईएमएस के मुख और जबड़ा सर्जरी विभाग ने यह मुश्किल ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने पहले जकड़े हुए जबड़े को मुक्त किया। फिर मरीज के सीटी स्कैन और जबड़े की बनावट के आधार पर तैयार 3-डी प्रिंटेड कस्टम इम्प्लांट लगाया गया। डॉक्टरों के सामने सिर्फ जोड़ को खोलने की चुनौती नहीं थी। आठ साल से जकड़े रहने के कारण जबड़े की सामान्य गति लगभग खत्म हो चुकी थी।

फाइबर-ऑप्टिक तकनीक की मदद से श्वास नली डाली
सर्जिकल टीम ने पहले ऑपरेशन कर जकड़े हुए जोड़ को मुक्त किया। इस पूरी प्रक्रिया में इम्प्लांट की सटीक फिटिंग बहुत जरूरी थी। इसके लिए मरीज के सीटी स्कैन की मदद से जबड़े की 3-डी बनावट का अध्ययन किया गया। फिर उसी के अनुरूप इम्प्लांट तैयार कराया गया।
सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया देना भी डॉक्टरों के लिए चुनौतीपूर्ण था। बच्ची का मुंह लगभग नहीं खुल रहा था, इसलिए सामान्य तरीके से श्वास नली डालना संभव नहीं था। टीम ने फाइबर-ऑप्टिक तकनीक की मदद से श्वास नली डाली। इससे बच्ची की सांस की नली को सुरक्षित रखते हुए ऑपरेशन किया जा सका। विभागाध्यक्ष प्रो. पीके दुबे के मार्गदर्शन में डॉ. नितिन, डॉ. आकृति, डॉ. अविनाश और डॉ. कृति ने यह प्रक्रिया पूरी की।
इस ऑपरेशन में इस्तेमाल इम्प्लांट बाजार में उपलब्ध सामान्य आकार का नहीं था। मरीज के सीटी स्कैन के आधार पर उसकी हड्डियों की बनावट के अनुरूप इसे तैयार कराया गया। इससे डॉक्टरों को ऑपरेशन के दौरान कृत्रिम जोड़ को निर्धारित स्थान पर सटीक तरीके से लगाने में मदद मिली। इम्प्लांट तैयार करने में पीएम डेवाइन 3-डी प्रिंटिंग उत्कृष्टता केंद्र, आई4आईसी, टेक सिटी, गुवाहाटी की चिकित्सा प्रमुख डॉ. कविता और उनकी टीम का सहयोग रहा।

टीम में शामिल डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ।
8 साल से बच्ची परेशान थी
ऑपरेशन करने वाली मुख एवं जबड़ा शल्य चिकित्सा टीम में डॉ. आकाश, डॉ. अभिषेक, डॉ. अपूर्व और डॉ. जावेद शामिल रहे। ऑपरेशन की योजना और तैयारी में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. यश, डॉ. मेहर, डॉ. सुधांशु और डॉ. अपराजिता पांडेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
टेम्पोरोमैंडिबुलर जोड़ यानी टीएमजे कान के सामने स्थित वह जोड़ है, जो मुंह खोलने-बंद करने और जबड़े की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस जोड़ के जकड़ने पर धीरे-धीरे मुंह खुलना कम हो जाता है। गंभीर स्थिति में मरीज का मुंह लगभग बंद हो सकता है।
ऐसी स्थिति में खाना चबाने, बोलने और दांतों व मुंह की सफाई में भी परेशानी होती है। लंबे समय तक बीमारी रहने पर समस्या और गंभीर हो सकती है। बच्ची करीब आठ साल से इस परेशानी से जूझ रही थी।
मरीज को मिली नई जिंदगी
आईजीआईएमएस के निदेशक डॉ. बिन्दे कुमार और उपनिदेशक डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने सर्जरी को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि 3-डी प्रिंटिंग तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सा टीम के समन्वय से जटिल मुख एवं जबड़ा पुनर्निर्माण के इलाज में नई संभावनाएं बनी हैं।
मरीज के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि आठ साल से जकड़े जबड़े के बाद अब उसके मुंह की सामान्य गतिविधियां वापस आने की उम्मीद बन गई है।
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