मेरे लिए जेल जैसी थी इंजीनियरिंग की डिग्री... आखिर एक IITian ने ऐसा क्यों कहा ?

Published on 20 जुल॰ 2026

मैंने अपनी सजा पूरी की और अपने मुख्य विषय से जितना हो सके उतना दूर भाग गया... IIT (BHU) के पूर्व छात्र आकाश संपूर्णानंद पांडे अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री को कुछ इस तरह बताया है. प्रतिष्ठित संस्थान में बिताए अपने चार साल को अपने दिमाग के लिए जेल बताते हुए पांडे कहते हैं कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई नाममात्र की ही की, बस ग्रेजुएट होने तक के लिए पढ़ाई की और इसके बजाय इतिहास, अर्थशास्त्र और राजनीति में अपना समय लगाया. 

उनके इस बयान से एक बार फिर बहस तेज हो गई है कि क्या लोगों को अपनी रुचि के अनुसार करियर चुनना चाहिए, क्या किसी प्रतिष्ठित डिग्री से ही पूरे करियर का फैसला होना चाहिए और अलग रास्ता चुनने में आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों की क्या भूमिका होती है. 

जेल जैसा हुआ महसूस 

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न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (आईआईटी-बीएचयू) से ग्रेजुएशन कर रहे आकाश संपूर्णानंद पांडे हाल ही में एक इंजीनियरिंग छात्र के रूप में अपने जीवन का एक बेबाक घटना शेयर किया है, जो वायरल हो गया है.  

अपने पोस्ट में पांडे ने खुद को आखिरी बेंच पर बैठने वाला, "निकम्मा" और "बेवकूफ" बताया है. उन्होंने स्वीकार किया कि वह क्लास में केवल इसलिए जाते थे क्योंकि IIT (BHU) में 75 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य थी. 

पोस्ट में क्या लिखा? 

उन्होंने लिखा कि मेरी डिग्री मेरे दिमाग के लिए अकादमिक रूप से चार साल की कैद जैसी थी. आईआईटी से मान्यता प्राप्त करने की यही कीमत मैंने चुकाई. पांडे ने बताया कि इंजीनियरिंग की क्लास के दौरान भी उनकी रुचि दूसरे विषयों में ज्यादा रहती थी. खाली समय में वह इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति और उपन्यास पढ़ते थे. ये किताबें उन्हें अक्सर अपने UPSC की तैयारी कर रहे रूममेट से मिल जाती थीं. उनके मुताबिक, वह हर सेमेस्टर 7 से 10 किताबें पढ़ते थे, जिनका इंजीनियरिंग से कोई संबंध नहीं था. 

पढ़ाई उतनी ही कि पास हो जाए 

पांडे ने बताया कि वह परीक्षा से एक दिन पहले ही इंजीनियरिंग की किताबें खोलते थे. उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ पास होने और डिग्री पूरी करने लायक पढ़ाई की. उन्होंने करीब 7.5 GPA इसलिए बनाए रखा ताकि कैंपस प्लेसमेंट के लिए पात्र बन जाए. वहीं, बाकी समय उन्होंने अपनी पसंद के विषयों पर ध्यान दिया, जिनसे उनके करियर को ज्यादा दिशा मिली. 

इंजीनियरिंग से दूर जाना 

ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद पांडे ने एक सलाहकार के रूप में कॉर्पोरेट जगत में कदम रखा लेकिन उन्होंने कहा कि डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने जानबूझकर इंजीनियरिंग से दूरी बना ली. पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मैंने अपनी सजा पूरी कर ली. एक कंसल्टिंग का काम शुरू किया और एक बार जब मैं आजाद हो गया, तो मैं अपने मुख्य विषय से जितना हो सके उतना दूर भाग गया. उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन एक ऐसे संदेश के साथ किया जो करियर बदलने वाले कई पेशेवरों के साथ गूंज उठा है. 

4 साल की डिग्री न करें पूरे जिंदगी का फैसला 

उन्होंने आगे कहा कि चार साल की डिग्री को अपने 40 साल के करियर का फैसला न करने दें. जैसे ही उन्होंने अपनी राय सोशल मीडिया पर शेयर की वैसे ही यूजर्स दो भागों में बट गए. जहां एक तरफ कुछ लोगों ने कई उनकी ईमानदारी की तारीफ की और कहा कि उनकी कहानी उन लोगों से जुड़ती है,जिन्हें पढ़ाई के दौरान अपनी असली रुचि का पता चला. वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि इंजीनियरिंग में दिलचस्पी न होने के बावजूद IIT की सीट लेना किसी दूसरे योग्य छात्र का मौका छीनने जैसा है. कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि IIT की पढ़ाई पर सरकार काफी खर्च करती है, इसलिए वहां पढ़ने वालों को उस अवसर का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए. 

करियर पर छिड़ गई एक व्यापक चर्चा 

पोस्ट के वायरल होते ही शिक्षा और करियर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. लंबे समय से IIT की डिग्री को सफलता की गारंटी माना जाता रहा है, लेकिन अब कई लोग इंजीनियरिंग छोड़कर कंसल्टिंग, फाइनेंस, स्टार्टअप, मीडिया, सिविल सेवा और दूसरे क्षेत्रों में भी अपना करियर बना रहे हैं.

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