
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च पेशावर से करीब 30 किलोमीटर दूर पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर खैबर पख्तूनख्वा से इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहे हैं।
स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को प्रदर्शनकारियों को बातचीत का प्रस्ताव दिया। खास बात यह है कि इससे एक दिन पहले ही सरकार ने इमरान समर्थकों से बातचीत की संभावना से इनकार किया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने सरकार का प्रस्ताव खारिज करते हुए कहा है कि वे इमरान खान की रिहाई की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।
180 किलोमीटर का सफर तय कर इस्लामाबाद पहुंचने का दावा
इमरान समर्थकों ने 4 अक्टूबर से खैबर पख्तूनख्वा से मार्च शुरू किया था। प्रदर्शनकारियों का लक्ष्य करीब 180 किलोमीटर की दूरी तय कर इस्लामाबाद पहुंचना है।
मार्च में खैबर पख्तूनख्वा के कई इलाकों से समर्थकों के शामिल होने की खबर है। टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मारवत से भी लोग मार्च में शामिल हुए हैं।
शहबाज शरीफ ने बातचीत का दिया प्रस्ताव
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रदर्शन के बीच बातचीत की पेशकश करते हुए कहा कि लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।
शहबाज के मुताबिक उनकी सरकार पिछले ढाई साल से आर्थिक स्थिरता के लिए काम कर रही है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, इमरान समर्थकों ने बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। उनका कहना है कि जब तक इमरान खान की रिहाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस्लामाबाद में प्रवेश रोकने की तैयारी
सरकार ने प्रदर्शनकारियों को राजधानी तक पहुंचने से रोकने की तैयारी तेज कर दी है। प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
राजधानी की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की आशंका बनी हुई है।
इमरान की रिहाई बना आंदोलन का मुख्य मुद्दा
इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं और कुछ मामलों में उन्हें सजा भी सुनाई जा चुकी है। उनके समर्थक लगातार इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए उनकी रिहाई की मांग करते रहे हैं।
इमरान की पत्नी बुशरा बीबी भी एक मामले में जेल में रह चुकी हैं, जबकि उनकी बहनों को भी सितंबर में एहतियाती हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई थी।
इलाज को लेकर भी सामने आया था विवाद
18 अगस्त को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को मेडिकल जांच और इलाज के लिए इस्लामाबाद के एक निजी अस्पताल में भेजने का आदेश दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें निजी अस्पताल के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया।
मेडिकल जांच के बाद उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया था।
बढ़ते मार्च से सरकार पर राजनीतिक दबाव
इमरान समर्थकों का मार्च अगर खैबर पख्तूनख्वा से आगे बढ़कर पंजाब और फिर इस्लामाबाद की ओर जाता है तो शहबाज सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह आंदोलन सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
फिलहाल सरकार बातचीत और सुरक्षा व्यवस्था के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, जबकि इमरान समर्थक अपनी प्रमुख मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।