India का REIT Market बना एशिया का चौथा बड़ा बाजार! क्या आपको भी करना चाहिए निवेश?
India का Real Estate Investment Trust यानी REIT बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। मार्च 2026 तक भारत के REIT बाजार की मार्केट वैल्यू दिसंबर 2024 के मुकाबले 62% बढ़कर करीब 17.7 अरब डॉलर पहुंच गई। इस तेजी के साथ भारत ने पहली बार हांगकांग को पीछे छोड़ते हुए एशिया का चौथा सबसे बड़ा REIT बाजार बनने का मुकाम हासिल किया है।

यह आंकड़े Cushman & Wakefield की Asia REIT Market Insight 2025-2026 रिपोर्ट से सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया में 31 मार्च 2026 तक कुल 289 एक्टिव REIT प्रोडक्ट्स थे, जिनकी संयुक्त मार्केट वैल्यू करीब 279.4 अरब डॉलर थी। यह दिसंबर 2024 के मुकाबले 18% ज्यादा है।
REIT यानी Real Estate Investment Trust एक ऐसा निवेश माध्यम है जिसके जरिए निवेशक स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड यूनिट्स खरीदकर कमर्शियल रियल एस्टेट में हिस्सेदारी ले सकते हैं। REITs आम तौर पर ऑफिस पार्क, शॉपिंग मॉल और दूसरी आय पैदा करने वाली कमर्शियल प्रॉपर्टीज में निवेश करते हैं। इससे निवेशकों को सीधे पूरी प्रॉपर्टी खरीदे बिना रियल एस्टेट से मिलने वाली आय में हिस्सा लेने का मौका मिलता है। भारत में REITs को अपने Net Distributable Cash Flow का कम से कम 90% यूनिटहोल्डर्स को वितरित करना होता है। हालांकि यह वितरण अलग-अलग REIT की आय और कैश फ्लो की संरचना के आधार पर अलग हो सकता है।
भारत में अब 6 लिस्टेड REITs
भारत में REIT का सफर 2019 में Embassy Office Parks REIT के साथ शुरू हुआ था। अब देश में 6 लिस्टेड REITs हैं।
इनमें शामिल हैं:
- Embassy Office Parks REIT
- Mindspace Business Parks REIT
- Brookfield India Real Estate Trust
- Nexus Select Trust
- Knowledge Realty Trust
- Bagmane Prime Office REIT
इन छह REITs के पास मिलकर 214 मिलियन वर्ग फुट से ज्यादा Grade-A ऑफिस और रिटेल स्पेस है। जून 2026 तक इनके ग्रॉस एसेट्स अंडर मैनेजमेंट यानी AUM ₹3.17 लाख करोड़ से ज्यादा था, जबकि 11 अगस्त 2026 तक संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹2.17 लाख करोड़ से अधिक था।
बढ़ा REIT बाजार का आकार
भारत के REIT बाजार के विस्तार में Knowledge Realty Trust और Bagmane Prime Office REIT की नई लिस्टिंग का बड़ा योगदान रहा है। Cushman & Wakefield के अनुसार, इन दोनों नई लिस्टिंग ने मिलकर करीब 53.7 मिलियन वर्ग फुट स्पेस जोड़ा। जून 2025 से जून 2026 के बीच छह भारतीय REITs में जुड़े नए स्पेस का करीब तीन-चौथाई हिस्सा इन दोनों से आया। जून 2026 तक छह लिस्टेड REITs के पास करीब 178 मिलियन वर्ग फुट स्पेस था, जबकि लगभग 36.7 मिलियन वर्ग फुट स्पेस निर्माण या योजना के चरण में था। इससे आने वाले वर्षों में REIT पोर्टफोलियो के और विस्तार की संभावना दिखाई देती है।
REITs ने Q1 FY27 में बांटे ₹3,136 करोड़
REIT सेक्टर में बढ़ती गतिविधि का असर निवेशकों को मिलने वाले वितरण पर भी दिखाई दिया है। अप्रैल-जून 2026 यानी Q1 FY27 में भारत के छह लिस्टेड REITs ने मिलकर ₹3,136 करोड़ से ज्यादा का वितरण करीब 4.85 लाख यूनिटहोल्डर्स को किया। एक साल पहले Q1 FY26 में चार लिस्टेड REITs ने ₹1,559 करोड़ का वितरण किया था। हालांकि मौजूदा आंकड़े की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि एक साल में लिस्टेड REITs की संख्या चार से बढ़कर छह हो गई है। इसलिए पूरा वितरण बढ़ना केवल मौजूदा REITs की आय बढ़ने का संकेत नहीं है। अब तक छह REITs मिलकर अपने गठन के बाद से यूनिटहोल्डर्स को ₹34,800 करोड़ से ज्यादा वितरित कर चुके हैं।
GCC और MNCs से मिल रही ऑफिस स्पेस की मांग
भारत के ऑफिस REIT बाजार की ग्रोथ के पीछे Global Capability Centres यानी GCCs और मल्टीनेशनल कंपनियों की ऑफिस स्पेस की मांग एक अहम कारण है। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में Grade-A ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत बनी हुई है। GCCs के विस्तार से प्रीमियम ऑफिस स्पेस की जरूरत बढ़ रही है, जिसका फायदा बड़े ऑफिस REIT पोर्टफोलियो को मिल रहा है। Cushman & Wakefield के अनुसार, ऑफिस REITs में ऑक्यूपेंसी मजबूत बनी हुई है और Grade-A ऑफिस स्पेस की मांग तथा GCC विस्तार बाजार के प्रमुख सपोर्टिंग फैक्टर हैं।
एशिया के REIT बाजार में भारत और चीन की बड़ी भूमिका
एशिया का REIT बाजार भी विस्तार कर रहा है। 31 मार्च 2026 तक एशिया में 289 एक्टिव REIT प्रोडक्ट्स की संयुक्त मार्केट वैल्यू करीब 279.4 अरब डॉलर थी। यह 2024 के अंत से 18% अधिक है। इस ग्रोथ में भारत और चीन की भूमिका खास रही है। इसी अवधि में एशिया में 27 नई REIT लिस्टिंग हुईं, जिनमें 21 लिस्टिंग चीन के मेनलैंड से आईं। जहां भारत में ऑफिस और रिटेल रियल एस्टेट REIT बाजार का प्रमुख हिस्सा हैं, वहीं चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर REITs के साथ-साथ कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए भी अपना दायरा बढ़ाया है।
भारत के REIT बाजार के सामने क्या हैं जोखिम?
REIT बाजार की ग्रोथ के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं।
पहला जोखिम ब्याज दरों का है। अगर घरेलू या वैश्विक ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो REITs की वैल्यूएशन और यील्ड पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा निवेशकों के लिए बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड-इनकम विकल्पों की तुलना भी बदल सकती है।
दूसरा जोखिम ऑफिस स्पेस की सप्लाई और मांग से जुड़ा है। अगर GCC hiring की रफ्तार धीमी होती है या नई ऑफिस सप्लाई मांग से ज्यादा बढ़ती है, तो vacancy बढ़ने का जोखिम हो सकता है।
तीसरा जोखिम नई लिस्टिंग के बाद की volatility है। नई REIT listings और Offer for Sale यानी OFS के बाद शेयर/यूनिट की कीमतों में शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव संभव है।
इसलिए सिर्फ REIT की distribution yield या portfolio size देखकर निवेश का फैसला करना पर्याप्त नहीं है। Occupancy, lease expiry profile, rental growth, debt, interest cost, sponsor quality और asset quality जैसे factors को भी देखना जरूरी है।
आगे Data Centre REITs पर बढ़ सकती है चर्चा
REIT बाजार का अगला चरण केवल ऑफिस और रिटेल तक सीमित नहीं रह सकता।
AI और cloud computing के बढ़ते इस्तेमाल से data centre infrastructure की मांग बढ़ रही है। इससे भविष्य में Data Centre REITs को लेकर चर्चा बढ़ सकती है।
इसके अलावा hospitality, warehousing और logistics जैसे asset classes में भी REIT structure के विस्तार की संभावनाएं देखी जा रही हैं।
दूसरी तरफ, मौजूदा REIT managers के लिए M&A और नए assets का acquisition भी growth का रास्ता हो सकता है।
क्या REIT में निवेश करना चाहिए?
भारत का REIT बाजार तेजी से institutional scale पर पहुंच रहा है। Market value में 62% की बढ़ोतरी, छह लिस्टेड REITs, मजबूत office demand, नई listings और बढ़ते distributions ने इस asset class का आकार बढ़ाया है। लेकिन REIT को केवल "रियल एस्टेट से किराया कमाने" वाले निवेश के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं है। REIT की unit की market price ऊपर-नीचे हो सकती है और distribution भी भविष्य में बदल सकता है। निवेशक को REIT चुनते समय occupancy, rental income की स्थिरता, debt level, interest rates, lease renewals, asset quality, sponsor quality और अपनी investment horizon को ध्यान में रखना चाहिए।
भारत का REIT बाजार जिस तेजी से विस्तार कर रहा है, उससे यह asset class भारतीय capital markets में पहले की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। लेकिन बढ़ते बाजार के साथ valuation और underlying cash flows की जांच करना भी उतना ही जरूरी है।
Story first published: Monday, September 21, 2026, 17:04 [IST]
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