Indira Gandhi के हत्यारे का बेटा Satwant Singh कौन? अमृतपाल की पार्टी ने पंजाब चुनाव 2027 में बनाया कैंडिडेट

Published on 11 अग॰ 2026

Time Published: Tuesday, August 11, 2026, 20:23 [IST]

Punjab Election 2027: 'अकाली दल वारिस पंजाब दे' ने फतेहगढ़ साहिब जिले की बस्सी पठाना विधानसभा सीट से सतवंत (61 वर्ष) को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी की ओर से यह घोषणा 10 अगस्त 2026 को की गई।

रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तरसेम सिंह, जो खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के पिता हैं, ने सतवंत सिंह के नाम का ऐलान किया। इस मौके पर फरीदकोट के सांसद सरबजीत सिंह खालसा समेत पार्टी के अन्य नेता और केहर सिंह के परिवार से जुड़े लोग मौजूद रहे। आखिर कौन हैं सतवंत सिंह? क्या था इंदिरा गांधी हत्याकांड (Indira Gandhi Murder Case) में दोषी पाए केहर सिंह की कहानी? आइए जानते हैं...

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Indira Gandhi पर गोली चलाने वाले का नाम भी था सतवंत सिंह, क्या लिंक?

यहां सबसे पहले नामों को लेकर एक बड़ा भ्रम दूर करना जरूरी है। चुनाव लड़ने वाले सतवंत सिंह वही व्यक्ति नहीं हैं, जिसे इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में फांसी दी गई थी। दरअसल, 31 अक्टूबर 1984 को हुआ कुछ यूं था कि इंदिरा गांधी पर दो बॉडीगार्ड सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने गोली चलाई। तभी सुरक्षा कर्मियों की गोलियों ने बेअंत सिंह को ढेर कर दिया। मामले में केहर सिंह को अदालत ने हत्या की साजिश में दोषी ठहराया। बेअंत सिंह को केहर सिंह का भतीजा था। 6 जनवरी 1989 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। उसी दिन सतवंत सिंह को भी फांसी दी गई थी।

Who Is Satwant Singh: तो कौन हैं चुनाव में खड़े सतवंत सिंह?

केहर सिंह की पत्नी जसबीर कौर के 7 बच्चों में से एक सतवंत सिंह (61 वर्ष) का जन्म मुस्तफाबाद गांव में हुआ। सबसे बड़े बेटे राजिंदर सिंह हैं। सतवंत सिंह को फतेहगढ़ साहिब जिले की बस्सी पठाना विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। यह 2027 के लिए अकाली दल (पंजाब के वारिस) द्वारा घोषित पहला कैंडिडेट है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह पहली बार चुनावी राजनीति में आ रहे हैं।फरीदकोट के MP सरबजीत सिंह खालसा ने कहा है कि सतवंत सिंह का गाँव भी इसी सीट में आता है और वह यहां काम करते रहे हैं।

Who Is Kehar Singh: केहर सिंह कौन थे?

केहर सिंह दिल्ली में केंद्र सरकार के एक विभाग में कर्मचारी थे। 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जांच में उनका नाम सामने आया। अदालत ने उन्हें हत्या की आपराधिक साजिश का दोषी माना और मौत की सजा सुनाई। उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील भी हुई, लेकिन अंततः सजा बरकरार रही। 6 जनवरी 1989 को उन्हें तिहाड़ जेल में फांसी दी गई।

केहर सिंह के परिवार में कितने लोग?

एक स्रोत के अनुसार, केहर सिंह की पत्नी जसबीर कौर थीं और उनके पांच बेटे और दो बेटियां थीं। इनमें राजिंदर सिंह, चरनजीत सिंह, हरदीप सिंह, सतवंत सिंह पप्पी और सतवंत सिंह के नाम दिए गए हैं।

पार्टी ने क्यों दिया टिकट?

अकाली दल वारिस पंजाब दे के नेताओं ने सतवंत सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के पीछे पंथक परिवारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि उसकी राजनीति केवल सत्ता हासिल करने तक सीमित नहीं है। उसके एजेंडे में सिख समुदाय से जुड़े मुद्दे, पंजाब के अधिकार और उन परिवारों को प्रतिनिधित्व देना शामिल है जिन्हें पार्टी पंथक संघर्ष से जुड़ा मानती है। इसी क्रम में पार्टी ने केहर सिंह के परिवार से जुड़े सुखविंदर सिंह अगवान को भी अपने संसदीय बोर्ड में जिम्मेदारी देने की बात कही है।

Sarabjit Singh Khalsa की भूमिका भी अहम

इस पूरे घटनाक्रम में फरीदकोट सांसद सरबजीत सिंह खालसा का नाम भी महत्वपूर्ण है। वह 2024 के लोकसभा चुनाव में फरीदकोट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीतकर संसद पहुंचे थे। सरबजीत सिंह खालसा खुद 1984 के इंदिरा गांधी हत्याकांड से जुड़े परिवार से आते हैं। वह बेअंत सिंह के बेटे हैं। बेअंत सिंह उन दो सुरक्षा कर्मियों में शामिल था जिन्होंने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी पर गोली चलाई थी। इस तरह पंजाब की मौजूदा पंथक राजनीति में 1984 की घटना से जुड़े दो परिवारों की अगली पीढ़ी की राजनीतिक मौजूदगी अब एक साथ दिखाई दे रही है।

Amritpal Singh की पार्टी का क्या है राजनीतिक एजेंडा?

अकाली दल वारिस पंजाब दे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटा है। जून 2026 में फरीदकोट में पार्टी की बैठक के दौरान नेताओं ने कहा था कि अमृतपाल सिंह को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पेश किया जाएगा। बैठक की मेजबानी सरबजीत सिंह खालसा ने की थी।

अमृतपाल सिंह वर्तमान में जेल में हैं। अप्रैल 2026 में NSA के तहत उनकी हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद पंजाब पुलिस ने उन्हें 2023 के अजनाला थाना मामले में हिरासत में लिया था। जुलाई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक वह असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद थे और उनकी रिहाई की मांग को लेकर वारिस पंजाब दे ने प्रदर्शन भी किया था।