iPhone बनाने से लेकर अगली Apple कंपनी खड़ी करने तक... क्या सफल होगा भारत का ₹62,500 करोड़ का दांव? - indias 62500 crore mobile phone scheme

Published on 29 अग॰ 2026

इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि 2027 के मध्य तक भारत अपना पहला मजबूत स्वदेशी मोबाइल ब्रांड देखने की उम्मीद कर रहा है।

भारत का 62,500 करोड़ रुपये का मोबाइल फोन स्कीम (सांकेतिक तस्वीर)

भारत का 62,500 करोड़ रुपये का मोबाइल फोन स्कीम (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स 2014 में 2 से बढ़कर आज 300 से अधिक हो गई हैं।

  2. वैष्णव ने कहा भारत मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा छलांग लगाने जा रहा है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा छलांग लगाने जा रहा है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम की सफलता के बाद सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) लॉन्च की है। लक्ष्य सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि डिजाइन, आरएंडडी, कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग सब कुछ भारत में करके अपना ग्लोबल ब्रांड खड़ा करना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि 2027 के मध्य तक भारत अपना पहला मजबूत स्वदेशी मोबाइल ब्रांड देखने की उम्मीद कर रहा है।

PLI स्कीम ने क्या हासिल किया?

  • FY 2025-26 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्टेड कमोडिटी बन गया (पेट्रोलियम, जेम्स एंड ज्वेलरी को भी पीछे छोड़ा)।
  • 2014 में टॉप 100 एक्सपोर्ट कमोडिटी में भी नहीं था।
  • भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है।
  • घरेलू बाजार में इस्तेमाल होने वाले 99.2% फोन अब भारत में बनते हैं (2014-15 में सिर्फ 26% थे)।
  • मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स 2014 में 2 से बढ़कर आज 300 से अधिक हो गई हैं।
  • उत्पादन FY 2019-20 के 2.14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY 2024-25 में 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया।
  • एक्सपोर्ट FY 2014-15 के 1,566 करोड़ रुपये से बढ़कर FY 2024-25 में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
  • एप्पल के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स भारत के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट का करीब तीन-चौथाई हिस्सा हैं। एप्पल इस साल के अंत तक अमेरिका जाने वाले ज्यादातर iPhone भारत से शिप करने की योजना बना रहा है।

नई स्कीम (एमपीएमएस) क्या है?

  • 5 साल (FY 2030-31 तक) में 62,500 करोड़ रुपये का प्रावधान।
  • भारतीय ब्रांड्स, घरेलू पेटेंट, प्रोडक्ट डिजाइन और आरएंडडी को सपोर्ट।
  • मैन्युफैक्चरर्स को योग्य सेल्स पर 2.25 फीसदी से 5 फीसदी तक इंसेंटिव।
  • घरेलू कंपोनेंट्स सोर्सिंग पर अतिरिक्त इंसेंटिव।
  • प्रोडक्ट डिजाइन और आरएंडडी पर तीन फीसदी अतिरिक्त इंसेंटिव।
  • अनुमान: स्कीम के दौरान कुल मोबाइल फोन उत्पादन लगभग 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

क्या भारत अपना Apple या Samsung बना पाएगा?

  •  एक्सपर्ट्स के अनुसार चुनौती बड़ी है, लेकिन संभावनाएं हैं।
  • ग्लोबल ब्रांड बनाने में सिर्फ इंसेंटिव काफी नहीं। नवाचार, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, कस्टमर ट्रस्ट और मार्केटिंग सालों लगते हैं।
  • एमपीएमएस घरेलू सोर्सिंग, इन-हाउस आरएंडडी और क्षमता निर्माण पर फोकस करता है, जो सही दिशा है।
  • ईवाई इंडिया के सौरभ अग्रवाल कहते हैं कि पिछली स्कीम मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर थीं। एमपीएमएस भारतीय ब्रांड, डिजाइन, आरएंडडी और आईपी क्रिएशन को सीधे सपोर्ट करती है।
  • काउंटरपॉइंट रिसर्च के प्राचिर सिंह के अनुसार असेंबली से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन, कंपोनेंट लोकललाइजेशन, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और मजबूत आरएंडडी जरूरी है।