Published: Thursday, September 17, 2026, 12:32 [IST]
IPS officer Bushra Bano: पश्चिम बंगाल की IPS अधिकारी बुशरा बानो इन दिनों एक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। यूपीएससी कोचिंग का जिक्र करते हुए बनाए गए उनके वीडियो पर दक्षिणपंथी संगठन ने आपत्ति जताई। इसके बाद उनके तबादले ने राजनीतिक बहस छेड़ दी। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं बुशरा बानो, जिन्होंने सऊदी अरब की नौकरी छोड़कर यूपीएससी का सफर तय किया और दो बार सिविल सेवा परीक्षा पास की? और ये भी जानेंगे कि पूरा मामला क्या है।
IPS ऑफिसर बुशरा बानो पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर में एडिशनल SP के तौर पर पोस्टेड थीं, उनका ट्रांसफर SAP 4th बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर किया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन में दो और पश्चिम बंगाल पुलिस सर्विस (WBPS) ऑफिसर्स के ट्रांसफर का भी ज़िक्र है।
'अस्सलाम वालेकुम' वाले वीडियो पर क्यों हुआ विवाद?
बुशरा बानो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की मुफ्त यूपीएससी कोचिंग के बारे में अपने अनुभव साझा करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में उन्होंने अपनी बात की शुरुआत 'अस्सलाम वालेकुम' से की। बातचीत के दौरान 'इंशाअल्लाह' और अंत में 'जज़ाकल्लाह' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
वीडियो में बुशरा ने बताया कि वह 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और खड़गपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थीं। उन्होंने यह भी बताया कि सऊदी अरब से लौटने के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी। शुरुआती दौर में वह खुद पढ़ाई करती थीं। बाद में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी यानी आरसीए से उन्हें काफी मदद मिली। उन्होंने अकादमी की लाइब्रेरी की भी तारीफ की और कहा कि वह अपना अनुभव इसलिए साझा कर रही हैं, ताकि दूसरे अभ्यर्थियों को भी फायदा मिल सके।
वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने धार्मिक अभिवादन के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर यह तर्क दिया गया कि सरकारी अधिकारी को सार्वजनिक संवाद में 'जय हिंद' या 'वंदे मातरम' जैसे राष्ट्रीय संबोधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। इसी बहस के बीच मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।

हिंदू लीगल फंड ने की शिकायत, क्या उठाए सवाल?
दक्षिणपंथी संगठन हिंदू लीगल फंड ने इस वीडियो को लेकर पश्चिम बंगाल के गृह सचिव से शिकायत की। संगठन ने आपत्ति जताई कि बुशरा बानो ने वीडियो की शुरुआत 'अस्सलाम वालेकुम' से की, बीच में 'इंशाअल्लाह' कहा और अंत में 'जजाकल्लाह' का इस्तेमाल किया।
संगठन की सोशल मीडिया पोस्ट में सवाल उठाया गया, "एक सरकारी पुलिस अधिकारी को सार्वजनिक संवाद में धार्मिक अभिवादन और शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं, इस मामले की समीक्षा होनी चाहिए। सरकारी अधिकारी को सार्वजनिक संदेशों में तटस्थता बनाए रखनी चाहिए।"
शिकायत में यह भी कहा गया कि वीडियो में 'वंदे मातरम' या 'जय हिंद' का इस्तेमाल नहीं किया गया। हालांकि किसी अभिवादन का इस्तेमाल अपने आप में सरकारी नियमों के उल्लंघन का प्रमाण है या नहीं, यह अलग कानूनी और प्रशासनिक सवाल है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने किया तबादला, क्या है पूरा मामला?
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक 14 सितंबर 2026 को जारी पश्चिम बंगाल सरकार की अधिसूचना में बुशरा बानो के तबादले का जिक्र है। वह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थीं। अब उन्हें एसएपी की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट बनाया गया है। इसी अधिसूचना में पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा के दो अन्य अधिकारियों के तबादले की भी जानकारी है।
तबादले और वायरल वीडियो के बीच संबंध को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। हालांकि ट्रांसफर के निर्देश में सरकार ने यह नहीं कहा है कि बुशरा बानो का तबादला उनके वीडियो या शिकायत के कारण किया गया है। इसलिए दोनों घटनाओं के बीच सीधा कारणात्मक संबंध स्थापित करना अभी जल्दबाजी होगी।
तृणमूल कांग्रेस की कृष्णानगर सांसद महुआ मोइत्रा ने इस मामले पर सरकार को घेरा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "अस्सलाम वालेकुम और इंशाअल्लाह कहने पर किसी मुस्लिम आईपीएस अधिकारी का तबादला करना हास्यास्पद है। यह नफरत और धार्मिक कट्टरता से प्रभावित माहौल की चिंता पैदा करता है।"
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने दावा किया कि एक टीवी चैनल ने वीडियो को सनसनीखेज तरीके से पेश किया, जिसके बाद अधिकारी को ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनका साथ देने के बजाय अगले ही दिन तबादला कर दिया। यह उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती।

कौन हैं बुशरा बानो?
बुशरा बानो का सफर उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के सौरिख गांव से शुरू हुआ। बचपन से ही पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी थी। उनके बारे में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह महज चार साल की उम्र में दूसरी कक्षा में पढ़ने लगी थीं। स्कूल में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा। उन्होंने ऐसे दौर में गणित से बीएससी की पढ़ाई पूरी की, जब उनके गांव में लड़कियों की उच्च शिक्षा को लेकर जागरूकता काफी कम थी।
इसके बाद उन्होंने एमबीए किया। बताया जाता है कि 20 साल की उम्र से पहले ही उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी कर ली थी। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का रुख किया। यहां उन्होंने पीएचडी के लिए दाखिला लिया। इसी दौरान उन्होंने नेट-जेआरएफ परीक्षा भी पास की।
दो बार यूपीएससी पास किया, दूसरी कोशिश में बनीं IPS
बुशरा बानो का यूपीएससी सफर कई मोड़ से गुजरा। उन्होंने पहली बार 2018 में सिविल सेवा परीक्षा पास की और 277वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के बाद उन्हें भारतीय रेलवे यातायात सेवा आवंटित हुई। इसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी। वर्ष 2021 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 234वीं रैंक हासिल की। इस बार उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ और उन्हें पश्चिम बंगाल कैडर मिला।
उनके सफर की एक खास बात यह भी बताई जाती है कि यूपीएससी इंटरव्यू के समय वह गर्भवती थीं। उस वक्त वह अपने दूसरे बच्चे की मां बनने वाली थीं। पारिवारिक जिम्मेदारियों और पहले से मौजूद पेशेवर अनुभवों के बीच उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और आखिरकार आईपीएस बनने का सपना पूरा किया।
SDM से IPS अधिकारी तक, अब तबादले पर बहस
आईपीएस बनने से पहले बुशरा बानो उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में उपजिलाधिकारी यानी एसडीएम के तौर पर भी काम कर चुकी थीं। पश्चिम बंगाल कैडर मिलने के बाद उन्होंने पुलिस सेवा में जिम्मेदारियां संभालीं। हुगली ग्रामीण क्षेत्र में एएसपी के तौर पर काम करने के बाद उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर के खड़गपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी मिली।
अब उनके तबादले के बाद बहस सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठ रहा है कि सरकारी अधिकारियों के सार्वजनिक संवाद में धार्मिक अभिवादन के इस्तेमाल को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर किसी अधिकारी के तबादले को किसी खास शिकायत से जोड़ने के लिए आधिकारिक वजह और ठोस दस्तावेज जरूरी होते हैं।
बुशरा बानो के मामले में फिलहाल इतना साफ है कि वीडियो को लेकर शिकायत हुई और 14 सितंबर की अधिसूचना में उनका तबादला दर्ज है। लेकिन तबादले की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस पूरे मामले को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले सरकार का पक्ष और संबंधित दस्तावेज देखना जरूरी होगा।