Jul 31, 2026 04:16 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
पंजाब की जनदीप कौर तिवाना नौकरी के साथ रात में पढ़ाई करके यूपीएससी में 147वीं रैंक लाईं, अब उनकी वायरल तस्वीरों से चर्चा में हैं।

आईपीएस जनदीप कौर तिवाना
ips jandeep kaur tiwana success story: समुद्र किनारे की कुछ तस्वीरें, चेहरे पर आत्मविश्वास से भरी मुस्कान और सोशल मीडिया पर लाइक-कमेंट की झड़ी... बस इतना ही काफी था IPS अफसर जनदीप कौर तिवाना को रातों-रात चर्चा में लाने के लिए। पिछले कुछ दिनों से उनकी खूबसूरत तस्वीरें इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही हैं, और लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। लेकिन जैसे-जैसे उनके फोटो शेयर होते गए, वैसे-वैसे उनकी असली कहानी भी सामने आने लगी - और यही कहानी असल में दिलचस्प है। यह सिर्फ खूबसूरती की बात नहीं, बल्कि एक ऐसी लड़की के जज्बे की दास्तान है जिसने दिन में दफ्तर की फाइलें निपटाईं और रात में किताबों के सहारे अपना सपना बुना।
जनदीप कौर इन दिनों तेलंगाना के हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर रही हैं। वे मूल रूप से पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले की रहने वाली हैं। उनका गांव है चनार्थल खुर्द है जहां वे पली-बढ़ीं और दसवीं तक की पढ़ाई भी वहीं से पूरी की। इसके बाद उन्होंने थापर यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रुमेंटेशन एंड कंट्रोल में बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद बहुत से लोग नौकरी की तलाश में लग जाते हैं पर जनदीप के दिमाग में तभी से देश की सबसे कठिन परीक्षा यानी यूपीएससी घूमने लगी थी।
मंजिल था आईपीएस बनना
शुरुआत आसान नहीं रही। बिना किसी खास तैयारी के उन्होंने पहली बार यूपीएससी का इम्तिहान दिया, मगर नतीजा उनके हक में नहीं आया। यह झटका किसी को भी तोड़ सकता था लेकिन जनदीप ने हार मानने के बजाय रास्ता बदला। 2018 में उन्होंने एसएससी सीजीएल परीक्षा दी और पूरे देश में 68वीं रैंक हासिल करके इनकम टैक्स इंस्पेक्टर बन गईं। नौकरी अच्छी थी, स्थिरता भी थी, मगर मन कहीं और था। असली मंजिल तो आईपीएस बनना था, और यही वजह थी कि उन्होंने यूपीएससी की तैयारी कभी छोड़ी नहीं।
यूट्यूब पर लेक्चर सुनना बनाई आदत
दिलचस्प बात यह है कि इनकम टैक्स विभाग में काम करते हुए जब उनका सामना आईआरएस अधिकारियों से हुआ, तो वहीं से उन्हें दोबारा यूपीएससी की तैयारी में जुटने की प्रेरणा मिली। मगर दिक्कत यह थी कि दिन भर दफ्तर की ड्यूटी निभानी होती थी, ऐसे में ऑफलाइन कोचिंग जॉइन करना मुमकिन नहीं था। जनदीप ने इसका भी तोड़ निकाल लिया। उन्होंने पूरे सिलेबस को पांच से छह हिस्सों में बांट डाला और रात के समय यूट्यूब और तमाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से पढ़ाई शुरू कर दी। हर रात दफ्तर से थकी-हारी लौटने के बाद भी किताबों से नाता नहीं तोड़ा, यूट्यूब पर लेक्चर सुनना और नोट्स बनाना उनकी रोज की आदत बन गई।
रंग लाई मेहनत
मेहनत आखिरकार रंग लाई। यूपीएससी 2024 की परीक्षा में जनदीप कौर तिवाना ने ऑल इंडिया 147वीं रैंक हासिल की और आईपीएस अधिकारी बनने का अपना सपना साकार कर दिखाया। नौकरी करते हुए, बिना कोचिंग के, सिर्फ रात के घंटों में पढ़ाई करके यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था, लेकिन जनदीप ने साबित कर दिया कि अगर इरादा पक्का हो तो हालात कोई भी हों, मंज़िल दूर नहीं रहती।
आज जब उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, तो लोग सिर्फ उनकी खूबसूरती की तारीफ नहीं कर रहे, बल्कि उनके संघर्ष को भी सलाम कर रहे हैं। नौकरी और पढ़ाई के बीच तालमेल बिठाना, बार-बार असफलता के बाद भी हिम्मत न हारना और आखिरकार अपने दम पर मंजिल तक पहुंचना, जनदीप कौर तिवाना की यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए मिसाल बन गई है जो नौकरी करते हुए बड़े सपने देखने से डरते हैं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwari
शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव
