ITR फाइलिंग की डेडलाइन नजदीक: पोर्टल में आ रही दिक्कतों से कैसे निपटें?

Published on 29 अग॰ 2026

Published: Saturday, August 29, 2026, 13:25 [IST]

सोमवार, 31 अगस्त को आईटीआर (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख है, लेकिन इससे ठीक पहले टैक्सपेयर्स को लॉगिन, फाइलिंग और पेमेंट में तकनीकी खामियों (ग्लिच) का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती दिक्कतों को देखते हुए इनकम टैक्स विभाग ने अपने हेल्पडेस्क को 31 अगस्त की रात 23:59 बजे तक 24x7 चालू रखने का फैसला किया है। इसके लिए टोल-फ्री नंबर 1800 103 0025 और 1800 419 0025 एक्टिव कर दिए गए हैं। हालांकि, शनिवार 29 अगस्त तक अधिकारियों की ओर से नॉन-ऑडिट करदाताओं के लिए डेडलाइन बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की गई है।

तकनीकी दिक्कतों से बचने के आसान उपाय: हर सेक्शन भरने के बाद डेटा 'Save as draft' करते रहें, ताकि पोर्टल क्रैश होने पर आपकी मेहनत बेकार न जाए। फाइलिंग के लिए अर्ली मॉर्निंग या लेट नाइट जैसे ऑफ-पीक आवर्स चुनें। अगर एक तरीके से लॉगिन न हो, तो दूसरा तरीका ट्राई करें। टैक्स भुगतान के लिए e-Pay Tax के जरिए पेमेंट गेटवे, UPI, नेट बैंकिंग या RTGS/NEFT का इस्तेमाल करें। अगर आपके बैंक अकाउंट से पैसे कट गए हैं लेकिन स्टेटस पेंडिंग दिख रहा है, तो पेमेंट हिस्ट्री या OLTAS से चालान या CSI डाउनलोड करें और पूरी जानकारी के साथ ग्रीवांस (शिकायत) टिकट दर्ज करें।

ITR Filing Deadline 2026: How to Handle Portal Glitches and E-Verification Rules for AY 2026-27

ITR पोर्टल में आ रही खराबी और 24x7 हेल्पलाइन: अब क्या करें?

ई-वेरिफिकेशन (e-verification) की 30 दिन की समयसीमा को न भूलें। अगर आप 31 अगस्त को आईटीआर भरते हैं, तो अपनी फाइलिंग डेट बरकरार रखने के लिए 30 सितंबर तक इसे वेरिफाई जरूर कर लें। अगर आप 30 दिनों के बाद वेरिफाई करते हैं, तो जिस दिन वेरिफिकेशन होगा उसी दिन को फाइलिंग की तारीख माना जाएगा। ऐसे में समय पर आईटीआर भरने के बावजूद आप पर लेट फीस, ब्याज या घाटे को आगे ले जाने (loss carry-forward) के नुकसान जैसी दिक्कतें आ सकती हैं।

सुविधा / नियमनई कर व्यवस्था (AY 2026-27)पुरानी कर व्यवस्था
डिफ़ॉल्ट स्थिति (Default status)बाय डिफ़ॉल्ट लागू; बाहर निकलने (opt out) की छूटवैकल्पिक (चुनने पर ही लागू)
स्टैंडर्ड डिडक्शन (वेतनभोगी)₹75,000₹50,000
धारा 87A के तहत छूट (Rebate)₹60,000 तक (यदि टैक्स योग्य आय ≤ ₹12 लाख)₹12,500 तक (यदि टैक्स योग्य आय ≤ ₹5 लाख)
शून्य कर सीमा (Nil rate threshold)₹4 लाख तक₹2.5–3 लाख तक (उम्र के आधार पर)
कटौती और छूट (Deductions/Exemptions)सीमित सूचीसभी छूट और कटौतियां लागू

नई कर व्यवस्था चुनने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एक आसान उदाहरण: मान लीजिए आपकी सालाना सैलरी ₹12.6 लाख है। इसमें से ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद टैक्स योग्य आय ₹11.85 लाख बचती है। स्लैब के हिसाब से ₹4-8 लाख पर ₹20,000 और ₹8-11.85 लाख पर ₹38,500 का टैक्स बनता है, जो कुल मिलाकर ₹58,500 होता है। चूंकि ₹12 लाख तक की टैक्स योग्य आय पर धारा 87A के तहत ₹60,000 तक की रिबेट मिलती है, इसलिए आपका कुल टैक्स शून्य (जीरो) हो जाएगा और कोई सेस भी नहीं लगेगा।

शनिवार 29 अगस्त तक 31 अगस्त की ITR डेडलाइन बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इसलिए सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड हो रहे मैसेज के बजाय आयकर पोर्टल के 'Latest News' सेक्शन पर ही भरोसा करें। अगर पोर्टल में समस्या बनी रहती है, तो 24x7 हेल्पडेस्क से संपर्क करें, ऑफ-पीक आवर्स में फाइल करें और 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें। इसके अलावा, पेमेंट सिंक होने में समय लगने की स्थिति के लिए अपने चालान का प्रूफ संभालकर रखें।

Story first published: Saturday, August 29, 2026, 13:25 [IST]

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