jail manual new rules: बिहार की जेलों में बदले नियम, मोबाइल मिलने पर 3 साल की सजा और हिंसा पर बंद होगी पैरोल - Haribhoomi

Published on 14 अग॰ 2026

बिहार सरकार ने जेल मैनुअल में बड़े बदलाव किए हैं। जेल में हिंसा करने पर पैरोल बंद होगी और मोबाइल मिलने पर 3 साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है।

Bihar jail manual new rules

बिहार सरकार ने जेल मैनुअल में बड़े बदलाव किए हैं। (Ai Image)

  • Published: 14 Aug 2026, 04:22 PM IST
  • Last Updated: 14 Aug 2026, 04:22 PM IST

Bihar jail manual new rules: बिहार के कारागारों में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार ने जेल मैनुअल में कड़े बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत अब जेल के भीतर कैदियों को नियंत्रित करने के लिए पुरानी शारीरिक सजाओं जैसे हथकड़ी और डंडा-बेड़ी लगाने के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब कैदियों के विशेषाधिकारों और सुविधाओं पर प्रहार किया जाएगा।

अगर कोई बंदी जेल परिसर के भीतर मारपीट, तोड़फोड़ या किसी प्रकार की अव्यवस्था फैलाता है, तो उसके खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नए प्रावधानों के अनुसार, ऐसे अनुशासनहीन कैदियों को मिलने वाली कैंटीन और मनोरंजन की सुविधाएं एक महीने के लिए पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी। साथ ही उन्हें एक साल तक के लिए पैरोल का लाभ भी नहीं मिलेगा।

परिजनों से मिलने पर पाबंदी और परिहार की जब्ती
कैदियों द्वारा किए जाने वाले अपराध या उपद्रव की गंभीरता को देखते हुए सजा तय की जाएगी। नए नियमों के दायरे में कैदियों के परिजनों और अन्य आगंतुकों से मिलने-जुलने पर एक महीने की रोक लगाई जा सकती है, हालांकि इसमें वकीलों से मिलने की छूट शामिल होगी।

इसके अतिरिक्त, कैदियों के अब तक कमाए गए अर्जित परिहार (जेेल की सजा में छूट) को जब्त किया जा सकता है और अगले तीन महीनों तक उन्हें परिहार का लाभ देने पर रोक लग सकती है। नए जेल मैनुअल में यह भी प्रावधान किया गया है कि अनुशासनहीनता करने वाले बंदियों को सामान्य कैदियों से अलग यानी पृथक कारावास में रखा जाएगा। इन तमाम व्यवस्थाओं के लिए संबंधित काराधीक्षक (Jail Superintendent) को जेल के अंदर अनुशासन बनाए रखने के वास्ते पूरी तरह उत्तरदायी बनाया गया है।

मोबाइल मिलने पर होगी 3 साल की सजा, अपराध होगा गैर-जमानती
जेल के अंदर प्रतिबंधित वस्तुओं के इस्तेमाल पर नकेल कसते हुए नियमों को बेहद सख्त बना दिया गया है। यदि किसी कैदी, आगंतुक या जेल के ही किसी कर्मचारी के पास से मोबाइल फोन या कोई अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद होता है, तो उन्हें भारी परिणाम भुगतने होंगे।

मददगारों या ऐसे उपकरणों की आपूर्ति करने वालों को भी दो साल तक की सजा मिल सकती है। मजिस्ट्रेट के समक्ष दोष साबित होने पर आरोपी को तीन साल तक की कैद या 25 हजार रुपये का जुर्माना अथवा दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। ये सभी नए अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) श्रेणी के होंगे।

अगर कोई सजायाफ्ता कैदी इन नियमों को तोड़ते हुए दोबारा दोषी पाया जाता है, तो उसे मिलने वाली अतिरिक्त सजा उसकी वर्तमान सजा पूरी होने के बाद शुरू होगी। बार-बार नियम तोड़ने पर जेल अधीक्षक इसकी सूचना सक्षम न्यायिक दंडाधिकारी को देंगे, जिनकी अदालत में सुनवाई के बाद सजा तय होगी।

पुराने और नए दंडात्मक प्रावधानों में अंतर
पूर्व की व्यवस्था में जेल के नियम तोड़ने पर कैदियों को शारीरिक दंड दिए जाते थे, जिसमें 48 घंटे से अधिक समय के लिए हथकड़ी लगाना, 15 दिनों तक कठोर श्रम में बदलाव करना, 15 दिनों तक हथकड़ी लगाना, परिहार की जब्ती और असाधारण परिस्थितियों में 30 दिन तक डंडा-बेड़ी का इस्तेमाल शामिल था।

अब इन्हें पूरी तरह बदलते हुए आधुनिक और सुधारात्मक प्रशासनिक दंड लागू किए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • कैंटीन और मनोरंजन सुविधाओं पर एक महीने की रोक।
  • तीन महीने तक के अर्जित परिहार की जब्ती और उस पर रोक।
  • एक साल की अवधि के लिए पैरोल सुविधा का निलंबन।
  • वकीलों को छोड़कर सभी आगंतुकों से एक महीने तक मिलने पर पाबंदी।
  • एक महीने से अधिक समय के लिए पृथक कारावास में रखना।