खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध झारखंड में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने हवाई नेटवर्क को मजबूत करने का बड़ा खाका तैयार किया है। रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट और देवघर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शानदार सफलता के बाद अब राज्य के अन्य प्रमुख औद्योगिक व रणनीतिक केंद्रों को हवाई नक्शे पर लाने की तैयारी है। इसी कड़ी में पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ में करीब 540 एकड़ भूमि पर एक आधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की प्रक्रिया ने तेज गति पकड़ ली है। इसके साथ ही संताल परगना के गंगा तटीय जिले साहिबगंज में भी नए एयरपोर्ट के विकास के लिए भूमि चयन और तकनीकी सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। इन दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से पूरे झारखंड में अंतरराज्यीय और क्षेत्रीय हवाई संपर्क का एक नया युग शुरू होगा।
द्वितीय विश्व युद्ध के ऐतिहासिक एयरस्ट्रिप पर 540 एकड़ में संवरेगा धालभूमगढ़ एयरपोर्ट
पूर्वी सिंहभूम के धालभूमगढ़ में बनने वाला हवाई अड्डा कोई पूरी तरह नई जमीन नहीं है, बल्कि यहां द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय का एक ऐतिहासिक मिलिट्री एयरस्ट्रिप पहले से मौजूद है। अंग्रेजों के जमाने में सामरिक महत्व के लिए बनाए गए इस रनवे को अब एक अत्याधुनिक नागरिक हवाई अड्डे (Civil Enclave) के रूप में पुनर्विकसित किया जा रहा है। परियोजना के लिए चिन्हित लगभग 540 एकड़ भूमि पर आधुनिक पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग, एटीसी टावर, फायर स्टेशन और कम से कम 2.5 से 3 किलोमीटर लंबा रनवे तैयार करने की योजना है। इस रनवे की लंबाई इतनी रखी जा रही है ताकि यहां न केवल छोटे 72-सीटर एटीआर (ATR) विमान उतर सकें, बल्कि भविष्य में एयरबस A320 और बोइंग 737 जैसे बड़े कमर्शियल जेट्स का संचालन भी बिना किसी अड़चन के हो सके। वन और पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) से जरूरी एनओसी और क्लीयरेंस की बाधाओं को दूर करते हुए निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है।
जमशेदपुर के उद्योगपतियों, व्यापारियों और टाटा स्टील हब को मिलेगा सबसे बड़ा संबल
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का निर्माण लौहनगरी जमशेदपुर (टाटा नगर) के लिए जीवनरेखा साबित होगा। वर्तमान में जमशेदपुर के सोनारी में स्थित छोटा एयरस्ट्रिप सीमित रनवे लंबाई और घनी आबादी के बीच घिरे होने के कारण बड़े कमर्शियल विमानों के लिए उपयुक्त नहीं है। जमशेदपुर, चांडिल और घाटशिला के उद्योगपतियों, कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव्स और स्थानीय निवासियों को कोलकाता या दिल्ली जाने के लिए 130 किलोमीटर दूर रांची या 250 किलोमीटर दूर कोलकाता एयरपोर्ट का रुख करना पड़ता है। धालभूमगढ़ जमशेदपुर शहर से नेशनल हाईवे-18 और एनएच-49 के जरिए महज 45 से 50 मिनट की सुगम दूरी पर स्थित है। इस एयरपोर्ट के शुरू होने से टाटा स्टील, ऑटोमोबाइल क्लस्टर्स, एमएसएमई यूनिट्स और तांबा खनन उद्योग से जुड़े देशी-विदेशी निवेशकों का आवागमन बेहद तेज और आसान हो जाएगा।
संताल परगना और पूर्वी भारत का मल्टी-मॉडल हब बनेगा साहिबगंज एयरपोर्ट
धालभूमगढ़ के साथ-साथ राज्य सरकार का फोकस बिहार और बंगाल की सीमा से सटे साहिबगंज जिले में भी एक नया एयरपोर्ट विकसित करने पर है। साहिबगंज पहले से ही गंगा नदी पर बने देश के दूसरे मल्टी-मॉडल इनलैंड वाटरवे टर्मिनल (Multi-Modal Terminal) के कारण राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) का सबसे प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां रेल, जल और सड़क मार्ग की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी पहले से मौजूद है। अब साहिबगंज में हवाई अड्डे के जुड़ जाने से यह इलाका उत्तर-पूर्वी भारत और पश्चिम बंगाल के मालदा-मुर्शिदाबाद क्षेत्र के लिए एक विशाल मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरेगा। पत्थर उद्योग, कृषि उत्पादों और हस्तशिल्प से जुड़े स्थानीय कारोबारियों को राष्ट्रीय मंडियों तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे संताल परगना के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।
उड़ान (UDAN) योजना के तहत सस्ती उड़ानों और नए रूट्स का रोडमैप
केंद्र सरकार की 'उड़े देश का आम नागरिक' यानी उड़ान (UDAN) रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत इन दोनों नए एयरपोर्ट्स को टियर-1 और टियर-2 महानगरों से सीधे जोड़ा जाएगा। शुरुआती योजना के तहत धालभूमगढ़ से कोलकाता, नई दिल्ली, भुवनेश्वर, पटना और बेंगलुरु के लिए सीधी फ्लाइट्स शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वहीं साहिबगंज से रांची, पटना, सिलीगुड़ी (बागडोगरा) और गुवाहाटी जैसे पूर्वी शहरों के लिए 40 से 72 सीटर रीजनल विमानों के संचालन की रूपरेखा बनाई जा रही है। उड़ान स्कीम के तहत सब्सिडाइज्ड किराए पर टिकट मिलने से आम मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी हवाई सफर किफायती और सुलभ बन सकेगा।
झारखंड के पर्यटन, धार्मिक स्थलों और खनिज अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई
हवाई कनेक्टिविटी केवल यात्रा का समय ही नहीं घटाती, बल्कि पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था का चेहरा बदल देती है। धालभूमगढ़ के बनने से घाटशिला का प्राकृतिक सौंदर्य, धारागिरी जलप्रपात, जादूगोड़ा और दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी में ईको-टूरिज्म को जबर्दस्त बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह साहिबगंज एयरपोर्ट के शुरू होने से विदेशी पर्यटकों के लिए ऐतिहासिक तेलियागढ़ी किला, राजमहल की प्राचीन पहाड़ियां और विश्व धरोहर जीवाश्म (Fossils Park) तक पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा। यह नया एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर झारखंड को पूर्वी भारत के एक प्रमुख आर्थिक, लॉजिस्टिक और टूरिज्म पावरहाउस के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।