Jharkhand Crime News : नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी को उम्रकैद, 50 हजार जुर्माना; पीड़िता को 2 लाख मुआवजे का आदेश

Published on 17 सित॰ 2026

Jharkhand Crime News : जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने सुनाया फैसला, डालसा को भी भेजी गई फैसले की प्रति

Jharkhand Crime News : नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में अदालत ने दोषी अभियुक्त गौरांग राय को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है और पीड़िता को दो लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला सत्र वाद संख्या 100/2010 से संबंधित है।

Jharkhand Crime News : नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के एक पुराने मामले में अदालत ने दोषी अभियुक्त गौरांग राय को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद अभियुक्त को दोषी करार देते हुए जीवनभर कारावास में रहने की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

न्यायालय ने पीड़िता के पुनर्वास और सहायता को ध्यान में रखते हुए उसे दो लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का भी आदेश दिया है। मामले से संबंधित फैसले की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकार यानी डालसा को भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि पीड़िता को लागू कानूनी प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

यह मामला सत्र वाद संख्या 100/2010 से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत तथ्यों और सुनवाई के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त गौरांग राय को दोषी पाया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376-2(g) तथा 386 भादवि समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत अभियुक्त को दोषी ठहराया।

दोषसिद्धि के बाद अदालत ने अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई। फैसले में स्पष्ट किया गया कि अभियुक्त को जीवनभर कारावास में रहना होगा। इसके अतिरिक्त उस पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है।

मामले के घटनाक्रम के अनुसार, घटना के बाद नाबालिग पीड़िता अपने पिता के साथ परीक्षा देने के लिए पटना से बस के माध्यम से रांची जा रही थी। इसी दौरान चुनाव के कारण बस को रामगढ़ में ही रोक दिया गया। यात्रा बाधित होने के बाद पीड़िता और उसके पिता को रामगढ़ में एक होटल में रुकना पड़ा।

बताया गया है कि जिस होटल में पीड़िता और उसके पिता ठहरे थे, उसके संचालक की अभियुक्त गौरांग राय से परिचित होने की बात सामने आई थी। इसी घटनाक्रम के दौरान नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना का आरोप सामने आया।

मामले में पीड़िता की ओर से दिए गए आवेदन के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और बाद में मामला न्यायालय तक पहुंचा। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया है।

किसी भी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होती है। इस मामले में भी अदालत ने सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अभियुक्त को दोषी माना।

न्यायालय के फैसले के बाद अभियुक्त को उम्रकैद की सजा दी गई। साथ ही जुर्माने की राशि निर्धारित की गई और पीड़िता को मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।

यह फैसला ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष के लिए न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका को भी रेखांकित करता है। हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के फैसले के आधार पर ही माना जाता है।

अदालत ने केवल दोषी को सजा देने तक ही फैसला सीमित नहीं रखा, बल्कि पीड़िता को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया है। न्यायालय ने दो लाख रुपये के मुआवजे का निर्देश दिया है।

मामले की फैसले की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) को भी उपलब्ध कराई गई है। इसका उद्देश्य पीड़िता को झारखंड विक्टिम कंपनसेशन अधिनियम के तहत मिलने वाली सहायता और मुआवजे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।

पीड़ितों को मुआवजा उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि अपराध के बाद पीड़ित के पुनर्वास और आवश्यक सहयोग की प्रक्रिया को मजबूत करना भी है।

सत्र वाद संख्या 100/2010 से जुड़े इस मामले में फैसला आने में लंबा समय लगा। पुराने आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्य, गवाहों की सुनवाई और अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाता है। ऐसे में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद सुनाया जाता है।

इस मामले में अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के साथ ही पीड़िता को मुआवजा दिए जाने का निर्देश भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। फैसले की प्रति डालसा को भेजे जाने से अब मुआवजा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता भी साफ हुआ है।

अदालत के इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष को न्यायिक व्यवस्था से राहत और विश्वास मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से लंबित मामले में दोषसिद्धि और सजा के साथ पीड़िता के लिए मुआवजे का आदेश भी दिया गया है।

नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ पीड़ित की पहचान और गरिमा की रक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग करते समय मीडिया और समाज की जिम्मेदारी होती है कि पीड़िता की पहचान उजागर न हो और घटना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने अभियुक्त गौरांग राय को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा, 50 हजार रुपये जुर्माना और पीड़िता को दो लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने फैसले की प्रति डालसा को भी उपलब्ध कराई है, जिससे पीड़िता को झारखंड विक्टिम कंपनसेशन अधिनियम के तहत उचित सहायता दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत सामने आया है और इसमें अदालत द्वारा मामले के तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद दोषसिद्धि की गई है।