Kriti Sanon Raksha Bandhan advertisement: कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर उनके कपड़ों और डॉग को राखी बांधने पर विवाद हुआ। अब इस पर प्रियंका चोपड़ा की मां ने भी चुप्पी तोड़ी है।
बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन के रक्षाबंधन वाले विज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब लगातार बढ़ता जा रहा है। विज्ञापन में कृति के आउटफिट और एक डॉग को राखी बांधने वाले सीन को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे थे। इसी विवाद के बीच अब प्रियंका चोपड़ा की मां मधु चोपड़ा ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने जहां कृति के कपड़ों को लेकर अपनी बात कही, वहीं अपनी बेटी प्रियंका चोपड़ा के बोल्ड आउटफिट्स का भी बचाव किया।
कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर क्या है विवाद?
रक्षाबंधन के मौके पर ज्वेलरी ब्रांड के लिए बनाए गए एक विज्ञापन में कृति सेनन नजर आई थीं। विज्ञापन में एक मॉडर्न इंडो-वेस्टर्न लुक में कृति को अपने भाई और पेट डॉग को राखी बांधते हुए दिखाया गया था। विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया के एक वर्ग ने कृति के पहनावे को लेकर आपत्ति जताई। कुछ लोगों का कहना था कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार के विज्ञापन में इस तरह की ड्रेसिंग उपयुक्त नहीं है। डॉग को राखी बांधने वाला सीन भी कई लोगों को पसंद नहीं आया। विवाद इतना बढ़ा कि बाद में ब्रांड ने विज्ञापन को हटा दिया। इसके बाद यह मामला सिर्फ कृति के आउटफिट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के कपड़ों, संस्कृति और व्यक्तिगत पसंद को लेकर बड़ी बहस में बदल गया।
और पढ़ें - बॉलीवुड की 11 भाई-बहन जोड़ियां, शाहरुख-ऐश्वर्या से आलिया-वेदांग तक, जो आज भी आइकॉनिक
मधु चोपड़ा ने कृति के मामले पर क्या कहा?
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, मधु चोपड़ा ने कृति के आउटफिट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि व्यक्तिगत पसंद अपनी जगह है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में एक सीमा का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘My body, my choice’ अपनी जगह सही विचार है, लेकिन हर परिस्थिति और जगह की अपनी संवेदनशीलता होती है। मधु चोपड़ा ने यह भी कहा कि उनके अपने बच्चे भी आधुनिक कपड़े पहनते हैं, लेकिन कुछ चीजों में एक ‘दायरा’ होना चाहिए। उनकी टिप्पणी ने इस पूरे विवाद को एक नया एंगल दे दिया है, क्योंकि अब बहस सिर्फ कृति के विज्ञापन पर नहीं बल्कि पर्सनल चॉइस बनाम सांस्कृतिक संवेदनशीलता पर भी हो रही है।
प्रियंका चोपड़ा के बोल्ड आउटफिट्स पर भी बोलीं मधु चोपड़ा
मधु चोपड़ा से जब प्रियंका चोपड़ा के बोल्ड और ग्लैमरस आउटफिट्स को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने अपनी बेटी का बचाव किया। प्रियंका अपने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड करियर तक कई बार बोल्ड फैशन चॉइस के लिए चर्चा में रही हैं। मधु चोपड़ा का कहना है कि कपड़े पहनने की आजादी अपनी जगह है, लेकिन कपड़ों का चुनाव परिस्थितियों के हिसाब से भी देखा जाना चाहिए। यानी उनका रुख यह नहीं है कि महिलाओं को बोल्ड कपड़े नहीं पहनने चाहिए, बल्कि वह मौके और संदर्भ को महत्वपूर्ण मानती हैं।
और पढ़ें - Toxic मेकर्स ने भेजे लीगल नोटिस? नेगेटिव ऑनलाइन कंटेंट पर कोर्ट की सख्ती, जानिए पूरा मामला
कृति ने भी दिया था आलोचकों को जवाब
इस विवाद पर कृति सेनन ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि किसी त्योहार का महत्व केवल कपड़ों में नहीं, बल्कि उससे जुड़ी भावनाओं और रिश्तों में होता है। कृति ने यह भी सवाल उठाया था कि आखिर कब तक महिलाओं के कपड़ों को उनकी संस्कृति और मूल्यों का पैमाना बनाया जाता रहेगा। उन्होंने रक्षाबंधन को भाई-बहन के बीच प्यार और एक-दूसरे की रक्षा के रिश्ते के तौर पर देखने की बात कही। कृति के मुताबिक, वह और उनकी बहन एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और एक-दूसरे की सुरक्षा और खुशियों की कामना करती हैं। उन्होंने अपने पालतू जानवरों को भी परिवार का हिस्सा बताया था।
कंगना रनौत ने भी की थी कृति के विज्ञापन की आलोचना
कृति सेनन के विज्ञापन पर अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी सवाल उठाए थे। उन्होंने विज्ञापन में कृति की ड्रेसिंग और रक्षाबंधन के पारंपरिक स्वरूप को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद कृति की प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी। हालांकि, इस विवाद में बाद में एक अलग मोड़ तब आया जब कंगना का पुराना रक्षाबंधन विज्ञापन भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इस पर कुछ लोगों ने कंगना पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
विवाद ने खड़ा किया बड़ा सवाल
कृति सेनन के विज्ञापन से शुरू हुई बहस अब एक बड़े सवाल तक पहुंच गई है—क्या किसी महिला के कपड़े उसकी संस्कृति और संस्कार तय कर सकते हैं? एक तरफ लोगों का तर्क है कि पारंपरिक त्योहारों से जुड़े विज्ञापनों में संस्कृति और भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। दूसरी तरफ कृति जैसे सितारों का कहना है कि आधुनिक कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं कि किसी महिला की संस्कृति या भावनाएं कम हो गई हैं। मधु चोपड़ा की प्रतिक्रिया ने भी इसी बहस में एक बीच का रास्ता सामने रखा है—व्यक्तिगत आजादी जरूरी है, लेकिन मौके और संदर्भ की संवेदनशीलता को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फिलहाल कृति सेनन का रक्षाबंधन विज्ञापन भले ही हटा दिया गया हो, लेकिन उससे शुरू हुई यह बहस सोशल मीडिया पर अभी भी जारी है।