Ladki Bahin Yojana: महाराष्‍ट्र की 92 लाख महिलाओं को योजना से किया गया आउट, नहीं मिलेंगे 1500? क्‍या है वजह

Published on 13 जुल॰ 2026

Time Updated: Monday, July 13, 2026, 16:22 [IST]

Ladki Bahin Yojana: महाराष्‍ट्र में 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना' की लाखों महिलाओं को सरकार की ओर से तगड़ा झटका लगा है। ये योजना महाराष्‍ट्र में पिछली एकनाथ शिंदे के प्रतिनिधित्‍व वाली महायुति सरकार में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आनन-फानन में शुरू की गई थी। जिससे चुनाव में भाजपा के प्रतिनिधित्‍व वाले महायुति गठबंधन का महिलाओं का बंपर वोट मिला था। जिसकी बदौलत राज्‍य में दोबारा महायुति की सरकार बनी, लेकिन अब इस योजना में रजिस्‍टर्ड 92 लाख महिलाओं के नाम अचानक हटा दिए गए हैं।

इसके बाद योजना की लाभार्थी इन लाखों महिलाओं के खाते में जो हर महीने सहायता राशि के तौर पर 1500 रुपये पेमेंट आता था वो अब बंद कर दिया जाएगा। आइए समझते हैं आखिर क्‍या है वो वजह जो महाराष्‍ट्र सरकार ने एक साथ 92 लाख महिलाओं को एक झटके में आउट कर दिया है?

Ladki Bahin Yojana

दरअसल, पहले ये अनुमान लगाया गया था कि 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना' की 80 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित कर उनका नाम योजना से हटा दिया गया है लेकिन सरकार ने ये चौंकाने वाली जानकारी साक्षा की कि कुल 92 लाख महिलाओं के नाम हटाए गए है। इस योजना में लाभ प्राप्‍त कर रही महिलाओं के वेरिफिकेशन और e-KYC प्रोसेस के बाद 92 लाख से ज़्यादा महिलाओं के नाम बेनिफिशियरी लिस्ट से हटा दिए गए हैं।

महाराष्‍ट्र के किस जिले से सबसे अधिक महिलाओं के नाम हुए आउट?

'मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना' के तहत महाराश्‍ष्‍ट्र के कई जिलों में 'प्यारी बहनों' (बेनिफिशियरी) के नाम हटाए गए हैं। हालांकि बीड जिले में ऐसी महिलाओं की संख्या खास तौर पर ज़्यादा है। हालांकि, सरकार ने यह भी कहा है कि जिन महिलाओं के नाम गलती से हटा दिए गए थे, उनकी शिकायतों की जांच की जाएगी।

किस आधार पर महिलाओं को किया गया आउट?

मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना शुरू होने के बाद, सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कुछ बदलाव किए और कुछ ज़रूरी प्रक्रियाएं अनिवार्य कर दीं। हालाँकि, जिन महिलाओं ने ज़रूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं कीं-खासकर जो e-KYC की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाईं-उनकी किश्तें रोक दी गईं। यह भी पता चला कि कुछ लाभार्थी महिलाएं योजना की आय सीमा की शर्तों को पूरा नहीं करती थीं।

इसके अलावा, यह भी पता चला कि 12 लाख महिलाओं की सालाना पारिवारिक आय ₹2.5 लाख की सीमा से ज़्यादा थी, जबकि 4,50,000 से ज़्यादा महिलाएं 65 साल से ज़्यादा उम्र की थीं। हैरानी की बात यह है कि पुरुषों ने भी इस स्कीम का फ़ायदा उठाने की कोशिश की! हालांकि जांच के बाद अयोग्य लोगों के नाम हटा दिए गए। रिपोर्टों से पता चलता है कि लिस्ट में 14,000 पुरुषों के नाम थे, जिनके आवेदन बाद में स्क्रीनिंग प्रोसेस के दौरान रिजेक्ट कर दिए गए।

पुरुष भी महिला बन कर ले रहे थे हर महीने 1500 रुपये

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के बाद नई फडणवीस सरकार में महिलाओं को आर्थिक मदद देने के लिए ये योजना जारी रखी गई। शुरूआत से ही इस योजना का लाभ पाने के लिए बड़ी संख्‍या में अपात्र लोगों ने फर्जी दस्‍तावेज के साथ रजिस्‍ट्रेशन करवाकर लाभ लेने लगे। इतना ही नहीं जांच में कुछ पुरुष भी निकले जो इस योजना का लाभ कागजों में हेरा फेरी कर ले रहे थे। लगातार आ रही इन शिकायतों के मद्देनजर महाराष्‍ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने बृहद स्‍तर पर इस योजना का लाभ ले रही महिलाओं का वेरिफिकेशन करवाया और इसके साथ ही ऑनलाइन ई केवाईसी अपडेट का अभियान चलाया।