सोनीपत में लम्पी स्किन डिजीज को लेकर अलर्ट: LUVAS ने जारी की एडवाइजरी, डीसी ने पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील - Gohana News

Published on 22 सित॰ 2026

सोनीपत जिले में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) को लेकर लुवास (LUVAS) ने पशुपालकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें पशुपालकों को सतर्क रहते हुए अपने पशुओं को इस बीमारी से बचाव की सलाह दी गई है। एडवाइजरी में पशुओं में फैलती बीमारी के संकेत और इलाज से स

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इसे लेकर डीसी नेहा सिंह ने भी जिले भर के पशुपालकों से इस बीमारी लेकर सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लम्पी स्किन डिजीज मुख्य रूप से पशुओं में होने वाली संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है। लुवास की गाइडलाइन अपनाकर वे अपने पशुओं को बचा सकते हैं।

गौवंशों में फैलती है ये बीमारी

लुवास विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी मुख्य रूप से गाय और अन्य गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करती है। यह बीमारी मनुष्यों में नहीं फैलती लेकिन पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर बुरा असर डाल सकती है। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।

ये हैं बीमारी के संकेत

लम्पी स्किन डिजीज में आमतौर पर तेज बुखार, त्वचा पर गोल और कठोर गांठें, लसीका ग्रंथियों में सूजन, कमजोरी, भूख कम होना और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर मामलों में पशु की हालत बिगड़ सकती है। लुवास विशेषज्ञों ने पशुपालकों को सलाह दी है कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशु को तुरंत अलग रखें और पशु चिकित्सक की सलाह से उपचार करवाएं। सही नमूने से जांच जरूरी लुवास विशेषज्ञों के अनुसार बीमारी की सही पुष्टि के लिए त्वचा की गांठ, गांठ से प्राप्त सामग्री या पपड़ी का नमूना लेना महत्वपूर्ण है। केवल रक्त या नाक के स्वैब पर निर्भर रहने से कुछ मामलों में वायरस की पहचान नहीं हो पाती। नमूना लेते समय जैव-सुरक्षा एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

लम्पी स्किन डिजीज से ग्रस्त एक गाय।

लम्पी स्किन डिजीज से ग्रस्त एक गाय।

कीट नियंत्रण और स्वच्छता पर जोर लम्पी बीमारी मुख्य रूप से मच्छरों, काटने वाली मक्खियों और टिक्स जैसे खून चूसने वाले कीटों से फैल सकती है। इसलिए पशुशाला एवं आसपास पानी जमा न होने दें, नियमित सफाई एवं कीटाणुशोधन करें तथा कीट नियंत्रण के प्रभावी उपाय अपनाएं। बीमार और स्वस्थ पशुओं के लिए चारा-पानी के बर्तन अलग रखें और पशुओं की अनावश्यक आवाजाही से बचें।

नए पशुओं को 15 दिन रखें अलग लुवास विशेषज्ञों ने पशुपालकों से अपील की है कि नए पशुओं को लगभग 15 दिन अलग रखकर निगरानी करें। स्वस्थ एवं टीकाकरण के योग्य पशुओं का एलएसडी के विरुद्ध टीकाकरण पशुपालन विभाग के वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार करवाएं। बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक या संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें।