Published: Friday, October 2, 2026, 15:59 [IST]
Monalisa: महाकुंभ से वायरल होकर देशभर में पहचान बनाने वाली मोनालिसा भोंसले एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनकी उम्र और जन्मतिथि से जुड़ा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने मोनालिसा को नाबालिग घोषित करने वाले नगर पालिका के आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति की उम्र को लेकर फैसला करने से पहले उसे अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया जाना जरूरी है।
मोनालिसा को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है
इस फैसले के बाद मोनालिसा को बड़ी राहत मिली है। हालांकि कोर्ट ने ये तय नहीं किया है कि उनकी वास्तविक जन्मतिथि क्या है। अदालत ने संबंधित पक्ष को मोनालिसा का पक्ष सुनने के बाद उनके पिता की ओर से दिए गए आवेदन पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।
क्या है मोनालिसा की उम्र से जुड़ा पूरा विवाद?
-मोनालिसा की जन्मतिथि को लेकर विवाद उस समय सामने आया, जब महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने 31 मार्च 2026 को एक आदेश जारी किया। इस आदेश में उनके रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि में बदलाव करते हुए उन्हें नाबालिग माना गया था।
-पहले उपलब्ध रिकॉर्ड में मोनालिसा की जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज बताई गई थी जबकि बाद में इसे बदलकर 30 दिसंबर 2009 किए जाने की बात सामने आई। इसी बदलाव को लेकर विवाद शुरू हुआ और मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
-मोनालिसा की ओर से अदालत में ये दलील दी गई कि उनकी उम्र से संबंधित पुराने दस्तावेजों में लगातार 1 जनवरी 2008 की जन्मतिथि दर्ज रही है। ऐसे में नगर पालिका की ओर से बाद में रिकॉर्ड में बदलाव किए जाने पर सवाल उठाए गए।
कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
-मामले की सुनवाई जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ में हुई। अदालत ने नगर पालिका अधिकारी के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके आधार पर मोनालिसा को नाबालिग माना गया था। कोर्ट ने साफ किया कि किसी व्यक्ति की उम्र के संबंध में एकतरफा फैसला नहीं लिया जा सकता। संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। इसलिए अदालत ने निर्देश दिया कि मोनालिसा को सुनने के बाद उनके पिता की ओर से दिए गए आवेदन पर कानून के मुताबिक दोबारा फैसला किया जाए।
-इसका मतलब ये है कि हाईकोर्ट ने फिलहाल मोनालिसा की जन्मतिथि को अंतिम रूप से सही या गलत घोषित नहीं किया है। अदालत का फैसला मुख्य रूप से नगर पालिका की प्रक्रिया और मोनालिसा को सुनवाई का अवसर दिए जाने से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान पिता को लेकर क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान जस्टिस गजेंद्र सिंह ने मोनालिसा के पिता की भूमिका को लेकर भी टिप्पणी की। अदालत में उनके परिवार और मोनालिसा की शादी से जुड़े घटनाक्रम पर चर्चा हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि मोनालिसा की अपनी पसंद से शादी के बाद उनके पिता की ओर से उम्र को लेकर मामला उठाया गया। हालांकि अदालत के मौजूदा आदेश का केंद्र मोनालिसा की उम्र तय करना नहीं बल्कि उन्हें सुनवाई का अवसर देना है।
मोनालिसा के वकील ने क्या दलील दी?
मोनालिसा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा अदालत में पेश हुए। उनकी ओर से दलील दी गई कि पुराने आधिकारिक दस्तावेजों में मोनालिसा की जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज रही है। कोर्ट में बताया गया कि मई 2015 में जारी आधार कार्ड में भी यही जन्मतिथि दर्ज थी। इसके अलावा पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र में भी 1 जनवरी 2008 की जन्मतिथि दर्ज होने की बात कही गई। मई 2025 में मोनालिसा की मां की ओर से दिए गए हलफनामे में भी इसी जन्मतिथि का उल्लेख होने की दलील अदालत के सामने रखी गई।
शादी और अन्य मामलों पर क्या असर होगा?
-हाईकोर्ट के इस फैसले से मोनालिसा की शादी या उनके पति के खिलाफ दर्ज मामलों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। अदालत ने केवल नगर पालिका के उस आदेश को रद्द किया है, जिसमें उन्हें नाबालिग घोषित किया गया था।
-अब संबंधित अधिकारी को मोनालिसा को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा और इसके बाद उनके पिता के आवेदन पर नए सिरे से विचार करना होगा। ऐसे में उनकी जन्मतिथि को लेकर अंतिम स्थिति आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
-महाकुंभ से वायरल हुई मोनालिसा पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में रही हैं। अब उम्र से जुड़े इस कानूनी विवाद में हाईकोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर उनका नाम सुर्खियों में है।