Moradabad Leopard Terror: मुरादाबाद में तेंदुए का खूनी तांडव; झोपड़ी में सो रहे दिव्यांग को घसीटकर मार डाला, 12 दिन में तीसरी मौत - Haribhoomi

Published on 29 अग॰ 2026

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुए का आतंक लगातार गहराता जा रहा है। बलिया गांव में शुक्रवार रात आबादी से बाहर बनी झोपड़ी में सो रहे दिव्यांग युवक जगराज को तेंदुआ खींचकर ले गया और हमला कर मार डाला। महज 12 दिनों के भीतर इलाके में तेंदुए के हमले से यह तीसरी मौत है।

moradabad leopard attack disabled person killed

लगातार हो रही मौतों से गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

  • Published: 29 Aug 2026, 09:49 AM IST
  • Last Updated: 29 Aug 2026, 09:49 AM IST

मुरादाबाद जनपद के ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र में जंगली जानवरों और इंसानों के बीच का संघर्ष बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। लगातार हो रहे हमलों और ग्रामीणों की चेतावनियों के बावजूद जंगली जानवर अब सीधे घरों में घुसकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

शुक्रवार देर रात बलिया गांव के बाहरी इलाके में स्थित असुरक्षित झोपड़ी में सो रहे दिव्यांग युवक पर तेंदुए ने हमला बोल दिया और उसे मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने एक बार फिर पूरे इलाके को थर्रा कर रख दिया है।

​झोपड़ी में सो रहे दिव्यांग जगराज को खींचकर ले गया तेंदुआ

मृतक जगराज का घर बलिया गांव की मुख्य आबादी से थोड़ा दूर खेत किनारे स्थित है। झोपड़ीनुमा इस घर में सुरक्षा के लिए कोई मजबूत दरवाजा भी नहीं लगा था।

परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में तेंदुए की लगातार आवाजाही के कारण हमेशा अनहोनी का डर बना रहता था, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते परिवार इसी कच्चे आशियाने में रहने को मजबूर था। शुक्रवार रात तेंदुआ चुपचाप झोपड़ी के भीतर घुसा और सो रहे दिव्यांग जगराज को घसीटते हुए बाहर ले गया, जहां उसने जगराज को बुरी तरह नोच डाला।

​सुबह क्षत-विक्षत शव देख फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

शनिवार सुबह जब परिजनों और ग्रामीणों ने जगराज का क्षत-विक्षत शव देखा, तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। घटना की खबर फैलते ही मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों का कहना है कि इसी बलिया गांव और आसपास के इलाके में बीते 12 दिनों के भीतर तेंदुए के हमले में यह तीसरी जान गई है।

इससे पहले खेत में काम करने गईं दो महिलाओं की भी तेंदुए के हमले में जान जा चुकी है। लगातार हो रही मौतों से गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​10 तेंदुओं के रेस्क्यू के बाद भी नहीं थम रहा खौफ

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इलाके में बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग अभियान चलाया जा रहा है और अब तक करीब 10 तेंदुओं को पिंजरे में कैद कर रेस्क्यू किया जा चुका है। इसके बावजूद ठाकुरद्वारा क्षेत्र के करीब 36 से 40 गांवों में जंगली जानवरों की सक्रियता बनी हुई है।

अमानगढ़-कालागढ़ के जंगलों और रामगंगा नदी के खादर इलाके में फैले घने गन्ने के खेत तेंदुओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं, जिससे उन्हें पकड़ना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

​थर्मल ड्रोन और कैमरों से सर्च ऑपरेशन जारी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। वन विभाग ने इलाके में अतिरिक्त पिंजरे लगाने, पेड़ों पर ट्रैप कैमरे लगाने और थर्मल ड्रोन कैमरों से सघन निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन ने ग्रामीणों से शाम के समय घरों से अकेले न निकलने और खेतों की ओर समूह में जाने की अपील की है, जबकि ग्रामीण प्रशासन से आदमखोर तेंदुए को तत्काल पकड़ने और प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।