मध्य प्रदेश के DGP कैलाश मकवाणा ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर 24 बिंदुओं वाली गाइडलाइन जारी की है। इसमें फेसबुक, WhatsApp, X, Instagram और YouTube समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, कमेंट, फोटो, वीडियो और दस्ता
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गाइडलाइन के मुताबिक पुलिसकर्मी सरकारी या निजी सोशल मीडिया अकाउंट से शासन के निर्णयों और नीतियों की आलोचना नहीं करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक या उनकी गरिमा प्रभावित करने वाली टिप्पणी करने से भी बचना होगा। ऐसी सामग्री पोस्ट नहीं करने को कहा गया है, जिससे विभाग में असंतोष या मतभेद की स्थिति बने।
सरकारी दस्तावेज एआई टूल पर अपलोड नहीं होंगे ऐसे शासकीय दस्तावेज जिन्हें सार्वजनिक करना नियमों के खिलाफ है, उन्हें स्कैन, स्क्रीनशॉट या किसी अन्य तरीके से सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जा सकेगा। सरकारी दस्तावेज, संवेदनशील जानकारी और विभागीय सामग्री को ChatGPT, Gemini जैसे AI टूल पर अपलोड करने से भी स्पष्ट रूप से मना किया गया है।
जांच और कोर्ट केस की जानकारी साझा करने पर रोक किसी अपराध की जांच या विवेचना चल रही हो अथवा मामला न्यायालय में लंबित हो, तो उससे जुड़ी ऐसी जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं की जाएगी, जिससे जांच या अभियोजन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पुलिस कार्रवाई में जब्त सामग्री या हथियारों की बिना सील की गई फोटो और वीडियो भी सरकारी या निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट नहीं की जा सकेंगी।
महिला-बाल पीड़ितों की पहचान उजागर नहीं होगी POCSO या अन्य मामलों में पीड़ित महिला, बालिका या किशोर की पहचान बताने वाली फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री साझा नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य पीड़ितों की निजता और पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पुलिस की उपलब्धि का निजी प्रचार नहीं पुलिस विभाग की उपलब्धियों को किसी एक अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में पेश करने के बजाय पुलिस बल की उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी कार्यक्रमों में भी पूर्व अनुमति के बिना अपने या परिजनों के साथ फोटो खिंचवाकर उसका व्यक्तिगत प्रचार सोशल मीडिया पर नहीं किया जा सकेगा। किसी व्यक्तिगत व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद या सेवा के प्रचार के लिए सरकारी या निजी सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल करने पर भी रोक है।
राजनीतिक प्रतीकों और पुलिस की पहचान के इस्तेमाल पर भी नियम पुलिसकर्मी अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल या DP में राजनीतिक विरोध अथवा किसी राजनीतिक दल या संगठन के समर्थन से जुड़े प्रतीक, पोस्टर या चिन्ह इस्तेमाल नहीं करेंगे।
अपने निजी अकाउंट पर ऐसे संकेत या विवरण भी नहीं लगाए जा सकेंगे, जिससे वह आधिकारिक पुलिस अकाउंट जैसा लगे। सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट से बिना अधिकृत अनुमति पोस्ट करने की भी मनाही है।
सरकारी मोबाइल और नेटवर्क से निजी अकाउंट नहीं व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या चलाने के लिए शासकीय CUG सिम, इंटरनेट, Wi-Fi या सरकारी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पुलिस के सोशल मीडिया लॉगिन क्रेडेंशियल व्यक्तिगत मोबाइल फोन पर साझा न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
संवेदनशील ड्यूटी की लोकेशन साझा नहीं होगी संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी की प्रकृति या स्थान की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं करेंगे। संवेदनशील जगहों पर लोकेशन और जियो-टैगिंग का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
सेवा संबंधी शिकायतें सोशल मीडिया पर नहीं पुलिसकर्मी सेवा से संबंधित शिकायतों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करेंगे। ऐसी शिकायतें अपने वरिष्ठ अधिकारी के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस मुख्यालय ने गाइडलाइन को थाना स्तर से लेकर पुलिस मुख्यालय, प्रशिक्षण संस्थानों और सभी संबंधित पुलिस इकाइयों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उल्लंघन होने पर संबंधित नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।