MP Samvida Karmchari: मध्यप्रदेश में नियमितीकरण का इंतजार कर रहे डेढ़ लाख संविदा कर्मचारी, सरकार से नाराजगी बढ़ी, आंदोलन की तैयारी

Published on 10 अक्टू॰ 2026

MP Samvida Karmchari: मध्यप्रदेश में करीब डेढ़ लाख संविदा कर्मचारी-अधिकारी अपनी मांगों को लेकर 9 महीने से इंतजार कर रहे हैं। नियमितीकरण और नियमित कर्मचारियों की तरह लाभ दिलवाने की 30 जनवरी को सीएम मोहन यादव ने न्यू मार्केट के दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बात कही थी। संविदा कर्मचारी संगठन का कहना है, इतना समय बीतने के बाद भी सरकार ने अब तक कोई पहल नहीं की है। ये हाल तक है जब अधिकतर विभागों में ढेरों पद खाली हैं। (MP Samvida Karmchari)

सुप्रीम कोर्ट भी नियमित करने दे चुका आदेश

मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर ने कहा सुप्रीम कोर्ट भी 10 साल सेवा देने वाले संविदा कर्मचारियों (MP Samvida Karmchari) को नियमित करने के आदेश दे चुका है, लेकिन प्रदेश का शासन-प्रशासन संविदा कर्मचारियों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के आश्वासन के बाद भी संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और नियमित कर्मचारियों की तरह नियम लागू नहीं किए गए हैं।

इन विभागों में संविदा कर्मी नियमित

महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर का कहना है कि राज्य विपणन संघ के जन अभियान परिषद में करीब 250 कर्मचारियों और आयुष विभाग में लगभग 150 कर्मचारियों को जब नियमित कर दिया गया है तो अन्य विभागों के कर्मचारियों को नियमित करने में क्या दिक्कत है ? 

बिजली कर्मियों को नियमित करने बे-वहज देरी

उन्होंने बताया कि बिजली कंपनी के कर्मचारियों को भी नियमित करने की प्रक्रिया में बिना वजह देरी की जा रही है, जबकि ऊर्जा विभाग के इसके लिए स्वीकृति भी दे दी है। इससे करीब 5 पांच हजार कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।

कब मिलेगा संविदा नीति 2023 का लाभ

महासंघ के अध्यक्ष राठौर ने बताया कि कर्मचारियों को 22 जुलाई 2023 को संविदा नीति का लाभ देने की बात कही गई थी। नीति भी इसीलिए बनाई गई थी। जिसमें नियमित पद के समान संविदा कर्मचारियों को सैलरी, ग्रेजुटी और नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत पद संविदा कर्मचारियों के लिए आरक्षित करने का आश्वासन दिया गया था। 

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सभी विभागों में नियमितीकरण आदेश कब निकलेंगे ?

उन्होंने बताया कि एक-दो विभागों में संविदा कर्मियों (MP Samvida Karmchari)को नियमित किया भी गया है, लेकिन सभी विभागों के लिए ये आदेश क्यों नहीं निकाले जा रहे हैं। राठौर ने बताया कि मप्र में करीब डेढ़ लाख संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं और शासन के काम-काज में पूरा सहयोग दे रहे हैं, पर उन्हें शासन की नीतियों का लाभ नहीं मिल रहा है। बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवाकाल की आयु पूरी करने वाले हैं, वहीं हजारों कर्मचारी संविदा नौकरी में रहते ही सेवा पूरी कर चुके हैं। उन्हें संविदा नीति का कोई लाभ नहीं मिल सहा है।

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संविदा कर्मियों में आक्रोश, आंदोलन की तैयारी

महासंघ के अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि अब इंतजार की इंतहा हो गई है। संविदा कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ आक्रोश है। जल्द बैठक कर आंदोलन की तैयारी की रणनीति बनाई जाएगी।

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