19 जुलाई 2026 तक देश में 111 बाघों की मौत दर्ज हुई, जिनमें 40 मौतें मध्य प्रदेश में हुई हैं। इनमें 16 बाघों की मौत टाइगर रिजर्व के बाहर हुई, जिससे कॉरिडोर और बफर क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
टाइगर स्टेट में सबसे ज्यादा बाघों की मौत
- Published: 29 Jul 2026, 09:49 AM IST
- Last Updated: 29 Jul 2026, 09:49 AM IST
मध्य प्रदेश: देश में सबसे ज्यादा बाघों वाले राज्य मध्य प्रदेश में अब बाघों की मौत चिंता का बड़ा कारण बन गई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के आंकड़ों के अनुसार 19 जुलाई 2026 तक देशभर में 111 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें अकेले मध्य प्रदेश में 40 बाघों की मौत हुई। यानी देश में हुई कुल बाघ मौतों का करीब 36 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ मध्य प्रदेश का है। इसके बाद महाराष्ट्र में 25 और तमिलनाडु में 9 बाघों की मौत दर्ज हुई है।
40 में से 16 बाघों की मौत टाइगर रिजर्व के बाहर
मध्य प्रदेश को 785 बाघों के साथ 'टाइगर स्टेट' का दर्जा प्राप्त है। हालांकि, बढ़ती बाघ आबादी के साथ उनकी सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ रही है। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि 40 में से 16 बाघों की मौत टाइगर रिजर्व के बाहर हुई है। नर्मदापुरम, सीहोर, शहडोल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, सतना, उमरिया और बुरहानपुर जैसे वन क्षेत्रों में ये घटनाएं सामने आई हैं। वहीं 24 मौतें बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा, संजय-डुबरी, रातापानी और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के भीतर दर्ज की गईं।
2025 में प्रदेश में 53 बाघों की मौत
वन विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2025 में प्रदेश में 53 बाघों की मौत हुई थी। इनमें सबसे बड़ा कारण बाघों के बीच आपसी संघर्ष रहा। इसके अलावा बिजली के करंट, प्राकृतिक कारण, बीमारी, ट्रेन हादसे और शिकार जैसी वजहें भी सामने आईं। वहीं 2026 में शुरुआती महीनों में दर्ज 29 मौतों में सात मामले शिकार से जुड़े बताए गए, जिनमें छह बाघ करंट की चपेट में आए थे।
बाघों की गतिविधियों पर नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे बाघों की संख्या बढ़ रही है, युवा बाघ नए इलाकों की तलाश में टाइगर रिजर्व से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में जंगलों के बीच सुरक्षित वन्यजीव कॉरिडोर, बफर क्षेत्र और मानव-बाघ संघर्ष को कम करना अब सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। NTCA के 2012 से 2025 तक के आंकड़े भी बताते हैं कि देश में करीब 47.5 प्रतिशत बाघों की मौत टाइगर रिजर्व के बाहर हुई है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि वन विभाग अब बाघ संरक्षण के लिए तकनीक का अधिक उपयोग कर रहा है। संवेदनशील इलाकों में ई-सर्विलांस, एआई आधारित कैमरों और निगरानी तंत्र के जरिए बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही खेतों में लगाए जाने वाले खतरनाक बिजली तारों की जगह सोलर फेंसिंग को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है।
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने दावा किया कि इस वर्ष प्रदेश में बाघों की मौत का आंकड़ा 45 तक पहुंच चुका है और कई मामले शिकार से जुड़े हैं। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो टाइगर स्टेट का दर्जा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब सिर्फ टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि उनके बाहर के जंगलों और कॉरिडोर की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।