Nepal Flash Flood: बुलेट ट्रेन जैसी स्पीड से आया सैलाब, 188 KM प्रति घंटे की रफ्तार ने मचाई तबाही

Published on 29 अग॰ 2026

Nepal Flash Flood: डॉ उत्तम बाबू श्रेष्ठ ने सोशल मीडिया पर किए गए अपने विश्लेषण में दावा किया है कि लेन्दे नदी के स्रोत के पास भूस्खलन के बाद आया सैलाब महज सात मिनट में नेपाल-चीन सीमा पर स्थित केरुंग (Gyirong) तक पहुंच गया.

सात मिनट में करीब 22 किलोमीटर का सफर?

डॉ. उत्तम बाबू श्रेष्ठ के अनुसार, यह बाढ़ सामान्य तौर पर नालों, खहरों और नदियों में आने वाली बाढ़ से बिल्कुल अलग थी. उनके विश्लेषण के मुताबिक, नेपाल के समयानुसार सुबह 08:37 बजे लेन्दे नदी के स्रोत के ऊपरी हिस्से में बर्फ, चट्टान और मलबे के साथ भूस्खलन होता दिखाई देता है. उनका कहना है कि यही समय USGS (अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण) के भूकंप मापने वाले सेंसर में भी दर्ज हुआ था.

इसके बाद जब यह बाढ़ नेपाल-चीन सीमा पर स्थित केरुंग पहुंचती है, तो वहां लगे CCTV में समय 10:59:53 दिखाई देता है. चूंकि चीनी समय नेपाली समय से 2 घंटे 15 मिनट आगे है, इसलिए यह समय नेपाल के हिसाब से करीब 08:44 बजे बैठता है.

इस गणना के आधार पर दावा किया गया है कि महज सात मिनट में सैलाब ने अपने उत्पत्ति स्थल से करीब 22 किलोमीटर की दूरी तय की. अगर इन दोनों समय और दूरी को आधार माना जाए, तो इसकी औसत गति करीब 188 किलोमीटर प्रति घंटे बैठती है. इसी वजह से इसकी रफ्तार की तुलना 'बुलेट ट्रेन' से की जा रही है.

बेत्रावती और त्रिशूली तक कितनी तेजी से पहुंचा सैलाब?

डॉ उत्तम बाबू श्रेष्ठ ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि उन्होंने चीनी केरुंग से बेत्रावती बाजार तक नदी की लंबाई का अनुमान लगाया, जो करीब 13 किलोमीटर है. अगर बाढ़ की गति वही मानी जाए, तो उनके अनुमान के मुताबिक यह बाढ़ वहां करीब चार मिनट में पहुंच गई होगी.

इसके बाद बेत्रावती से त्रिशूली तक नदी की दूरी करीब 35 किलोमीटर बताई गई है. इसी गति को आधार मानें तो बाढ़ को बेत्रावती से त्रिशूली बाजार तक पहुंचने में करीब 11 मिनट लगने का अनुमान है.

क्या हिरोशिमा बम जितनी शक्तिशाली थी बाढ़?

डॉ उत्तम बाबू श्रेष्ठ ने अपने पोस्ट में सैलाब की ऊर्जा को लेकर भी एक अनुमान साझा किया है. उनके अनुसार, विदेशी मीडिया में सामने आई जानकारी और शुरुआती अनुमानों के आधार पर भूस्खलन की लंबाई करीब 610 मीटर, चौड़ाई 330 मीटर और ऊंचाई 40 मीटर मानी गई है.

उन्होंने कहा कि यदि इन आंकड़ों को आधार बनाया जाए और यह मान लिया जाए कि मलबे का एक बड़ा हिस्सा करीब 1.5 किलोमीटर नीचे गिरा, तो इससे पैदा होने वाली गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा काफी बड़ी हो सकती है. उनकी प्रारंभिक गणना के मुताबिक, यह ऊर्जा करीब 51 किलोटन TNT के बराबर हो सकती है. इसी आधार पर इस सैलाब की ऊर्जा की तुलना हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से की जा रही है.

हालांकि, डॉ उत्तम बाबू श्रेष्ठ ने खुद इस तुलना को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है. उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की राय के बिना इसे सीधे विस्फोटक शक्ति की तुलना मानना उचित नहीं होगा. भूस्खलन की गुरुत्वाकर्षण ऊर्जा और परमाणु विस्फोट की ऊर्जा अलग-अलग तरीकों से उत्पन्न और स्थानांतरित होती है. भूस्खलन से पैदा होने वाली कुल ऊर्जा का केवल एक छोटा हिस्सा ही भूकंपीय तरंगों में परिवर्तित होता है.

इसलिए 188 किलोमीटर प्रति घंटे की गति और 51 किलोटन TNT के बराबर ऊर्जा का आंकड़ा फिलहाल विशेषज्ञ के प्रारंभिक अनुमान और गणना पर आधारित है, इसे स्थापित वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

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