नेपाल सरकार आने वाले दिनों में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में विस्तृत सर्वेक्षण शुरू करेगी. इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में कितनी आर्थिक क्षति हुई है और पुनर्निर्माण के लिए कितने संसाधनों की आवश्यकता होगी
नेपाल सरकार आने वाले दिनों में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में विस्तृत सर्वेक्षण शुरू करेगी. इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में कितनी आर्थिक क्षति हुई है और पुनर्निर्माण के लिए कितने संसाधनों की आवश्यकता होगी
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Nepal Flash Flood
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती राहत और बचाव के साथ-साथ देश के व्यापक पुनर्निर्माण की बन गई है. नेपाल सरकार ने संकेत दिए हैं कि बाढ़ से हुई भारी तबाही के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर अरबों डॉलर का खर्च आ सकता है. सरकार नुकसान का विस्तृत आकलन करने के बाद राष्ट्रीय पुनर्निर्माण योजना तैयार करेगी और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग मांगा जाएगा.
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शनिवार को काठमांडू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि फिलहाल सरकार की पहली प्राथमिकता अधिक से अधिक लोगों की जान बचाना और प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि आपदा का पैमाना इतना बड़ा है कि सरकार की क्षमताओं पर भी भारी दबाव पड़ रहा है.
खनाल ने कहा कि पुनर्निर्माण और पुनर्वास में शायद अरबों डॉलर का खर्च आएगा. पहले हम नुकसान और क्षति का विस्तृत आकलन करेंगे, उसके बाद आगे की योजना बनाई जाएगी. मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता के लिए संपर्क कर रहा हूं.”
बचाव अभियान अभी भी सर्वोच्च प्राथमिकता
आपदा के तीन दिन बाद भी नेपाल के कई प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है. सरकार का कहना है कि अभी हजारों लोगों तक सहायता पहुंचाना, फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालना और बुनियादी सेवाओं को बहाल करना सबसे जरूरी कार्य है. विदेश मंत्री ने माना कि बाढ़ से हुए नुकसान का वास्तविक आकलन तत्काल संभव नहीं है, क्योंकि कई क्षेत्रों में अभी भी पहुंच मुश्किल बनी हुई है. ऐसे में सड़क, पुल, बिजली, संचार और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण बाद में किया जाएगा.
इंफ्रास्ट्रक्चर को दोबारा बनाने में 5 अरब डॉलर लग सकते हैं
नेपाल के प्रमुख उद्योगपति और देश के इकलौते अरबपति बिनोद चौधरी ने भी बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर गंभीर चिंता जताई है. ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में चौधरी ने कहा कि नेपाल के बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने में कम से कम 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक का खर्च आ सकता है. उन्होंने कहा कि यदि पुनर्निर्माण की लागत इस स्तर तक पहुंचती है तो उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा. चौधरी के अनुसार चुनौती केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि नेपाल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और पुनर्निर्माण में लगने वाला लंबा समय भी बड़ी बाधा साबित हो सकते हैं.
केवल इमारतें नहीं, पूरी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती
बिनोद चौधरी ने कहा कि नेपाल के सामने अब सिर्फ टूटी सड़कों और पुलों को दोबारा बनाने की चुनौती नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास और अर्थव्यवस्था को सामान्य स्थिति में वापस लाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. चौधरी समूह का कारोबार खाद्य, दूरसंचार, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर समेत 12 अलग-अलग क्षेत्रों में फैला हुआ है. ऐसे में उन्होंने कहा कि उद्योग और व्यापार जगत भी बाढ़ के असर से अछूता नहीं रहेगा और देश को आर्थिक गतिविधियों को फिर से गति देने के लिए व्यापक रणनीति की जरूरत होगी.
नुकसान के आकलन के बाद बनेगी पुनर्निर्माण योजना
नेपाल सरकार आने वाले दिनों में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में विस्तृत सर्वेक्षण शुरू करेगी. इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में कितनी आर्थिक क्षति हुई है और पुनर्निर्माण के लिए कितने संसाधनों की आवश्यकता होगी. सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की योजना तैयार करने के बाद अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसियों, सहयोगी देशों और वैश्विक संस्थाओं से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की मांग की जाएगी. नेपाल के लिए यह पुनर्निर्माण अभियान आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं में से एक हो सकता है.
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव कार्य जारी है, जबकि पुनर्वास और पुनर्निर्माण की वास्तविक लागत का अंतिम आंकड़ा नुकसान के आधिकारिक मूल्यांकन के बाद ही सामने आएगा. सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझेदारी इस हिमालयी देश को आपदा के बाद फिर से खड़ा करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है.