Nepal Flood Rescue Operation: भीषण बाढ़ में सुरंगों में फंसे 898 कर्मचारी..

Published on 29 अग॰ 2026

Nepal Flood Rescue Operation: नेपाल में बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। सबसे मुश्किल स्थिति त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में बनी हुई है। यहां बचाव दल लगातार मिट्टी, गाद और मलबा हटाने में जुटा है। सुरंग के भीतर फंसे लोगों तक हवा पहुंचाने के लिए करीब 6 इंच का छेद बनाया गया है और इसके जरिए पाइप डाला गया है। इस पाइप से लगातार हवा पहुंचाई जा रही है, जिससे अंदर लोगों के सुरक्षित होने की उम्मीद बनी हुई है।

मैनहोल बनाने की तैयारी

अब रेस्क्यू ऑपरेशन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी है। बचाव दल छह इंच के बनाए गए रास्ते को धीरे-धीरे चौड़ा कर मैनहोल में बदलने की कोशिश कर रहा है। अगर यह रास्ता पर्याप्त बड़ा हो जाता है तो प्रशिक्षित रेस्क्यू कर्मी सुरंग के भीतर प्रवेश कर सकेंगे। इसके बाद फंसे कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश तेज की जाएगी। हालांकि लगातार जमा हो रही गाद, मिट्टी और मलबा अभियान में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

11 परियोजनाओं में संकट

नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक बाढ़ से प्रभावित 11 अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में करीब 898 कर्मचारी अभी भी लापता या फंसे हुए बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव दल अब तक 361 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल चुका है। अपर त्रिशूली-1 समेत कई परियोजनाओं में सुरंगों के प्रवेश मार्ग मलबे से पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद हो गए हैं। इसलिए हर प्रोजेक्ट की स्थिति के मुताबिक अलग तकनीकी रणनीति अपनाई जा रही है।

भारत की तकनीकी मदद

नेपाल के रेस्क्यू अभियान में भारत भी महत्वपूर्ण तकनीकी सहायता दे रहा है। भारत ने राहत उड़ान के जरिए चिकित्सा और सुरंग बचाव विशेषज्ञों वाली 11 सदस्यीय विशेष टीम नेपाल भेजी है। भारतीय विशेषज्ञों ने प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों का निरीक्षण कर फंसे लोगों तक पहुंचने और सुरक्षित निकासी के विकल्पों का आकलन किया है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक भारतीय टीम नेपाल की संबंधित रेस्क्यू एजेंसियों के साथ मिलकर अभियान में तकनीकी सहयोग कर रही है।

सेना ने संभाला मोर्चा

बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए नेपाल सेना ने 15 हेलीकॉप्टर और कम से कम 84 प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में बचावकर्मी अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। नेपाल ने सुरंगों में जटिल रेस्क्यू, जीवित लोगों का पता लगाने वाली तकनीक, फोरेंसिक पहचान और DNA जांच के लिए पड़ोसी देशों से भी सहायता मांगी है। एक चीनी कंपनी के भी इस अभियान में तकनीकी मदद के लिए शामिल होने की संभावना है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सुरंग के अंदर पहुंचने का रास्ता कब तैयार होता है और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है।

Kirtika Tyagi

Kirtika Tyagi is a journalist. she is working on sub-editor post and she is expert in International, National, Health, Crime, Lifestyle, Astro beat.