भोज वेटलैंड-केरवा क्षेत्र में अतिक्रमण; NGT सख्त: कहा- 50 मीटर के दायरे में अवैध कब्जे हटाए; मड रैली पर भी नाराज - Bhopal News

Published on 30 जुल॰ 2026

भोज वेटलैंड के संरक्षण और एफटीएल क्षेत्र में फैले अतिक्रमण पर नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) सख्त हुआ है। एक आदेश पारित करते हुए एनजीटी ने 50 मीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाने को कहा है।

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चार प्रकरणों की संयुक्त सुनवाई में भोज वेटलैंड, कलियासोत डैम, केरवा डैम एवं भोपाल झील क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और अतिक्रमण हटाने को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। प्रकरण में आवेदक राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष प्रस्तुत किया।

एनजीटी ने साफ किया कि यह मामला केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वेटलैंड नियमों के पालन, वेटलैंड एवं एफटीएल (फुल टैंक लेवल) क्षेत्र की वैज्ञानिक पहचान एवं सीमांकन, तालाबों में गंदे एवं अनुपचारित पानी के प्रवाह को रोकने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

यह जानकारी दी गई

सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि पूर्व आदेशों के अनुपालन में 9 व्यावसायिक अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि 9 आवासीय अतिक्रमण आबादी क्षेत्र में स्थित होने के कारण अभी शेष हैं। ग्राम प्रेमपुरा स्थित खसरा क्रमांक 131 में कुल 35 अतिक्रमण चिन्हित किए गए। जिनमें से 23 अतिक्रमण हटाकर लगभग एक एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है।

शेष 12 आवासीय अतिक्रमणों को हटाने से पूर्व प्रभावित परिवारों को हाउसिंग फॉर ऑल योजना के अंतर्गत वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।

एफटीएल के 50 मीटर के दायरे में कई अतिक्रमण लिस्टेड किए गए हैं।

एफटीएल के 50 मीटर के दायरे में कई अतिक्रमण लिस्टेड किए गए हैं।

आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 50 मीटर एफटीएल क्षेत्र का सर्वेक्षण है। प्रेमपुरा, धरमपुरी, सेवनिया गोंड, गौरा, बिशनखेड़ी, बीलखेड़ा एवं कोटरा सुल्तानाबाद सहित 7 गांव का विस्तृत सर्वे कराया गया। इस सर्वे में 50 मीटर एफटीएल क्षेत्र के भीतर कुल 117 अतिक्रमण चिन्हित हुए।

जिनमें 68 अतिक्रमण शासकीय भूमि तथा 49 अतिक्रमण निजी भूमि पर पाए गए। इनमें से 45 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि 72 अतिक्रमणों को हटाया जाना अभी शेष है। जिन पर नियमानुसार कार्रवाई जारी है।

कार्रवाई के बावजूद कब्जे क्यों?

प्रशासन के तर्क के बाद अधिवक्ता तिवारी ने एनजीटी के समक्ष यह बात रखी कि कार्रवाई किए जाने के बावजूद वेटलैंड एवं एफटीएल क्षेत्र में लगातार नए अतिक्रमण बढ़ रहे हैं। जिससे पूर्व में पारित आदेशों का पूर्ण एवं प्रभावी पालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। उन्होंने पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में समयबद्ध एवं कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण के समक्ष यह भी मुद्दे उठाए गए कि केरवा डैम, कलियासोत डैम एवं भोपाल तालाब की वैज्ञानिक सीमा का चिन्हांकन एवं डिमार्केशन किया जाए। वेटलैंड क्षेत्र के आसपास खेती में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के उपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जाए।

ताकि, जल प्रदूषण रोका जा सके और लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित बॉटनिकल गार्डन का सीमांकन एवं संरक्षण किया जा सके।

टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एनजीटी को बताया कि एफटीएल क्षेत्र के अनेक अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं। शेष पर कार्रवाई की जा रही है।

एनजीटी ने कलियासोत डैम किनारे मड रैली को लेकर भी नाराजगी जताई है।

एनजीटी ने कलियासोत डैम किनारे मड रैली को लेकर भी नाराजगी जताई है।

निर्देश- शपथ पत्र एनजीटी में पेश करें

एनजीटी ने अपने आदेश में संबंधित एसडीएम, तहसीलदार एवं जिला प्रशासन की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करते हुए निर्देश दिया कि वे एफटीएल क्षेत्र, वेटलैंड, भोज वेटलैंड नियमों एवं मास्टर प्लान का उल्लंघन कर किए गए सभी अवैध निर्माणों एवं अतिक्रमणों की विस्तृत सूची तैयार करें।

सभी अतिक्रमणों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करें। साथ ही शपथ पत्र सहित विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन पेश करें।

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए समिति में पुलिस कमिश्नर द्वारा नामित एक पुलिस अधिकारी को शामिल किया जाए। जिससे आवश्यक पुलिस बल समय पर उपलब्ध कराया जा सके और कार्रवाई में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

एनजीटी ने समस्त संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए प्रकरण की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की।

एनजीटी का आदेश महत्वपूर्ण

पर्यावरणविद् राशिद नूर ने बताया कि यह आदेश भोपाल के वेटलैंड संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से 50 मीटर एफटीएल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को और गति मिली है। अवैध मड रैली एवं वाहन रेसिंग के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने का तथ्य न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा बना है।

एसडीएम, तहसीलदार एवं कलेक्टर की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की गई है। पुलिस विभाग की अनिवार्य भागीदारी तय की गई है। भोज वेटलैंड नियमों एवं मास्टर प्लान का उल्लंघन करने वाले सभी अवैध निर्माणों एवं अतिक्रमणों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।

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