Nitin Nabin की नई टीम में UP के 8 चेहरों में कितने मुस्लिम? जातिगत गणित क्या? कौन-कितना अमीर? किसपर कितने केस?

Published on 19 अग॰ 2026

Time Updated: Wednesday, August 19, 2026, 16:32 [IST]

UP Election 2027: 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में चुनावी पारा चढ़ चुका है। मतदान की तारीखों का ऐलान भले ही अभी दूर हो, राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है। इसी कड़ी में, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान हो चुका है। खास बात यह है कि इस टीम में यूपी का दबदबा देखने को मिला है। प्रदेश से 8 चेहरों को नबीन की टीम में जगह मिली है।

इनमें स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव, रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। वहीं, अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा की जिम्मेदारी मिली है। इन 8 चेहरों में दो मुस्लिम नेता प्रो. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली हैं। ऐसे में सवाल है कि बीजेपी ने इन चेहरों को क्या सोचकर चुना है? इनकी जातिगत-सामाजिक पहचान क्या है, कितनी संपत्ति घोषित की है और किन नेताओं पर आपराधिक मामले दर्ज हैं?

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Nitin Nabin की टीम में यूपी के 8 चेहरे कौन-कौन?

1. Who Is Smriti Irani: कौन हैं स्मृति ईरानी? महिला चेहरा और अमेठी की 'जायंट किलर'

स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाना बीजेपी के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। 2019 में उन्होंने अमेठी में राहुल गांधी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई थी। 2024 में उन्हें अमेठी से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन पार्टी संगठन में उनकी वापसी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई जिम्मेदारी के साथ वह यूपी के चुनावी अभियान में भी उपयोगी चेहरा हो सकती हैं।

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2024 लोकसभा चुनाव के हलफनामे के अनुसार, स्मृति ईरानी ने करीब 17.57 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला घोषित नहीं था। उनकी शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास है। दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से बीकॉम पार्ट-1 किया, लेकिन तीन वर्षीय डिग्री पूरी नहीं की।

2. Who Is Harish Dwivedi: कौन हैं हरीश द्विवेदी? पूर्वांचल और ब्राह्मण समीकरण

बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर बीजेपी ने पूर्वांचल को भी राष्ट्रीय संगठन में मजबूत प्रतिनिधित्व दिया है। पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता और केंद्रीय नेतृत्व के साथ काम करने का अनुभव उनकी नई जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, हरीश द्विवेदी ने करीब 6.14 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। उनके नाम एक आपराधिक मामला दर्ज था। मामले में IPC की धारा 147, 323, 504 और 506 का जिक्र है।

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ब्राह्मण वोट यूपी की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। हालांकि, किसी नेता को केवल जातीय प्रतिनिधि मानना राजनीतिक तौर पर पूरी तस्वीर नहीं बताता। द्विवेदी की नियुक्ति में संगठनात्मक अनुभव और पूर्वांचल का समीकरण भी उतना ही अहम है।

3. Who Is Rekha Verma: कौन हैं रेखा वर्मा? कुर्मी समीकरण का अहम चेहरा

धौरहरा की पूर्व सांसद रेखा वर्मा को दोबारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। उनकी निरंतरता यह संकेत देती है कि पार्टी संगठन में उनके काम और सामाजिक पहुंच को महत्व दे रही है। 2024 के हलफनामे के मुताबिक, रेखा वर्मा की घोषित संपत्ति करीब 6.01 करोड़ रुपये थी और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला घोषित नहीं था। वह 12वीं पास हैं। 2019 के चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ तीन मामले दर्ज थे, लेकिन 2024 के हलफनामे में आपराधिक मामलों की संख्या शून्य दर्ज है।

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यूपी की राजनीति में कुर्मी समुदाय को बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण ओबीसी समूह माना जाता है। इसलिए रेखा वर्मा की मौजूदगी को सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी देखा जा सकता है।

4. Who Is Prof. Tariq Mansoor: कौन हैं प्रो. तारिक मंसूर? मुस्लिम आउटरीच का बड़ा चेहरा

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर बीजेपी के मुस्लिम आउटरीच के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। वह 2017 से 2023 तक AMU के कुलपति रहे और अप्रैल 2023 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य मनोनीत किए गए। इसके बाद बीजेपी संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली। AMU की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, वह वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और यूपी विधान परिषद के सदस्य हैं।

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तारिक मंसूर की राजनीतिक उपयोगिता सिर्फ मुस्लिम चेहरा होने तक सीमित नहीं है। AMU जैसे संस्थान के लंबे प्रशासनिक अनुभव के कारण वह शिक्षित मुस्लिम वर्ग और पश्चिमी यूपी में पार्टी के संपर्क अभियान के लिए उपयोगी माने जाते हैं। 2023 में उनके MLC बनने को बीजेपी की मुस्लिम समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति के हिस्से के तौर पर रिपोर्ट किया गया था।

5. Who Is Bhola Singh: कौन हैं डॉ. भोला सिंह? दलित-खटीक प्रतिनिधित्व

बुलंदशहर से लगातार तीसरी बार सांसद डॉ. भोला सिंह को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। वह बीजेपी के दलित प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण चेहरा हैं और खटीक समुदाय से आते हैं।

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2024 के लोकसभा हलफनामे के मुताबिक, भोला सिंह के पास करीब 3.60 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज था। उन्होंने 1999 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से स्नातक किया।

6. Who Is Sangeeta Yadav: कौन हैं संगीता यादव? यादव वोट में सेंध की कोशिश?

राज्यसभा सांसद संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। वह यादव समाज से आती हैं और महिला चेहरा भी हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग के लिहाज से खास है। यूपी की राजनीति में यादव समाज को समाजवादी पार्टी का मजबूत आधार माना जाता है। ऐसे में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में यादव महिला चेहरे को प्रमुख जिम्मेदारी देना विपक्ष के इस मजबूत सामाजिक आधार में सेंध लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

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राज्यसभा के उपलब्ध हलफनामे के मुताबिक, संगीता यादव ने करीब 8.98 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था। उनके पति भारतीय राजस्व सेवा में सरकारी अधिकारी (IRS) हैं।

7. Who Is Amarpal Maurya: कौन हैं अमरपाल मौर्य? ओबीसी मोर्चे से अति पिछड़े वर्ग पर फोकस

अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी देना यूपी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। मौर्य, कुशवाहा, शाक्य और सैनी जैसे समूहों का कई विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक प्रभाव है। 2022 के विधानसभा चुनाव के हलफनामे के मुताबिक, अमरपाल मौर्य ने करीब 3.07 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी।

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उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था। ओबीसी राजनीति में यादव और कुर्मी जैसे बड़े समूहों के अलावा गैर-यादव ओबीसी वोट बीजेपी के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। मौर्य को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देकर पार्टी इसी सामाजिक आधार को और मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

8. Who Is Kunwar Basit Ali: कौन हैं कुंवर बासित अली? मुस्लिम संपर्क अभियान का चेहरा

मेरठ के कुंवर बासित अली को बीजेपी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी दी है। वह लंबे समय से बीजेपी के मुस्लिम संपर्क अभियान से जुड़े रहे हैं। पार्टी संगठन में उन्होंने जिला स्तर से शुरुआत की और बाद में अल्पसंख्यक मोर्चे में प्रदेश स्तर की जिम्मेदारियां संभालीं।

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उनकी राजनीति का मुख्य फोकस मुस्लिम समाज में बीजेपी की पहुंच बढ़ाना रहा है। ऐसे में 2027 के यूपी चुनाव से पहले उन्हें राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी देना पार्टी की मुस्लिम आउटरीच रणनीति का संकेत माना जा सकता है।

एक नजर में समझें ... कौन कितना अमीर और किस पर कितने केस? क्या जातिय समीकरण?

नेता नई जिम्मेदारी यूपी से राजनीतिक पहचान सामाजिक प्रतिनिधित्व घोषित संपत्ति क्रिमिनल केस
हरीश द्विवेदी राष्ट्रीय महासचिव बस्ती के पूर्व सांसद ब्राह्मण ₹6.14 करोड़ 1
स्मृति ईरानी राष्ट्रीय महासचिव अमेठी की पूर्व सांसद महिला/राष्ट्रीय चेहरा ₹17.57 करोड़ 0
रेखा वर्मा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धौरहरा की पूर्व सांसद कुर्मी/महिला ₹6.01 करोड़ 0
प्रो. तारिक मंसूर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष AMU के पूर्व VC, MLC मुस्लिम - -
डॉ. भोला सिंह राष्ट्रीय सचिव बुलंदशहर के सांसद दलित/खटीक ₹3.60 करोड़ 1
संगीता यादव राष्ट्रीय सचिव राज्यसभा सांसद यादव ₹8.98 करोड़ 0
अमरपाल मौर्य राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष बीजेपी नेता मौर्य/ओबीसी ₹3.07 करोड़ 0
कुंवर बासित अली राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष मेरठ के बीजेपी नेता मुस्लिम/अल्पसंख्यक - -

पसमांदा मुस्लिमों पर बीजेपी का फोकस क्यों?

यूपी में मुस्लिम आबादी करीब 19 प्रतिशत है और यही वजह है कि 2027 से पहले मुस्लिम वोट को लेकर बीजेपी की रणनीति पर खास नजर है। पार्टी लंबे समय से पसमांदा मुस्लिमों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी का तर्क रहा है कि मुस्लिम समाज के भीतर भी सामाजिक और आर्थिक विविधता है और पिछड़े मुस्लिम समुदायों तक सरकारी योजनाओं तथा संगठन के जरिए पहुंच बनाई जा सकती है। तारिक मंसूर और बासित अली जैसे चेहरों को राष्ट्रीय संगठन में जगह इसी व्यापक मुस्लिम आउटरीच के संदर्भ में देखी जा सकती है।