अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो गया है, तो उसे जल्द से जल्द रिन्यू करा लें। सरकार जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' व्यवस्था लागू करने जा रही है। इस नियम के तहत जिन गाड़ियों का वैध थर्ड-पार्टी बीमा नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से साफ मना कर दिया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट का पायलट ट्रायल दिल्ली से शुरू किया जाएगा।
- Published: 18 Sep 2026, 07:23 AM IST
- Last Updated: 18 Sep 2026, 07:23 AM IST
देशभर में बिना वैध इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों पर नकेल कसने के लिए सरकार और बीमा नियामक (IRDAI) एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' (No Insurance, No Fuel) व्यवस्था को धरातल पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है।
इसके तहत पेट्रोल पंपों को सीधे वाहनों के बीमा डेटाबेस से जोड़ा जाएगा, जिससे बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों की पहचान कर उन्हें पेट्रोल या डीजल देने से रोका जा सके।
पेट्रोल पंपों पर कैमरे स्कैन करेंगे नंबर प्लेट
इस नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे। जैसे ही कोई गाड़ी ईंधन भरवाने के लिए पंप पर पहुंचेगी, ये कैमरे उसकी नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन करेंगे। अगर वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस एक्टिव (वैध) नहीं पाया जाता है, तो पेट्रोल पंप का सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से फ्यूल डिस्पेंसिंग रोक देगा।
दिल्ली से होगी ट्रायल की शुरुआत
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने 4 अगस्त को केंद्र सरकार को दिल्ली से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया था। IRDAI जल्द ही दिल्ली समेत कुछ प्रमुख शहरों में इसका ट्रायल शुरू करने जा रहा है। देश में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होने के बावजूद आधे से अधिक वाहन मालिक इसे रिन्यू नहीं कराते हैं, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
नई गाड़ियों के लिए बदले थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के नियम
सुप्रीम कोर्ट ने नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के समय खरीदे जाने वाले अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की समयसीमा में भी बदलाव किया है:
- नई कार: अब 3 साल के बजाय 4 साल का अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा।
- नई बाइक/स्कूटी: अब 5 साल के बजाय 6 साल का अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा।
पीड़ितों को राहत और इंश्योरेंस सेक्टर पर असर
बिना बीमा वाली गाड़ियों से हादसे होने पर पीड़ितों और उनके परिजनों को मुआवजे के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस सख्त नियम से सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को तुरंत आर्थिक मुआवजा मिल सकेगा।
वहीं, दूसरी ओर नियम लागू होने से जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के प्रीमियम कलेक्शन में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। वित्त वर्ष 2026 में देश की टॉप-5 मोटर इंश्योरेंस कंपनियों ने मोटर प्रीमियम के रूप में करीब ₹48,400 करोड़ जुटाए थे।