5 घंटे पहले
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देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE का IPO आज 17 सितंबर से रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है। 21 सितंबर को यह बंद होगा। पहले दिन यह 44% सब्सक्राइब हुआ हैं।
IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर है। इसका लॉट साइज 8 शेयरों का है। यानी, अपर प्राइस बैंड ₹1,785 पर रिटेल निवेशकों को कम से कम ₹14,280 का निवेश करना होगा।
NSE के आईपीओ का साइज 22,569 करोड़ रुपए का है। यह 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपए के इश्यू के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ है।

किस कैटेगरी में कितना सब्सक्रिप्शन मिला
- 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने 3.83 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई है।
- नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) ने अपने कोटे का 72% सब्सक्राइब किया है।
- रिटेल हिस्से को 44% सब्सक्रिप्शन मिला है।
- क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) ने 19% हिस्सा सब्सक्राइब किया है।
IPO खुलने के दिन ग्रे मार्केट प्रीमियम 93 रुपए घटा
NSE के आईपीओ का जीएमपी यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम ₹125 पर आ गया है, जो 11 सितंबर को ₹218 पर था। महज 6 दिनों के भीतर जीएमपी में करीब ₹93 की गिरावट आई है। यानी इसकी अनुमानित लिस्टिंग प्राइस ₹1,910 पर हो सकती है।
IPO से मिलने वाला पैसा NSE के खाते में नहीं जाएगा
यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 12.64 करोड़ शेयर बेचे जा रहे हैं। इसका मतलब है कि IPO से मिलने वाली पूरी रकम शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलेगी और NSE को इसमें से कोई फंड नहीं मिलेगा।
2026 में रेवेन्यू घटकर ₹16,601 करोड़ पर आया
वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेशनल रेवेन्यू घटकर ₹16,601 करोड़ हो गया है। एक साल पहले यानी वित्त वर्ष 2025 में यह ₹17,140.68 करोड़ था। नेट प्रॉफिट घटकर ₹10,302 करोड़ हो गया जो वित्त वर्ष 2025 में ₹12,187.69 करोड़ था।
हालांकि, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही Q1FY27 में रेवेन्यू 13.10% बढ़कर ₹4,560.41 करोड़ और मुनाफा 6.71% बढ़कर ₹3,120.08 करोड़ हो गया है।
IPO को लेकर ब्रोकरेज हाउस की क्या राय?
- एंजेल वन: इन्होंने 'सब्सक्राइब' की सलाह दी है।
- रेलिगेयर ब्रोकिंग: इन्होंने 'न्यूट्रल' रेटिंग दी है।
क्या निवेशकों को इस IPO में पैसा लगाना चाहिए?
NSE की बाजार में मोनोपोली, बड़ा यूजर बेस और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पॉजिटिव संकेत हैं। लेकिन ध्यान रहे कि NSE की 79% कमाई ट्रांजेक्शन चार्ज (विशेषकर ऑप्शंस) से आती है। इसके अलावा जीएमपी में आई गिरावट यह संकेत देती है कि केवल लिस्टिंग गेन की उम्मीद से आने वाले निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
नॉलेज बॉक्स: जानें क्या होता है ग्रे मार्केट प्रीमियम?
IPO शेयर बाजार में लिस्ट होने से पहले अनऑफिशियल मार्केट में जिस प्रीमियम पर ट्रेड करता है, उसे GMP कहते हैं। उदाहरण के लिए, अगर NSE का अपर प्राइस ₹1,785 है और GMP ₹125 चल रहा है, तो इसके ₹1,910 पर लिस्ट होने की उम्मीद जताई जाती है। हालांकि, GMP केवल एक अनुमान होता है और यह वास्तविक लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं देता।
क्या होता है ऑफर फॉर सेल (OFS)?
IPO में ऑफर फॉर सेल का मतलब होता है कि कंपनी खुद नए शेयर जारी करके बाजार से नया फंड नहीं जुटा रही है, बल्कि कंपनी के पुराने या मौजूदा निवेशक जैसे- प्रमोटर्स या बड़े बैंक अपनी हिस्सेदारी का कुछ भाग आम जनता को बेच रहे हैं। इससे मिलने वाला सारा पैसा कंपनी के खाते में न जाकर सीधे उन शेयरधारकों के पास जाता है जो अपने शेयर बेच रहे होते हैं।
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