हॉवर्ड, ऑक्सफोर्ड, NYU या येल... जानिए कहां पढ़े हैं नामी नेताओं के बच्चे और अब क्या करते हैं?

Published on 15 अक्टू॰ 2026

जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने अमेरिका की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के बीच विदेश में काम कर रहे भारतीयों से देश लौटने की अपील की है. उन्होंने कहा कि भारतीयों को वापस आकर देश का तकनीकी तंत्र मजबूत करने में मदद करनी चाहिए.

इस बहस के बीच भारतीय नेताओं के बच्चों की विदेशी शिक्षा और उनके करियर पर भी नजर डाली जा रही है. जुलाई 2026 में स्क्रॉल की एक रिपोर्ट में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर बताया गया था कि इन बच्चों ने किन विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की और वे अब क्या कर रहे हैं.

ग्रीन कार्ड पर अनिश्चितता और वेम्बू की अपील

वेम्बू ने 13 अक्टूबर को एक्स पर लिखा, जब कोई दूसरा देश आपसे घर जाने को कहता है तो आप घर आते हैं. दूसरा रास्ता क्या है. क्या हम उनसे यहां रहने देने की भीख मांगें. क्या हम गैरकानूनी तरीके से रहें. उन्होंने यह भी कहा कि सॉफ्टवेयर नौकरियां कम होने पर भी भारत में बनाने के लिए दस लाख चीजें हैं.

उनकी यह अपील अमेरिका के उस फैसले के बाद आई, जिसमें आठ तकनीकी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन यानी पर्म कार्यक्रम से निलंबित किया गया है. यह नियोक्ता के जरिए मिलने वाले ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. प्रभावित कंपनियों में माइक्रोसॉफ्ट, इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो जैसी बड़ी तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियां शामिल हैं.

इस फैसले के बाद अमेरिकी सरकार इन कंपनियों से जुड़े नए पर्म आवेदन स्वीकार नहीं करेगी और लंबित आवेदनों पर भी कार्रवाई नहीं करेगी. यह फैसला अपने आप एच-1बी वीजा रद्द नहीं करता, लेकिन नियोक्ताओं के जरिए स्थायी निवास पाने की कोशिश कर रहे कर्मचारियों के लिए अनिश्चितता बढ़ाता है.

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी श्रीधर वेम्बू की बात का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि हर चुनौती भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर नई खोज को बढ़ावा देने का मौका देती है. इस पूरी बहस के बीच ये चर्चा हो रही है कि सभी नेता अपने बच्चों को व‍िदेश भेजकर क्यों पढ़ाते हैं, जब भारत में पर्याप्त संसाधन हैं. इस कड़ी में आइए जानते हैं कि इन व‍िश‍िष्ट नेताओं के बच्चे कहां से पढ़े हैं. 

हार्वर्ड, येल और दूसरे विश्वविद्यालयों में पढ़ाई

पीयूष गोयल के बेटे ध्रुव गोयल ने हार्वर्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए किया है. वह मुंबई और न्यूयॉर्क में कार्यालय रखने वाली निवेश कंपनी फोरलायन कैपिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं. पीयूष गोयल की बेटी राधिका गोयल ने अमेरिका के हार्वर्ड से स्नातक किया है. उनके मौजूदा काम की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

एस जयशंकर के बेटे ध्रुव जयशंकर ने अमेरिका के मैकलेस्टर कॉलेज से इतिहास और क्लासिक्स में बीए किया. इसके बाद उन्होंने जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय से सुरक्षा अध्ययन में एमए किया. वह वॉशिंगटन डीसी के सार्वजनिक नीति विचार समूह ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन अमेरिका के कार्यकारी निदेशक हैं.

वहीं निर्मला सीतारमण की बेटी वांग्मयी परकला ने नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के मेडिल स्कूल से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री ली है. वह पत्रकार और लेखिका हैं.

पूर्व श‍िक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बेटी ने कहां से ली ड‍िग्री

पूर्व केंद्रीय श‍िक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बेटी नैमिषा ने जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल से तीन साल की कानून की पढ़ाई की. उन्होंने आदान-प्रदान कार्यक्रम के जरिए टफ्ट्स विश्वविद्यालय में एक साल का एलएलएम कार्यक्रम भी किया. वह अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच में ऊर्जा, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे से जुड़े विभाग में वरिष्ठ सहयोगी हैं. इससे पहले उन्होंने नीति आयोग, सीएसआईएस और राष्ट्रीय महिला आयोग में काम किया था.

शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के कैरी लॉ स्कूल से कानून में मास्टर डिग्री पूरी की. उनकी पढ़ाई 2023 में पूरी हुई. उन्होंने 2017 में सुंदर फूड्स एंड डेयरी की शुरुआत की, जो 7,500 से ज्यादा किसान परिवारों के साथ काम करती है. उन्हें मध्य प्रदेश वॉलीबॉल संघ का अध्यक्ष बनाया गया है और वह भाजपा कार्यकर्ता भी हैं.

शिवराज सिंह चौहान के दूसरे बेटे कुणाल चौहान ने एनवाईयू स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस से 2016-2018 के दौरान विज्ञान में स्नातक किया. वह सुंदर फूड्स एंड डेयरी में प्रबंध साझेदार हैं.

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महानआर्यमन सिंधिया ने 2019 में येल विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान और शासन में स्नातक किया. वह 2025 से मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं और एथारा एआई के सह-संस्थापक हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बेटी अनन्या राजे सिंधिया ने 2024 में रोड आइलैंड स्कूल ऑफ डिजाइन से स्नातक किया. वह अमेरिका में गूगल डीपमाइंड में डिजाइनर हैं.

कारोबार, पत्रकारिता, कानून और राजनीति में करियर.

अश्विनी वैष्णव की बेटी तान्या वैष्णव ने स्क्रॉल के मुताबिक ब्रिटेन के एक विश्वविद्यालय से एमबीए किया है. वह सौंदर्य, सेहत और बालों की देखभाल से जुड़े क्षेत्र में उद्यमी हैं. अश्विनी वैष्णव के बेटे राहुल वैष्णव ने ब्रिटेन में पढ़ाई की है. वह एडलर इंडस्ट्रियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक हैं.

पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट ऑस्टिन से बीबीए और कैम्ब्रिज से कानून की डिग्री ली है. वह तमिलनाडु के शिवगंगा से सांसद हैं.

शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर ने येल विश्वविद्यालय से इतिहास और जातीयता, नस्ल तथा प्रवासन विषय में सम्मान के साथ बीए किया. वह अमेरिका में द न्यू यॉर्कर के लिए वैश्विक मामलों के स्तंभकार हैं.

सचिन पायलट के बेटे आरान पायलट ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया और ऑक्सफोर्ड स्कूल ऑफ लंदन में पढ़ाई की है. उनके मौजूदा काम की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव ने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंध में स्नातक की पढ़ाई की है. वह अपने माता-पिता के चुनाव प्रचार में शामिल हो चुकी हैं.

जयराम रमेश के बेटे अनिरुद्ध रमेश ने ब्रिटेन में पढ़ाई की है. उनके मौजूदा काम की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह ने ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से एमबीए किया है. वह उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष और रायबरेली जिले के प्रभारी हैं.

स्मृति ईरानी की बेटी शैनेल ईरानी ने अमेरिका के जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर से एलएलएम किया है. वह अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता मामलों की विशेषज्ञ वकील हैं. उनके पेशेवर परिचय के मुताबिक उन्हें न्यूयॉर्क में वकालत और इंग्लैंड तथा वेल्स में सॉलिसिटर के रूप में काम करने की मंजूरी मिली हुई है. वह दुबई में पिनसेंट मेसन्स में साझेदार के रूप में शामिल हुई हैं.

हरदीप सिंह पुरी की बेटी तिलोत्तमा पुरी ने ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक से स्नातक किया. इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से एलएलएम पूरा किया. वह अंतरराष्ट्रीय वकील हैं और उन्हें इंग्लैंड तथा वेल्स के बार में बैरिस्टर के रूप में काम करने की मंजूरी मिली हुई है.

विदेशी डिग्री से देश लौटने की बहस तक.

वेम्बू ने भारतीयों से मौजूदा अनिश्चितता से आगे देखने और भारत के तकनीकी तंत्र में योगदान देने को कहा है. उनका कहना है कि देश में कई समस्याओं का समाधान करना बाकी है और कारोबार, उत्पाद तथा नौकरियां तैयार करने के मौके मौजूद हैं.

नेताओं के बच्चों की शिक्षा से उन वैश्विक विश्वविद्यालयों की अलग-अलग तस्वीर सामने आती है, जिन्हें भारतीय परिवारों ने उच्च शिक्षा के लिए चुना है. उनके करियर शोध, कारोबार, पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन तक फैले हैं. इनमें कुछ भारत में काम कर रहे हैं, जबकि कुछ के पेशेवर रिश्ते विदेशों से जुड़े हैं.

भारत लौटने की बहस के बीच बड़ा सवाल यही है कि क्या देश इतनी अच्छी नौकरियां, शोध के मौके और तकनीक आधारित कारोबार तैयार कर सकता है कि विदेश में मौजूद ज्यादा कुशल भारतीय अपना भविष्य देश में बनाने के लिए लौटें.

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