बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली OBC केस की अपील, 77 समुदायों वाले मामले में बड़ा फैसला

Published on 14 जुल॰ 2026

बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली OBC केस की अपील, 77 समुदायों वाले मामले में बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की OBC सूची में शामिल 77 समुदायों का दर्जा रद्द करने वाले कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अपील वापस ले ली है. यह फैसला राज्य में सरकार बदलने के बाद लिया गया. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि राज्य कैबिनेट ने अपील वापस लेने का निर्णय लिया है. इसके बाद राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी अपनी अलग याचिका वापस ले ली. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अपीलें वापस लेने की अनुमति दे दी. हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई अन्य प्रभावित पक्ष चाहे तो वह इस मामले में अपनी अपील जारी रख सकता है.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों वापस ली अपील?

यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट के 22 मई 2024 के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें राज्य की OBC सूची में शामिल 77 समुदायों का दर्जा रद्द कर दिया गया था. इनमें 75 मुस्लिम समुदाय शामिल थे. उस समय ममता बनर्जी सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. अब राज्य में सरकार बदलने के बाद यह रुख बदल गया है. सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य कैबिनेट ने अपील वापस लेने का फैसला किया है. इसके बाद अदालत ने राज्य सरकार और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग दोनों को अपनी-अपनी अपील वापस लेने की अनुमति दे दी.

हाई कोर्ट ने 77 समुदायों का OBC दर्जा क्यों रद्द किया था?

कलकत्ता हाई कोर्ट ने मई 2024 में अपने फैसले में अप्रैल 2010 से सितंबर 2010 के बीच OBC सूची में जोड़े गए 77 समुदायों के आरक्षण को रद्द कर दिया था. इसके अलावा पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग अधिनियम, 2012 के तहत OBC श्रेणी में शामिल 37 अन्य वर्गों का आरक्षण भी निरस्त कर दिया गया था. अदालत ने कहा था कि इन समुदायों को OBC का दर्जा देने में धर्म मुख्य आधार दिखाई देता है, जो संविधान के अनुरूप नहीं है. हाई कोर्ट ने इन शामिलियों को अवैध और असंवैधानिक माना था. इसी फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार और पिछड़ा वर्ग आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा और अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अपीलें वापस लेने की अनुमति देते हुए साफ किया कि उसका यह आदेश किसी अन्य प्रभावित पक्ष का रास्ता नहीं रोकेगा. वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कुछ प्रभावित लोगों की ओर से अलग याचिकाओं को आगे बढ़ाने की अनुमति मांगी थी. अदालत ने कहा कि यदि किसी अन्य पक्ष को हाई कोर्ट के फैसले से शिकायत है तो वह अपनी अपील जारी रख सकता है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही 6 नवंबर 2024 को हाई कोर्ट में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा चुका था. उस समय शीर्ष अदालत राज्य सरकार सहित कुल 10 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें मई 2024 के हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी.

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रविशंकर दत्ता

रविशंकर दत्ता

रविशंकर दत्ता पश्चिम बंगाल से रिपोर्टिंग करते हैं. फिलहाल, टीवी9 भारतवर्ष में बतौर ब्यूरो हेड ईस्ट जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

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