Aug 11, 2026 05:32 am ISTहिन्दुस्तान टीम
पुरानी पेंशन योजना को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि इसपर कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। केंद्र ने कहा कि जहां तक बात है राजस्थान, हिमाचल और पंजाब जैसे राज्यों की तो वे अपने निर्णय के लिए स्वतंत्र हैं।

पुरानी पेंशन योजना पर कोई विचार नहीं- केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में पुरानी पेंशन योजना को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि केंद्र सरकार के पास पुरानी पेंशन योजना को फिर से शुरू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। एक लिखित जवाब में चौधरी ने बताया कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्य सरकारों ने राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) से पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) में लौटने की सूचना दी है। उन्होंने कहा कि यह राज्यों की नीतिगत पसंद का मामला है। चौधरी ने बताया कि पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) नियमों के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे एनपीएस में जमा कर्मचारियों का योगदान या फंड राज्य सरकारों को वापस ट्रांसफर किया जा सके।
पुरानी पेंशन पर कोई विचार नहीं
चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लाभ के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) शुरू की है। यह एक अप्रैल, 2025 से एक विकल्प के रूप में लागू है। इसके तहत सेवानिवृत्ति के बाद न्यूनतम 10,000 रुपये प्रतिमाह का निश्चित भुगतान और महंगाई से जुड़े लाभ दिए जाएंगे। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को कहा कि सरकारी खजाने पर अस्थिर वित्तीय देनदारी के कारण पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने केंद्र और पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से ओपीएस में वापसी के बारे में सूचित किया है। उन्होंने कहा, ''पीएफआरडीए अधिनियम, 2013, जिसे पीएफआरडीए (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत निकासी) विनियम, 2015 और अन्य प्रासंगिक विनियमों के साथ पढ़ा जाता है, के तहत कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत नौकरीपेशा लोगों के संचित कोष-- जैसे कि सरकारी अंशदान, एनपीएस के लिए कर्मचारियों के अंशदान के साथ-साथ संचय को वापस किया जा सकता है और राज्य सरकार को वापस जमा किया जा सकता है।''
राज्य निर्णय लेने को स्वतंत्र
एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए, चौधरी ने कहा कि राज्यों में ओपीएस की बहाली विशेष रूप से राज्य नीति विवेकाधिकार के अंतर्गत आती है। उन्होंने कहा, ''हालांकि, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी हालिया राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट में राज्यों द्वारा ओपीएस को वापस लेने के वित्तीय निहितार्थों को रेखांकित किया है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) एक परिभाषित योगदान-आधारित योजना है जिसे 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद सेवा में शामिल होने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए पेश किया गया था।'
चौधरी ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों के लिए पेंशन लाभ में सुधार की दृष्टि से, एनपीएस को संशोधित करने के उपाय सुझाने के लिए तत्कालीन वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। हितधारकों के साथ समिति के विचार-विमर्श के आधार पर, एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) पहले ही 1 अप्रैल 2025 से एनपीएस के तहत एक विकल्प के रूप में पेश की जा चुकी है, जिसका उद्देश्य एनपीएस के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद प्रति माह 10,000 रुपये के न्यूनतम सुनिश्चित भुगतान के साथ मुद्रास्फीति से जुड़े लाभ प्रदान करना है।
