बुमराह को पहले फिट माना गया, फिर OUT! आखिर चंद दिनों में क्या बदल गया?

Published on 4 अग॰ 2026

जसप्रीत बुमराह का श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर होना भारतीय टीम के लिए बड़ा झटका जरूर है, लेकिन इसके साथ ही बीसीसीआई के फिटनेस मैनेजमेंट सिस्टम पर भी सवाल उठने लगे हैं. सवाल बुमराह की चोट पर नहीं, बल्कि उस फिटनेस अपडेट पर उठ रहे हैं, जिसके आधार पर चयनकर्ता टीम की योजना बनाते हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ कि पहले बुमराह के उपलब्ध रहने की उम्मीद जताई गई और फिर अचानक उन्हें पूरी टेस्ट सीरीज से बाहर करना पड़ा?

यही वजह है कि सोमवार को बीसीसीआई में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE), राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण, चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर और सचिव देवजीत सैकिया के बीच खिलाड़ियों की चोट और फिटनेस प्रबंधन को लेकर अहम समीक्षा बैठक हुई. इस बैठक का केंद्र सिर्फ बुमराह नहीं थे, बल्कि पूरा फिटनेस इकोसिस्टम था.

सूत्रों के मुताबिक चयनकर्ताओं को शुरुआत में बताया गया था कि बुमराह 15 अगस्त से शुरू होने वाली श्रीलंका टेस्ट सीरीज के दौरान उपलब्ध हो सकते हैं. इसी इनपुट के आधार पर टीम संयोजन पर विचार किया गया. बाद में मेडिकल आकलन बदला और साफ हो गया कि उनकी चोट उम्मीद से ज्यादा गंभीर है. इसके बाद चयनकर्ताओं को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी.

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यहीं से सवाल शुरू होते हैं. अगर किसी खिलाड़ी की रिकवरी तय समय पर नहीं हो रही, तो क्या शुरुआती आकलन जरूरत से ज्यादा आशावादी था? और अगर फिटनेस अपडेट बार-बार बदल रहे हैं, तो चयनकर्ता आखिर किस जानकारी पर भरोसा करें?

दरअसल, यह पहला मामला नहीं है. हाल के महीनों में हर्षित राणा, वॉशिंगटन सुंदर और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ियों की चोट और वापसी को लेकर भी चर्चा होती रही है. हर्षित राणा को फिट घोषित किए जाने के बाद उनकी हैमस्ट्रिंग की समस्या फिर उभर आई. सुंदर लगातार मांसपेशियों की चोट से जूझते रहे हैं, जबकि नीतीश रेड्डी की फिटनेस को लेकर भी सवाल उठे कि उनकी गेंदबाजी में गति बढ़ाने की कोशिश कहीं उन पर भारी तो नहीं पड़ गई.

इन लगातार मामलों ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की खेल विज्ञान और चिकित्सा इकाई की कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी है. बीसीसीआई में नितिन पटेल के जाने के बाद खेल विज्ञान विभाग के प्रमुख का पद अभी तक स्थायी रूप से नहीं भरा गया है. फिलहाल अंतरिम जिम्मेदारी धनंजय कौशिक के पास है. उनकी विशेषज्ञता पर सवाल नहीं हैं, लेकिन खिलाड़ियों की रिकवरी का सटीक आकलन, 'रिटर्न टू प्ले' की समयसीमा और चयनकर्ताओं तक सही जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया अब जांच के दायरे में है.

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि किसी खिलाड़ी को बाहर रखना सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकता है, लेकिन असली कसौटी यह है कि उसे सही समय पर मैदान पर लौटाया जाए. अगर फिटनेस का आकलन और चयनकर्ताओं तक पहुंचने वाली जानकारी में अंतर रहेगा, तो इसका असर सीधे टीम चयन पर पड़ेगा.

बुमराह के बाद अब चयनकर्ताओं की नजर साई सुदर्शन की फिटनेस पर भी है. बताया जा रहा है कि वह नेट्स में करीब 75 मिनट तक बल्लेबाजी कर रहे हैं और तेजी से फिट हो रहे हैं. लेकिन अगर आखिरी समय में उनकी फिटनेस को लेकर भी स्थिति बदलती है, तो चयन प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल उठ सकते हैं.

भारतीय टीम के फिजियो कामलेश जैन की भूमिका भी समीक्षा के दायरे में बताई जा रही है. पिछले करीब पांच वर्षों से वह टीम के साथ हैं और खिलाड़ियों के बीच उनकी अच्छी छवि है. लेकिन लगातार सामने आ रहे फिटनेस मामलों ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या भारत का हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम खिलाड़ियों की चोट और वापसी को सही ढंग से संभाल पा रहा है

बुमराह का बाहर होना सिर्फ टीम इंडिया के लिए झटका नहीं है. इसने बीसीसीआई के फिटनेस सिस्टम की भी परीक्षा ले ली है. अब देखना होगा कि बोर्ड सिर्फ समीक्षा तक सीमित रहता है या खिलाड़ियों की चोट और फिटनेस प्रबंधन व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव भी करता है.

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