PAK ये कैसी मदद कर रहा? बेखौफ हूतियों ने मार डाले सऊदी समर्थित 53 यमनी सैनिक!

Published on 19 अक्टू॰ 2026

पाकिस्तान सेना के एक सीनियर जनरल ने कहा है कि हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच, उनका देश सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और पवित्र स्थलों की रक्षा के लिए "हर जरूरी मदद" दे रहा है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और दो पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा पाकिस्तान के लिए "सर्वोच्च" है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.

रविवार को अरबी भाषा के डिजिटल अखबार 'इंडिपेंडेंट अरबिया' को दिए एक इंटरव्यू में लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने कहा, "इसके लिए जो भी मदद जरूरी है, वह दी जा रही है और आगे भी दी जाती रहेगी." हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह मदद किस तरह की होगी या इसका दायरा कितना होगा. 

पाकिस्तान का दावा एक और है, लेकिन यमन की सच्चाई कुछ और है. सोमवार को हूती विद्रोहियों ने बड़ा हमला करते हुए सऊदी समर्थित यमन की सरकारी सेना पर हमला किया. ये हमला शबवा में एक मिलिट्री ट्रेनिंग पर किए गए थे. इस हमले में 53 सैनिकों की मौत हो गई है. इसके अलावा सोमवार को ही हूती विद्रोहियों ने रियाद पर भी मिसाइलें बरसाई हैं. 

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ये स्थिति तब है जब मक्का पैक्ट एक्टिवेट है और पाकिस्तान सऊदी अरब की रक्षा कर रहा है. 

हूती हमलों पर पाकिस्तान में गुस्सा

लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने कहा कि हूती हमलों पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया "गुस्से" वाली थी. उन्होंने जोर देकर कहा कि सऊदी अरब और पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर कोई "अगर-मगर" नहीं हो सकता.

इस सवाल पर कि अगर हमले जारी रहते हैं, तो क्या खाड़ी देश (सऊदी अरब) को पाकिस्तान का समर्थन केवल रक्षात्मक ही रहेगा, उन्होंने कहा कि गठबंधन के तीनों सदस्य इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि उनका "कोई आक्रामक इरादा नहीं है" और यह "पूरी तरह से रक्षात्मक" है.

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रतिरोध की व्यवस्था एक स्पष्ट संदेश देती है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हमला होता है, तो उसका जवाब तीनों देश मिलकर देंगे.

सैन्य प्रवक्ता ने कहा, "अगर यह प्रतिरोध काम नहीं करता है, तो तीनों देशों के पास मौजूद सभी साधनों का इस्तेमाल करके इस प्रतिरोध को फिर से कायम किया जाएगा."

इस सवाल पर कि क्या इस्लामाबाद ने ईरान को कोई चेतावनी दी है, चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है. जिसमें ईरान भी शामिल है. ताकि संयम बरता जा सके और तनाव कम हो सके. 

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने हाल ही में कहा था कि सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और मक्का-मदीना के पवित्र स्थलों की सुरक्षा पाकिस्तान के लिए सर्वोपरि है. उन्होंने कहा कि जरूरत के मुताबिक मदद दी जा रही है और आगे भी दी जाएगी. लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि सहायता का स्वरूप क्या है और उसकी सीमा कितनी है. सवाल है कि क्या पाकिस्तान सऊदी अरब को मदद के नाम पर ठग रहा है. अगर सऊदी अरब को पाक मदद कर रहा है, तो इसका असर क्यों नहीं दिख रहा है.

पाकिस्तान का कहना है कि यह गठबंधन रक्षात्मक है, किसी देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि गठबंधन की घोषणा का मतलब यह नहीं कि हर सैन्य ठिकाने या यमन में सऊदी समर्थित हर बल को हमले से पूरी सुरक्षा मिल गई है.

हूतियों की ताकत और गठबंधन की परीक्षा

हूतियों ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब के हवाई अड्डों और तेल ठिकानों को भी निशाना बनाया है. यमन में वे सरकारी बलों के खिलाफ लड़ाई तेज कर रहे हैं और रणनीतिक बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास भी अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश में हैं. ईरान से हूतियों को हथियारों और सैन्य विशेषज्ञता मिलने की बात संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और अन्य विश्लेषकों ने कही है, हालांकि ईरान हथियार देने के आरोपों से इनकार करता है.

 शबवा का हमला ऐसे वक्त हुआ है, जब सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए सैन्य अभियान चला रहा है. यमन की प्रांतीय सरकार ने हमले के बाद बेहतर हवाई रक्षा और शुरुआती चेतावनी प्रणाली की मांग की है.

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