PM Modi Exam Reforms: पीएम मोदी ने परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई पावर टास्क फोर्स गठित की। जानिए कमेटी में कौन-कौन शामिल हैं।
नंदन नीलेकणि, जिन्हें भारत के 'आधार कार्ड का जनक' माना जाता है, पूर्व में उइड़ाई के पहले अध्यक्ष और इन्फोसिस के सीईओ रह चुके हैं।
- Published: 26 Jul 2026, 07:51 PM IST
- Last Updated: 26 Jul 2026, 08:27 PM IST
PM Modi Exam Reforms: पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 जुलाई) को बड़ा ऐलान किया। केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें ISRO के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, IB के पूर्व निदेशक तपन डेका और IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि समेत शिक्षा, सुरक्षा, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के दिग्गजों को शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए देश के युवाओं और परीक्षार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उनका जोर अब ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें पारदर्शिता और विश्वसनीयता के साथ आधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल हो।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर सख्ती
पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। पेपर लीक जैसे मामलों में तेजी से कार्रवाई और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की दिशा में भी सरकार कदम उठा चुकी है।
प्रधानमंत्री ने 23 जुलाई को भी कहा था कि पेपर लीक से जुड़े लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और कठोर सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला लिया गया है।
पीएम मोदी का संदेश साफ है कि केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक और तकनीकी बदलाव भी जरूरी हैं।
HIGH POWERED TASK FORCE on examination reforms under the leadership of Shri Nandan Nilekani constituted.@NandanNilekani pic.twitter.com/mMpmPdIEL5
— Narendra Modi (@narendramodi) July 26, 2026
अब परीक्षा प्रणाली को 'लीक-प्रूफ' बनाने पर फोकस
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी परीक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जिस पर छात्र और अभिभावक भरोसा कर सकें। परीक्षा प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करने और सिस्टम की कमजोरियों को दूर करने के लिए ही हाई पावर टास्क फोर्स बनाई गई है।
यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद खामियों की पहचान करने के साथ तकनीकी सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के उपाय सुझाएगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसका खास फोकस NTA की ओर से आयोजित परीक्षाओं को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर रहेगा।
नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई पावर टास्क फोर्स
परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए सरकार ने देश के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उनकी अध्यक्षता में गठित हाई पावर टास्क फोर्स परीक्षा सुधार से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी और सरकार को अपनी सिफारिशें देगी।
पीएम मोदी ने कहा कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कदम उठाए जाएंगे। नंदन नीलेकणि देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। वह Infosys के सह-संस्थापक हैं और UIDAI के संस्थापक अध्यक्ष रह चुके हैं। आधार व्यवस्था को विकसित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
ISRO से IB तक के दिग्गज टास्क फोर्स में शामिल
सरकार ने टास्क फोर्स को केवल शिक्षा विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रखा है। इसमें टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष विज्ञान, खुफिया और सुरक्षा, प्रशासन तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़े विशेषज्ञों को जगह दी गई है।
हाई पावर टास्क फोर्स में ये प्रमुख सदस्य शामिल हैं
- नंदन नीलेकणि - टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट, अध्यक्ष
- एस. सोमनाथ - पूर्व अध्यक्ष, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- तपन डेका - पूर्व निदेशक, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)
- प्रो. वी. कामकोटि - निदेशक, IIT मद्रास
- अनीता करवाल - पूर्व शिक्षा सचिव, भारत सरकार
- अमृत लाल मीणा - लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ
टास्क फोर्स की यह संरचना संकेत देती है कि परीक्षा सुधार को केवल प्रश्नपत्र तैयार करने या परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा जाएगा। तकनीकी सुरक्षा से लेकर परीक्षा सामग्री की आवाजाही, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और पूरे सिस्टम की जवाबदेही तक विभिन्न पहलुओं पर काम किया जा सकता है।
टास्क फोर्स के सामने क्या होगी बड़ी जिम्मेदारी?
नई टास्क फोर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की हाई-स्टेक प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में छात्रों का भरोसा मजबूत करने की होगी। इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया की कमजोर कड़ियों की पहचान, सुरक्षित डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और संस्थागत सुरक्षा उपायों को मजबूत करने जैसे क्षेत्रों पर सिफारिशें तैयार की जाएंगी।
विशेष रूप से परीक्षा प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने पर जोर रहेगा। सरकार टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर आगे की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव करेगी।
क्यों अहम है नंदन नीलेकणि को जिम्मेदारी देना?
नंदन नीलेकणि को टास्क फोर्स की कमान सौंपना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह भारत के बड़े डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे हैं। UIDAI के संस्थापक अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने आधार परियोजना में अहम भूमिका निभाई।
ऐसे में परीक्षा सुधार में उनकी भूमिका से संकेत मिलता है कि सरकार पेपर लीक रोकने की रणनीति में तकनीक को महत्वपूर्ण हथियार बनाना चाहती है। हालांकि परीक्षा व्यवस्था में कौन-कौन से नए तकनीकी बदलाव किए जाएंगे, इसका स्पष्ट रोडमैप टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद ही सामने आएगा।
पेपर लीक विवाद के बीच सरकार का बड़ा संदेश
हाई पावर टास्क फोर्स का गठन ऐसे समय हुआ है, जब पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों में नाराजगी रही है। परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।
ऐसे में नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स का गठन तत्काल कार्रवाई से आगे बढ़कर परीक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली की किन कमजोरियों की पहचान करती है, पेपर लीक रोकने के लिए कौन से तकनीकी उपाय सुझाती है और उसकी सिफारिशों को सरकार कितनी तेजी से लागू करती है।